Publish Date: Thu, 14 May 2026 (10:10 IST)
Updated Date: Thu, 14 May 2026 (10:07 IST)
यदि आप यह व्रत रख रही हैं, तो ये 10 बातें आपके लिए जानना बहुत जरूरी हैं:
1. व्रत का मुख्य उद्देश्य
यह व्रत पति की लंबी आयु, उत्तम स्वास्थ्य और अखंड सौभाग्य के लिए रखा जाता है। पौराणिक मान्यता है कि इसी दिन माता सावित्री ने अपने दृढ़ संकल्प से यमराज को पराजित कर पति सत्यवान के प्राण वापस पाए थे।
2. वट (बरगद) वृक्ष का महत्व
शास्त्रों के अनुसार वट वृक्ष की जड़ों में ब्रह्मा, तने में विष्णु और शाखाओं में शिव का वास होता है। साथ ही इसकी लटकती हुई जड़ें माता सावित्री का रूप मानी जाती हैं। इसलिए इस वृक्ष की पूजा से त्रिदेवों का आशीर्वाद मिलता है।
3. बांस के पंखे का रहस्य
पूजा सामग्री में बांस का पंखा अनिवार्य है। कथा के अनुसार, जब सत्यवान के प्राण वापस आए, तो सावित्री ने सबसे पहले उन्हें पंखे से हवा की थी। पूजा में बांस के पंखे से सावित्री और सत्यवान को हवा करने की परंपरा है। आज भी महिलाएं पूजा के दौरान वट वृक्ष और अपने पति को पंखे से हवा कर उनकी थकान दूर करने और शीतलता प्रदान करने की कामना करती हैं। बाद में यह पंखा दान भी किया जाता है।
4. कच्चे सूत की परिक्रमा
वट वृक्ष के चारों ओर कच्चा सूत लपेटते हुए 7, 12 या 108 बार परिक्रमा की जाती है। यह सूत पति-पत्नी के अटूट रिश्ते का प्रतीक है। धागा लपेटते समय अपनी मनोकामना मन ही मन दोहराई जाती है।
6. सोलह श्रृंगार है शुभ
चूंकि यह सौभाग्य का पर्व है, इसलिए इस दिन महिलाओं को पूर्ण सोलह श्रृंगार करना चाहिए। विशेषकर सिंदूर, बिंदी और मेहंदी लगाना अत्यंत शुभ माना जाता है। इस दिन पीले या लाल रंग के नए वस्त्र पहनना उत्तम होता है।
7. अखंड सुहाग की प्रार्थना
इस दिन महिलाएं समूह में एकत्रित होकर पूजा करती हैं, जिससे आपसी प्रेम और सद्भाव बढ़ता है। पूजा के बाद महिलाएं वट वृक्ष से अपने अखंड सौभाग्य की प्रार्थना करती हैं। इस दिन माता सावित्री को चढ़ाया गया सिंदूर अपनी मांग में लगाना "अखंड सौभाग्य" का प्रतीक माना जाता है।
8. दान-पुण्य का फल
इस दिन दान का विशेष महत्व है। पूजा के बाद सामर्थ्य अनुसार ब्राह्मणों या जरूरतमंदों को फल, अनाज, वस्त्र और विशेषकर बांस का पंखा दान करना चाहिए। ज्येष्ठ की गर्मी में जल सेवा/ प्याऊ लगवाना भी श्रेष्ठ पुण्य है।
9. व्रत कथा सुनना अनिवार्य
बिना कथा सुने यह व्रत अधूरा माना जाता है। सावित्री की बुद्धिमानी और यमराज के साथ उनके संवाद की कथा हमें यह सिखाती है कि सच्ची निष्ठा और प्रेम से कठिन से कठिन बाधा को भी दूर किया जा सकता है।
10. पारण और आशीर्वाद
पूजा संपन्न होने के बाद घर के बुजुर्गों (सास, ससुर या बड़ों) के पैर छूकर आशीर्वाद लेना चाहिए। इससे घर में सुख-शांति बनी रहती है।
एक छोटी सी सलाह: वट सावित्री की पूजा सामूहिक रूप से करना अधिक फलदायी और उत्साहजनक माना जाता है। क्योंकि यह व्रत सामाजिक एकजुटता का भी प्रतीक है। इससे आपसी भाईचारा और प्रेम भी बढ़ता है।
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