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हमें फॉलो करें सॉफ्टवेयर इंजीनियर कनिष्ठ भाषाओं
-सुधा मूर्ति

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उसने कई भाषाओं पर अपना अधिकार जमाया। वह मेरे जान-पहचान के सबसे सफल प्रोग्रामर में से एक है। हालाँकि वह हमारा कनिष्ठ था, फिर भी मैं और दूसरे वरिष्ठ अधिकारी उसकी राय लिया करते थे।

कुछ दिनों पहले मैं एक छोटी कंपनी में सॉफ्टवेयर इंजीनियर की नियुक्ति के लिए गठित चयन समिति में थी। वहाँ कई युवा लड़के-लड़कियाँ बेचैनी से अपनी बारी आने का इंतजार कर रहे थे। वे सभी 21 से 24 वर्ष की आयु वर्ग के थे। उनमें से कई लोगों का यह पहला इंटरव्यू था, इसलिए वे तनाव में लग रहे थे। वे सभी कम्प्यूटर साइंस में स्नातक थे, इसलिए मुझे विश्वास था कि उनका तकनीकी ज्ञान अच्छा होगा।

इतने में एक युवक की बारी आई। वह सभ्य और सुसंस्कृत लग रहा था। अंदर आते ही उसने अपने प्रमाण-पत्र आगे बढ़ा दिए। उसे जावा, जीडब्ल्यू, बेसिक्स और सी++ की अच्छी जानकारी थी। मैंने उससे ऐसे ही पूछ लिया कि 'कम्प्यूटर की नई भाषा सीखने में उसे कितना समय लगेगा?'

'छः महीने से ज्यादा नहीं' उसने जवाब दिया।

अचानक, मेरा मन 25 साल पीछे चला गया। मैं इसी उम्र के एक युवक से, इन्हीं परिस्थितियों में मिली थी और मैंने उससे भी यही सवाल पूछा था। लेकिन जो जवाब मुझे मिला, वह अलग था। उस युवक ने पूरे आत्मविश्वास से कहा- 'मैं कम्प्यूटर या उसकी भाषा के बारे में कुछ नहीं जानता हूँ, पर आप मुझे चार महीने का समय दीजिए। मैं कम्प्यूटर के बारे में समझने की कोशिश करूँगा और फिर आपको बता सकूँगा कि नई भाषा सीखने में मुझे कितना वक्त लगेगा।'

मैं उसके आत्मविश्वास और स्पष्टवादिता की कायल हो गई। मुझे आज भी वह दृश्य पूरी तरह से याद है। वह मुंबई की बात थी। मैं एक
जब भी कोई युवा कम्प्यूटर के बारे में बात करता है, मुझे उसकी सीखने की लगन और हर बात को स्वीकार करने की सहजता की याद आ जाती है
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इंटरव्यू पैनल में थी और वह युवक, जो मूलतः सिविल इंजीनियर था, इंटरव्यू के लिए आया था। वह इंटरव्यू सॉफ्टवेयर इंजीनियर के पद के लिए था। बहुत से लोगों ने इस इंटरव्यू में अच्छा प्रदर्शन किया था। वह आखिरी उम्मीदवार था। वह मस्तिष्क में एकदम स्पष्ट विचारों के साथ कमरे में प्रविष्ट हुआ था। उसे तार्किक प्रश्न सुलझाने के लिए दिए गए, जिनका कम्प्यूटर से कोई संबंध नहीं था। उसने जल्दी ही उन्हें सुलझा लिया।उसने स्पष्ट कर दिया कि उसे कम्प्यूटर के बारे में जरा भी ज्ञान नहीं है, लेकिन वह सीखने के लिए तैयार है और यदि उचित लगता है तो उसे नौकरी मिलने की उम्मीद है।

उसे नौकरी मिल गई। उसने बहुत मेहनत से काम किया। उसने वापस आकर कहा, 'मुझे कोई भी भाषा दीजिए, मैं उसे 10 दिनों में सीख लूँगा। मैं उस पर पूरा अधिकार बना सकता हूँ। कम्प्यूटर की भाषा सिर्फ एक माध्यम है। प्रोग्रामिंग का मूल आधार तर्क है। इसके लिए अच्छी तार्किक क्षमता की आवश्यकता है, जो मेरे अंदर है।'

कुछ समय बीतने के बाद उसने कई भाषाओं पर अपना अधिकार जमाया। वह मेरे जान-पहचान के सबसे सफल प्रोग्रामर में से एक है। हालाँकि वह हमारा कनिष्ठ था, फिर भी मैं और दूसरे वरिष्ठ अधिकारी उसकी राय लिया करते थे। वह डेस्क पर बहुत-सा होमवर्क करता था और जब वह कम्प्यूटर पर प्रोग्रामिंग करता तो उसमें एक भी गलती होने की गुंजाइश नहीं रहती थी।

जब भी कोई युवा कम्प्यूटर के बारे में बात करता है, मुझे उसकी सीखने की लगन और हर बात को स्वीकार करने की सहजता की याद आ जाती है। मैं भगवान से प्रार्थना करती हूँ कि मेरे सहकर्मी ऐसे कई विद्यार्थी और दें।

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