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छोड़िए अब बहाने बनाना

आपके पास भी है गुणों का खजाना

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गुण
- सुषमा दुबे

NDND
अणिमा जब भी नंदिता के घर आती है उसके बनाए खाने, गार्डन, गृहसज्जा व हुनर की तारीफ करते नहीं अघाती, लेकिन नंदिता जब उसे ऐसा ही कुछ करने के लिए कहती है तो वह मुँह बिचका कर कहती है- हमारी किस्मत में ये सब कहाँ।

हम तो जैसा-तैसा बना लेते हैं और जैसे-तैसे जी लेते हैं, जबकि नंदिता जानती है अणिमा फूहड़ता व आलस्य छोड़ दे और पैसों का सही उपयोग करे तो वह सब कुछ कर सकती है।

अणिमा की तरह कई लोगों की आदत रहती है कि वे दूसरों की परख तो भली प्रकार कर लेते हैं, तारीफ में भी पीछे नहीं रहते हैं, किंतु स्वयं कुछ सीखना नहीं चाहते हैं और किस्मत के सहारे जीते हैं। इन्हें कोई कुछ सिखाना चाहे तो बगले झाँकने लगते हैं और बहाने बनाने लगते हैं।

वे भूल जाते हैं कि वे आखिर क्यों और कब तक दूसरों की जय-जयकार करते रहेंगे। वे भी तो इंसान हैं। इसी दुनिया में रहते हैं। उन्हें भी दूसरों के समान अवसर और सुविधाएँ मिली हैं। फिर क्यों जीवन भर दूसरों से पीछे ही रहते हैं। इसका सीधा-सा जवाब है- स्वयं को कमतर और हीन समझना तथा स्वयं पर विश्वास न होना।

  बड़े से बड़े महल का प्रवेश द्वार भी छोटा ही होता है। अतः आप छोटे, किंतु उपयोगी कार्य करके स्वयं तथा दूसरों का जीवन प्रकाशित कर सकती हैं। केवल दूसरों की जय-जयकार में ही न लगे रहें, खुद भी इस लायक बनें कि लोग आपकी जयकार करें।      
अपनी प्रतिभा को पहचानें :
ईश्वर ने प्रत्येक मनुष्य को किसी न किसी सद्गुण व योग्यता से नवाजा है। स्वयं के अंदर झाँककर देखें तो सही कि किस तरह हम दूसरों से आगे निकल सकते हैं। आलस्य, हीनभावना और कमजोरियों को त्याग कर कोई भी सिर उठाकर जी सकता है। याद कीजिए एक समय था, जब आपकी हैंडराइटिंग के सब कायल थे, लेकिन आज आपको कुछ लिखे कितने दिन हो गए हैं।

शायद महीनों... या सालों... तो क्यों न खाली समय में कॉलोनी के बच्चों की राइटिंग सुधरवाने का जिम्मा लें। आपके पास छोटा घर है, गार्डन के लिए जगह नहीं है तो क्या हुआ, कुछ अच्छी वैराइटी के हैंगिग प्लान्ट्स ले आइए। साथ ही छोटे-छोटे गमलों में विभिन्न प्रकार के सजावटी व फूलदार पौधे लगाएँ। इससे मन तो प्रसन्न होगा ही, दूसरे तारीफ भी करेंगे।

तारीफ भी करें, गुणग्राही भी बनें :
किसी की प्रशंसा करने हेतु बड़ा दिल चाहिए जो कि आपके पास है, लेकिन जिसका गुणगान कर रहे हैं, उससे कुछ सीखिए भी। मान लीजिए आपकी पड़ोसन बहुत खूबसूरत है। साथ ही सलीके से भी रहती है।

हो सकता है आपको भगवान ने उसके जितनी अच्छी हाइट, रंग और नैन नक्श न दिए हों, लेकिन किसी दिन त्वचा की साज-सम्भाल करें, बालों में मेहंदी करें, नए स्टाइल में साड़ी पहनें या साड़ी की जगह प्यारा-सा सूट पहनें, वजन ज्यादा है तो नियंत्रित करें। फिर देखें लोगों की कमेन्ट्स। थोड़ा कष्ट अवश्य उठाना होगा, किंतु जब प्रशंसा मिलने लगेगी तो उत्साहवर्धन भी होने लगेगा।

लक्ष्य निर्धारित करें :
लक्ष्यहीन मनुष्य का जीवन कौड़ी तुल्य होता है। लक्ष्य निर्धारित कर जीने से जीवन हीरे के समान दमकने लगता है। अन्य जीवों से हटकर हमें मानव जीवन मिला है। इसे हमेशा नए गुणों से सजाते, सँवारते, निखारते रहना चाहिए। खाना, सोना तो सभी प्राणी करते हैं, किंतु मनुष्य को ईश्वर ने उच्च स्तरीय जीवन, तेज दिमाग, मधुर वाणी तथा मानवता से नवाजा है।

इन गुणों तथा खूबियों का सदुपयोग कर संसार में अपनी अलग पहचान बनाइए, जिसके कई तरीके हैं। यदि आप ज्यादा कुछ नहीं कर सकती तो दूसरों की छोटी-मोटी सहायता, सेवा तन-मन-धन किसी भी प्रकार से कर सकती हैं।

बड़े से बड़े महल का प्रवेश द्वार भी छोटा ही होता है। अतः आप छोटे, किंतु उपयोगी कार्य करके स्वयं तथा दूसरों का जीवन प्रकाशित कर सकती हैं। केवल दूसरों की जय-जयकार में ही न लगे रहें, खुद भी इस लायक बनें कि लोग आपकी जयकार करें।

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