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मेरठ स्पोर्ट्स इंडस्ट्री का उभार, उत्तर प्रदेश बनेगा ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग पावर हाउस

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Uttar Pradesh Will Become a Global Manufacturing Powerhouse
- 2036 तक देश के 11 प्रतिशत वैश्विक हिस्सेदारी के लक्ष्य में यूपी निभा सकता है निर्णायक भूमिका
- जेवर एयरपोर्ट और नोएडा लॉजिस्टिक्स हब से निर्यात लागत घटेगी, रफ्तार बढ़ेगी
- उत्तर प्रदेश सरकार की सक्रिय नीतियां मेरठ को नई पहचान दे रहीं हैं
Uttar Pradesh News : योगी सरकार के उद्योग प्रोत्साहन और क्लस्टर आधारित विकास के विजन के चलते मेरठ देश के स्पोर्ट्स इक्विपमेंट सेक्टर का मजबूत केंद्र बनकर उभर रहा है। नीति आयोग की हालिया रिपोर्ट ने भी इस तथ्य को रेखांकित किया है कि यदि पारंपरिक मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टरों को आधुनिक तकनीक और नीतिगत समर्थन मिले तो भारत वैश्विक बाजार में अपनी हिस्सेदारी कई गुना बढ़ा सकता है। इस दिशा में उत्तर प्रदेश सरकार की सक्रिय नीतियां मेरठ को नई पहचान दे रहीं हैं।
 
मेरठ लंबे समय से देश का प्रमुख स्पोर्ट्स गुड्स मैन्युफैक्चरिंग हब रहा है। यहां 250 से अधिक निर्यात इकाइयों के साथ 1,000 से अधिक घरेलू इकाइयां, 4000 से ज्यादा सूक्ष्म उद्यम और लगभग 20,000 घरेलू उत्पादन इकाइयां सक्रिय हैं। क्रिकेट बैट, फुटबॉल, बॉक्सिंग ग्लव्स और जिम उपकरण जैसे उत्पादों का बड़े पैमाने पर उत्पादन होता है। योगी सरकार ने इस पारंपरिक ताकत को आधुनिक औद्योगिक विकास से जोड़ने का काम किया है ताकि स्थानीय उद्योग वैश्विक प्रतिस्पर्धा में आगे बढ़ सके।
प्रदेश सरकार की औद्योगिक नीतियों के अंतर्गत मेरठ समेत पश्चिमी उत्तर प्रदेश में इंफ्रास्ट्रक्चर सुधार पर विशेष ध्यान दिया गया है। बेहतर सड़क नेटवर्क, एक्सप्रेस-वे और लॉजिस्टिक्स सुविधाओं ने निर्यात को आसान बनाया है। साथ ही सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) को वित्तीय सहायता, तकनीकी उन्नयन और प्रशिक्षण कार्यक्रमों से जोड़ा जा रहा है। इससे उत्पादन क्षमता और गुणवत्ता दोनों में सुधार हो रहा है।
 
केंद्र सरकार के बजट 2026 में स्पोर्ट्स गुड्स सेक्टर के लिए 500 करोड़ रुपये का विशेष प्रावधान और पारंपरिक क्लस्टरों के आधुनिकीकरण पर जोर ने इस क्षेत्र को नई गति दी है। उत्तर प्रदेश सरकार इस अवसर का लाभ उठाते हुए मेरठ को ग्लोबल सप्लाई चेन से जोड़ने की दिशा में काम कर रही है। निवेश आकर्षित करने के लिए नीतिगत सरलता और सिंगल विंडो सिस्टम जैसी व्यवस्थाएं उद्योगों के लिए अनुकूल माहौल तैयार कर रहीं हैं।
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रिपोर्ट के अनुसार, भारत का वैश्विक स्पोर्ट्स इक्विपमेंट निर्यात में हिस्सा वर्तमान में 0.5 प्रतिशत है, जिसे 2036 तक बढ़ाकर 11 प्रतिशत यानी करीब 8.1 बिलियन डॉलर तक ले जाने का लक्ष्य रखा गया है। हालांकि इस सेक्टर को कच्चे माल की लागत, 10 से 20 प्रतिशत तक आयात शुल्क, तकनीकी कमी और वैश्विक प्रतिस्पर्धा जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है, लेकिन उत्तर प्रदेश सरकार इन समस्याओं के समाधान के लिए लगातार प्रयासरत है।
 
आधुनिक मशीनरी की उपलब्धता, स्किल डेवलपमेंट और ब्रांडिंग को बढ़ावा देने के कदम उठाए जा रहे हैं ताकि स्थानीय उत्पाद अंतरराष्ट्रीय मानकों पर खरे उतर सकें। आने वाले वर्षों में कॉमनवेल्थ गेम्स 2030 और संभावित ओलंपिक 2036 जैसे बड़े आयोजनों के चलते स्पोर्ट्स इक्विपमेंट की मांग में तेजी आने की संभावना है। 
 

नोएडा बन रहा स्पोर्ट्स इंडस्ट्री के लिए लॉजिस्टिक गेम चेंजर

पश्चिमी उत्तर प्रदेश में विकसित हो रहा नोएडा क्षेत्र स्पोर्ट्स इक्विपमेंट्स सेक्टर के लिए नई ताकत बनकर उभर रहा है। जेवर का नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट और ग्रेटर नोएडा का आधुनिक लॉजिस्टिक्स हब निर्यात को तेज और किफायती बनाने में अहम भूमिका निभाएंगे।
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बेहतर कनेक्टिविटी से मेरठ जैसे पारंपरिक क्लस्टरों को सीधा लाभ मिलेगा, जिससे ट्रांजिट समय घटेगा और लागत में कमी आएगी। साथ ही नोएडा में मौजूद औद्योगिक इकाइयां और बड़ी कंपनियां सप्लाई चेन को मजबूत कर रही हैं, जिससे उत्तर प्रदेश का यह पूरा बेल्ट वैश्विक बाजार के लिए एक प्रतिस्पर्धी मैन्युफैक्चरिंग और एक्सपोर्ट जोन बनता जा रहा है।
Edited By : Chetan Gour

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