Womens Day Poem - सुशील कुमार शर्मा नारी तुम स्वतंत्र हो, जीवन धन यंत्र हो। काल के कपाल पर, लिखा सुख मंत्र हो। सुरभित बनमाल हो, जीवन की ताल हो। मधु से सिंचित-सी, कविता कमाल हो। जीवन की छाया हो, मोहभरी माया हो। हर पल जो...