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बेंगलुरु में 'रोमांच' की जीत

भारत और इंग्लैंड का मैच 'टाई'

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भारत
WD
सचिन तेंडुलकर और एंड्रयू स्ट्रास दोनों की उत्कृष्ट शतकीय पारियों में से कोई भी बेकार नहीं गई क्योंकि भारत और इंग्लैंड के बीच रोमांच की पराकाष्ठा तक पहुँचा विश्वकप ग्रुप 'बी' का मैच रविवार को यहाँ 'टाई' पर छूटा। विश्वकप के इतिहास में यह चौथा अवसर है जबकि कोई मैच टाई पर खत्म हुआ हो।

विश्वकप में अब तक रोमांचक मैच देखने को नहीं मिले थे लेकिन चिन्नास्वामी स्टेडियम में रनों की बौछार वाले इस मैच ने सारी कमी पूरी कर दी जहां आखिरी गेंद तक लोगों की साँस थमी रही। भारतीय टीम 338 रन पर बनाकर आउट हो गई थी लेकिन इंग्लैंड ने आठ विकेट पर 338 रन बना डाले।

तेंडुलकर ने चिन्नास्वामी स्टेडियम में 115 गेंद पर 120 रन की उत्कृष्ट पारी खेली। उनके अलावा युवराज सिंह (58), गौतम गंभीर (51) और वीरेंद्र सहवाग (35) ने भी उपयोगी योगदान दिया। अंतिम सात विकेट 24 गेंद के अंदर गँवाने से भारतीय पारी 49.5 ओवर तक चली।

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स्ट्रास ने अपने करियर का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए 145 गेंद पर 18 चौकों और एक छक्के की मदद से 158 रन बनाये तथा इस बीच इयान बेल (69) के साथ तीसरे विकेट के लिए 170 रन की साझेदारी की। जहीर खान ने अपनी छह गेंद के अंदर तीन विकेट लेकर इंग्लैंड को विश्वकप में सबसे बड़ा लक्ष्य हासिल करने से रोका लेकिन स्ट्रास की टीम ने भारत को पूरे दो अंक हासिल नहीं करने दिए और दोनों टीमों को एक-एक अंक से संतोष करना पड़ा।

इंग्लैंड को आखिरी दो ओवर में 29 रन की दरकार थी। पीयूष चावला 49वाँ ओवर करने ए ग्रीम स्वान और टिम ब्रेसनन ने एक-एक छक्के जड़कर 15 रन जुटाए। अंतिम ओवर में 14 रन की दरकार थी, जिसमें अजमल शहजाद ने छक्का जड़ा। आखिरी गेंद पर दो रन जीत के लिए चाहिए थे लेकिन मुनाफ ने केवल एक रन दिया।

भारतीय पारी का आकषर्ण तेंडुलकर का इंग्लैंड के खिलाफ दूसरा, विश्वकप में रिकॉर्ड पाँचवाँ, वनडे में 47वाँ और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में 98वाँ शतक रहा। उन्होंने अपनी पारी में दस चौके और पाँच छक्के लगाए और भारत के नए ‘सिक्सर किंग’ बने। उन्होंने गंभीर के साथ दूसरे विकेट के लिए 134 रन जोड़े।

'मैन ऑफ द मैच' स्ट्रास ने हालाँकि तेंडुलकर की तरह उत्कृष्ट पारी खेली। उन्होंने और केविन पीटरसन (31) ने इंग्लैंड को तेज और विश्वसनीय शुरुआत दिलाकर पहले विकेट के लिए 68 रन जोड़े। मुनाफ ने पीटरसन के करारे शॉट को कैच में बदलकर यह साझेदारी तोड़ी।

पीटरसन ने मुनाफ की गेंद पर कड़ा प्रहार किया और इस गेंदबाज अपना चेहरा बचाने के लिएउस पर हथेली अड़ा दी। इस प्रयास में मुनाफ नीचे भी गिर गये लेकिन हथेली पर लगे से गेंद उछल गई और उन्होंने उसे एक हाथ से लपक दिया। नये बल्लेबाज जोनाथन ट्राट (16) को पीयूष चावला की लेग ब्रेक पढ़ने में परेशानी हुई और पगबाधा आउट हो गए।

स्ट्रास को 22 रन के निजी योग पर जीवनदान मिला लेकिन इसके बाद उन्होंने बेदाग पारी खेली। स्पिनर भी उन पर खास प्रभाव नहीं छोड़ पाए, जिनकी गेंदों पर उन्होंने स्वीप, कट, कवर ड्राइव हर तरह का शॉट लगाया। उन्होंने पारी के 29वें ओवर में युवराज की गेंद पर चौका और फिर दो रन लेकर विश्वकप में अपना पहला और वनडे में छठा शतक पूरा किया।

इंग्लैंड ने 43वें ओवर से पावर-प्ले लिया। जहीर ने पावर-प्ले के पहले ओवर में ही बेल और स्ट्रास को आउट करके भारत की उम्मीदें जगाई। अगले ओवर में उन्होंने पॉल कॉलिंगवुड की गिल्लियां बिखेरकर मैच को भारत के पक्ष में मोड़ दिया। ब्रेसनन (14) और ग्रीम स्वान (15) ने हालाँकि भारत को रोमांचक जीत दर्ज नहीं करने दी।

इससे पहले भारत जब टॉस जीतकर बल्लेबाजी के लिए उतरा तो एंडरसन की मैच की पहली गेंद पर ही सहवाग को जीवनदान मिला। सहवाग ने इसके बाद कुछ अच्छे शॉट लगाए लेकिन पहले बदलाव के तौर पर आए ब्रेसनन ने आते ही उनकी पारी का अंत कर दिया। विकेटकीपर मैट प्रायर ने दायीं तरफ डाइव लगाकर एक हाथ से उनका कैच लिया। सहवाग ने 26 गेंद खेली और आठ चौके लगाए।

तेंडुलकर के बल्ले की आक्रामकता इसके बाद ही देखने को मिली। उन्होंने कॉलिंगवुड को निशाने पर रखकर उनके लगातार ओवर में छक्के जमाए और जब ग्रीम स्वान गेंदबाजी के लिएआये तो उनकी लगातार गेंद को उन्होंने लांग ऑन और मिडविकेट पर छह रन के लिए भेजा। स्ट्रास ने जब फिर से एंडरसन को गेंद सौंपी और तेंडुलकर ने दो चौकों से उनका स्वागत किया। गंभीर ने इसी ओवर में गेंद चार रन के लिए भेजकर अर्धशतक पूरा किया लेकिन स्वान की गेंद लाइन में आये बिना खेलने के कारण वह बोल्ड हो गए।

रिकाडरें के बादशाह ने स्वान की गेंद को छह रन के लिए भेजकर भारत की तरफ से वन डे में सर्वाधिक छक्के लगाने के सौरव गांगुली (190) के रिकॉर्ड की बराबरी की लेकिन 37वें ओवर से लिए गए पावर-प्ले के तीसरे ओवर में एंडरसन की गेंद को लेग साइड में खेलने के प्रयास में उन्होंने कवर में खड़े यार्डी को कैच थमा दिया।

युवराज लय में दिखे और उन्होंने शुरू में ढीली गेंदों को सबक सिखाने की रणनीति अपनाई। बाएँ हाथ के इस बल्लेबाज ने 45वें ओवर में शहजाद पर दो चौके जड़कर अपना 46वाँ वनडे अर्धशतक पूरा किया लेकिन यार्डी के अगले ओवर में उन्होंने गेंद हवा में लहराकर पैवेलियन की राह पकड़ी।

धोनी ने शहजाद पर लगातार दो चौके जड़कर हाथ खोले और फिर यार्डी की गेंद मिडविकेट पर छह रन के लिए भेजी लेकिन ब्रेसनन के अगले ओवर में वह सीमा रेखा पर लपक लिए गए। ब्रेसनन ने इसके बाद 49वें ओवर में यूसुफ पठान (14), विराट कोहली (8) और हरभजनसिंह (0) को आउट किया। (भाषा)

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