Publish Date: Thu, 17 Feb 2011 (19:02 IST)Updated Date: Thu, 17 Feb 2011 (19:01 IST)
PTI
बहुत दिनों से खामोश रहने वाला माही का बल्ला जब भी बोला है तब विपक्षी टीमों ने घुटने टेक दिए हैं। अपनी आतिशी बल्लेबाजी से दर्शकों को आंदोलित करने वाले धोनी के बल्ले की धमक कप्तान बनने के बाद भी कम नहीं हुई है।
भारतीय टीम के सबसे सफलतम कप्तानों में शुमार होने वाले माही शुरू से ही कूल हैं। वे अपनी आक्रमकता सिर्फ बल्ले से दिखाना पंसद करते हैं। हालाँकि पिछले कुछ समय से माही का बल्ला खामोश था और इस बात पर कई सवाल भी उठ रहे थे। सिर्फ कप्तान होने से काम नहीं चलता और धोनी तो विकेटकीपर, बल्लेबाज और कप्तान की तिहरी भूमिका निभा रहे हैं।
भारतीय उपमहाद्वीप में तो अभी भी वन-डे, बल्लेबाजों का ही खेल है, इस बात को धोनी भली-भाँति समझते हैं। इसीलिए धोनी के इस शतक ने उनके आलोचकों के मुँह पर ताले जड़ दिए है। धोनी ने यह शतक भले ही अभ्यास मैच में जमाया हो पर इस शतक ने उन पर पड़ रहे दबाव को काफी हद तक कम किया है।
न्यूजीलैंड के खिलाफ खेले गए अभ्यास मैच में धोनी ने मात्र 62 गेंदों में अपना शतक पूरा किया और वे सबसे तेज शतक बनाने वाले दूसरे भारतीय बल्लेबाज बन गए, लेकिन अभ्यास मैच होने के कारण यह आधिकारिक आँकड़ों में शामिल नहीं किया जाएगा। सहवाग के नाम 60 गेंदों में सबसे तेज शतक बनाने का भारतीय रिकॉर्ड है, जबकि मोहम्मद अजहरुद्दीन ने 62 गेंदों में शतक बनाया हुआ है।
महेंद्रसिंह धोनी विस्फोटक शतक पूरा करने के बाद 108 रन बनाकर नाबाद रहे। धोनी का खेल दबाव में निखरता है। जब भी शीर्ष चार क्रम में उतरे हैं तब और भी बेहतर प्रदर्शन किया है। वे परिस्थितियों के मुताबिक अपने आपको ढालकर रक्षात्मक या आक्रामक दोनों तरह की बल्लेबाजी करने में माहिर हैं।
भारत में होने वाले क्रिकेट के इस महाकुंभ में भारतीय क्रिकेट टीम को सवा अरब उम्मीदों पर धोनी के नेतृत्व में ही खरा उतरना है। साथ ही पिछले विश्वकप की कड़वी यादों को भी बिसारना होगा। पर धोनी को इस फॉर्म को आगे के मैचों में भी बरकरार रखना होगा, उनसे इस विश्वकप में ऐसी कई पारियों की उम्मीद रहेगी। (वेबदुनिया डेस्क)