हाल ही में, मैंने एक जगह एक स्तंभ हमारे अपने राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी द्वारा दिए गए, अहिंसा के सिद्धांत पर लिखा। अहिंसा के इस सिद्धांत का पालन करने वाले तीन व्यक्तियों को नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया। ये तीन व्यक्ति मार्टिन लूथर किंग जूनियर, नेल्सन मंडेला, आंग सान सू की थे। मार्टिन लूथर किंग जूनियर, जब नार्वे के ओसलो में नोबेल पुरस्कार ग्रहण कर रहे थे, तब उन्होंने महात्मा गाँधी का स्तुतिगान करते हुए कहा कि वे अमेरिका जैसे हिंसक देश में अहिंसा का पालन करते रहेंगे। यह एक विडम्बना है कि गाँधीजी को कभी नोबेल पुरस्कार नहीं मिला।जब मैंने यह लेख लिखा, एक पाठक ने मुझे लिखा कि 'अच्छा हुआ कि श्री एमके गाँधी को नोबेल पुरस्कार नहीं प्रदान किया गया, आखिरकार इसकी स्थापना डायनामाइट किंग के द्वारा की गई है।' कितना गलत तरीका है अल्फ्रेड नोबेल के बारे में सोचने का! संभवतया वह ऐसा पहला परोपकारी मनुष्य था जिसने पूरे विश्व को अपना गाँव समझा। वह सही अर्थों में एक अंतरराष्ट्रीय व्यक्ति था। सन् 1896 में जब उन्होंने अपनी वसीयत लिखी वे इस बात से अनभिज्ञ थे कि वे जनहित के लिए नए विचार को जन्म दे रहे हैं। इस पुरस्कार को प्राप्त करने वाले लोग अंतरराष्ट्रीय होते हैं। पिछले सौ सालों में सात सौ लोगों को नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है। नोबेल ने अपने जीते-जी यह पुरस्कार कभी प्रदान नहीं किया। यद्यपि यह वसीयत 1896 में लिखी गई थी, लेकिन पहला नोबेल पुरस्कार सन् 1901 में प्रदान किया गया। बहुत ही कम स्वीडिश नागरिकों को यह पुरस्कार मिला है। जो लोग नोबेल पुरस्कार से सम्मानित होते हैं, पूरे विश्व में उनका सम्मान किया जाता है। एक पाठक के सवाल, 'नोबेल के बारे में खास क्या है', ने मुझे नोबेल पुरस्कार के बारे में लिखने के लिए उकसाया। नोबेल ने अपनी सारी संपत्ति, जो कि उस समय करीबन तीन मिलियन (तीस लाख रुपए) थी, उस दान में क्यों दे दी। वे अपनी इतनी बड़ी संपत्ति अपने रिश्तेदारों को, किसी धार्मिक संस्था को या अपने देशवासियों को देकर जा सकते थे। किस वजह से उन्होंने साहित्य, शांति, भौतिकी, रसायन और दवाइयों के क्षेत्र में पुरस्कारों की संस्थापना की। वे डायनामाइट से धन कमाते रहे होंगे, लेकिन इसका यह मतलब नहीं है कि वे युद्धप्रेमी थे। एक चाकू रसोई के लिए बहुत आवश्यक होता है, लेकिन यही एक खतरनाक हथियार के रूप में किसी की जान ले सकता है। यह निर्भर करता है कि वह किस हाथ में है। पश्चिम योरप और अमेरिका नोबेल के बहुत एहसानमंद हैं क्योंकि उन्होंने डायनामाइट का आविष्कार किया। डायनामाइट रेलमार्ग बनाने में सहायक होता है क्योंकि इससे पहाड़ों को काटकर सुरंगों का निर्माण किया जाता है। रेलवे लोगों को जोड़ता है, लेकिन यदि कोई रेलवे का इस्तेमाल युद्ध के लिए करे, तो इसमें नोबेल की कोई गलती नहीं है।
ऐसा लगता है कि नोबेल को प्रचार पसंद नहीं था। उनकी बहुत ही कम तस्वीरें नोबेल संग्रहालय में देखी जा सकती हैं। वे एक महान विजेता थे। उन्होंने जो किया, बहुत अच्छी तरह से किया, चाहे व्यापार या परोपकार। एक व्यक्ति रूप में नोबेल संकोची और शांतिप्रिय थे। इसका प्रमाण उनकी वसीयत में है। उन्होंने स्पष्टतया लिखा है, 'जो कुछ भी मानव जाति की भलाई के लिए हो, उसे सम्मानित और पुरस्कृत किया जाना चाहिए ताकि ऐसे व्यक्ति को अपना लक्ष्य प्राप्त करने में आर्थिक परेशानियाँ ना हों।'
बहुत ही कम औरतों को नोबेल पुरस्कार दिया गया, खासतौर पर विज्ञान के क्षेत्र में। इसका कारण यह है कि बहुत ही कम देश औरतों की शिक्षा को प्रोत्साहन देते हैं। अधिकतर अमेरिकन और योरपियन लोग यह पुरस्कार प्राप्त करते हैं। इसका कारण विज्ञान में शोध कीबेहतरीन आधारभूत सुविधाएँ हैं, जो वहाँ पर पाई जाती हैं।
यह आवश्यक नहीं है कि हर साल हर क्षेत्र में नोबेल पुरस्कार दिया ही जाए। यदि नोबेल पुरस्कार की समिति को किसी क्षेत्र में पुरस्कार का योग्य उम्मीदवार नहीं मिलता तो वे उस वर्ष, उस क्षेत्र में नोबेल पुरस्कार प्रदान नहीं करते। ज्याँ पॉल सात्र, प्रसिद्ध फ्रांसिसी लेखक नेनोबेल पुरस्कार लेने से इंकार कर दिया था। मेडम क्यूरी को दो बार पुरस्कृत किया गया, उनकी पुत्री आयरीन ने रसायन शास्त्र में पुरस्कार पाया और दूसरी पुत्री ईवा (यूनेस्को प्रतिनिधि) को भी नोबेल से पुरस्कृत किया गया। इतिहास में पहली बार एक ही परिवार के सदस्यों को नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
नोबेल ने 'मनुष्य की सहायता' या 'परोपकार' का बीज बोया। उसके बाद 1910 की शुरुआत में रॉकफेलर ने और फिर फोर्ड ने अपनी फाउंडेशन प्रारंभ की। आज पूरे विश्व में विभिन्न गतिविधियों के लिए कई पुरस्कार दिए जाते हैं। परंतु नोबेल पुरस्कार प्यार, शांति और मानवता के प्रतीक के रूप में हिमालय की तरह मजबूती से खड़ा है।
नोबेल की वसीयत
'जो कुछ भी मानव जाति की भलाई के लिए हो, उसे सम्मानित और पुरस्कृत किया जाना चाहिए ताकि ऐसे व्यक्ति को अपना लक्ष्य प्राप्त करने में आर्थिक परेशानियाँ ना हो।'