Woman Special %e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%ae%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%ac%e0%a5%80 %e0%a4%95%e0%a5%80 %e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%b9%e0%a4%a4 110120600024_1.htm

Hanuman Chalisa

Select Your Language

Notifications

webdunia
webdunia
webdunia
webdunia

कामयाबी की राहत

केबीसी की पहली महिला करोड़पति

Advertiesment
वामा विशेष
- राँची से अमित झा

ND
देश के सबसे बड़े रिएलिटी शो 'कौन बनेगा करोड़पति' यानी केबीसी की पहली महिला करोड़पति विजेता बनने के बाद राहत तसलीम अब झारखंड के लिए सेलेब्रिटी बन गई हैं। राहत की जीत को महिला सशक्तिकरण का एक नायाब उदाहरण माना जा रहा है। खास तौर से मुस्लिम समुदाय में ज्यादा उत्साह दिखता है। राहत ने इस कौम को तालीम और उससे मिलने वाली कामयाबी का नया पैगाम दिया है।

'केबीसी-4' से करोड़पति राहत आज बेहद खुश है। एक करोड़ जीतने के बाद उसने स्वयं अमिताभ बच्चन को हॉट सीट पर बताया कि सिविल सेवा परीक्षाओं की तैयारी के कारण उसका सामान्य ज्ञान अच्छा है। वह शिक्षिका बनना चाहती थी लेकिन समय ने उसका साथ नहीं दिया।

राँची के बूटी मोड़ इलाके में जन्मी और पली-बढ़ी राहत ने अपनी पढ़ाई शहर के ही आरसी मिडिल स्कूल और संत मारग्रेट उच्च विद्यालय एवं राँची विमेंस कॉलेज से की। 1992 में उसकी शादी गिरिडीह निवासी इम्तियाज के साथ हो गई। राहत के दो बच्चे हैं। बड़ा बेटा फैसल 15 वर्ष का है और गिरिडीह में डीएवी का छात्र है। छोटी बेटी ताजिम राहत सात वर्ष की है। बेटा फैसल कंप्यूटर इंजीनियर बनना चाहता है।

webdunia
ND
आज राहत की लोकप्रियता का आलम यह है कि गिरिडीह जिले के जिस मुहल्ले में उसका घर है, उसका नाम अब केबीसी रोड पड़ गया है। सीएम अर्जुन मुंडा ने भी राहत को बधाई दी है। उन्होंने इसे राज्य के लिए गौरव बताया है।

'केबीसी-4' की हॉटसीट तक पहुँचने का रास्ता राहत के लिए आसान नहीं रहा। राहत की अम्मा तसलीमा खानम के मुताबिक राहत ने समय की कई मुश्किलों का सामना बड़ी दिलेरी से किया है। तीन बहन व दो भाई में से एक बहन और दोनों भाइयों को राहत खो चुकी है। घर की माली हालत कभी अच्छी नहीं रही। राहत ने मुश्किलों का सामना करने की जिद ठाने रखी।

हौसला बुलंद बनाए रखा। पढ़ाई के साथ-साथ स्वयं को आत्मनिर्भर बनाने का निरंतर प्रयास करती रही। पढ़ने-लिखने में मेधावी थी। शादी होने के बाद भी उसने अपने घर की जरूरतों के लिए सिलाई-कढ़ाई का कामकाज शुरू किया था। सामाजिक और परंपरागत तकाजे के कारण अन्य विकल्प भी नहीं थे।

webdunia
ND
शौहर इम्तियाज रोजी-रोटी के लिए केरल चला गया था। राहत कामकाज के साथ-साथ राहत झारखंड लोक सेवा आयोग परीक्षा और शिक्षक बनने के लिए तैयारी भी करती रही। राहत ने जब केबीसी में भागीदारी की थी, उस समय तक उसका अपना एक बैंक अकाउंट तक नहीं था पर आज उसकी मेहनत रंग लाई है।

राहत का आज चारों ओर इस्तकबाल हो रहा है। वह जिन कार्यक्रमों में भी जाती हैं, वहां शिक्षा पर जोर देती हैं। खासकर बच्चों को वह प्रोत्साहित करते हुए कहती हैं कि तालीम ही आपके जीवन को कामयाबी के रास्ते पर ले जा सकती है। यही आपका भविष्य बना सकती है।

दृढ़ इच्छाशक्ति हो तो हर कामयाबी हासिल की जा सकती है। बच्चों के साथ-साथ वह अभिभावकों से भी अपने बच्चों को अच्छी से अच्छी शिक्षा देने की अपील कर रही है। राँची विश्वविद्यालय में मनोविज्ञान विभाग के प्राध्यापक डॉ. ए. खालिक राहत की कामयाबी को बेहद खास मानते हैं। उनके मुताबिक मुस्लिम समुदाय में शिक्षा के प्रति विशिष्ट अभिरुचि अपेक्षाकृत कम देखी जाती है। माँ-बाप अपने बच्चों को शिक्षा दिलाने के नाम पर बहुत ईमानदारी नहीं दिखाते।

खासकर गरीब और निम्न आय वर्ग वाले परिवार परंतु राहत तसलीम ने जो कारनामा कर दिखाया है, उसका दूरगामी परिणाम होगा। महिलाओं को एक संबल देने के साथ-साथ वह समाज में शिक्षा के प्रति अलख जगाने की एक मिसाल बनी है।

Share this Story:

Follow Webdunia Hindi