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विश्वकप 2011 के ऑलराउंडर

- नृपेन्द्र गुप्ता

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ऑलराउंडर
क्रिकेट के सभी फॉर्मेट्स में हर टीम में ऐसे खिलाड़ियों की जरूरत रहती है जो न केवल अपनी तेज-तर्रार बल्लेबाजी से रन बनाए बल्कि गेंदबाजी से महत्वपूर्ण मौकों पर विकेट भी चटका सके। इन खिलाड़ियों का चपल और चुस्त फील्डर होना भी बेहद मायने रखता है।

इस विश्वकप में सभी टीमों में एक, दो या इससे ज्यादा ऑलराउंडर है जो कभी भी मैच का पासा पलटने का दम रखते हैं। युवराज, यूसुफ पठान, जैक कैलिस, शेन वॉटसन और शाहिद अफरीदी जैसे ऑलराउंडर जब तक मैदान पर रहते हैं, कितनी भी विषम परिस्थितियाँ हो उनकी टीमें मैच में बनी रहती है।

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जैक कैलिस: विश्व क्रिकेट के महानतम खिलाड़ियों में शुमार। क्रिकेट के तीनों विधाओं में समान रूप से घातक। एक बार जमने पर आउट करना मुश्किल। बड़ी पारी खेलने में विश्वास रखते हैं।

कैलिस बल्ले के साथ ही गेंद से भी मैच पलटने की क्षमता। भारतीय परिस्थिति से वाकिफ। दाएँ हाथ के तेज गेंदबाज कैलिस के तरकश में कई तीर है जो उन्हें एक खतरनाक खिलाड़ी बनाते हैं। 17 शतक और 80 अर्धशतक बना चुके हैं।

पॉल कॉलिंगवुड : वैसे तो पॉल कॉलिंगवुड बल्लेबाजी के लिए जाने जाते हैं पर विपक्षी टीमें गेंदबाजी में भी उनका लोहा मानती है। हर तरह की स्थिति में खुद को ढालने की क्षमता उन्हें कंसिस्टेंट परफॉर्मर बनाती है।

वे एक बेहतरीन बल्लेबाज, अच्छे गेंदबाज और चुस्त फिल्डर है।




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युवराजसिंह : टीम इंडिया के युवराज जब भी 'अपनी वाली' पर आते हैं तो गेंदबाज को समझ नहीं आता की वह कहाँ गेंद डाले। बेहतरीन ऑलराउंडर युवराजसिंह का लंबे शॉट्‍स मारने में जवाब नहीं।

इस पंजाबी मुंडे के नाम टी-20 विश्वकप में एक ओवर में 6 छक्के उड़ाने का रिकॉर्ड है। महत्वपूर्ण मौकों पर विकेट चटकाना दिलेर युवी की खासियत है। आक्रामकता सबसे बड़ी ताकत और कमजोरी भी। एकदिवसीय मैचों में अब तक 12 शतक और 45 अर्धशतक बना चुके हैं।

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शेन वॉटसन : ऑस्ट्रेलिया के लिए पारी की शुरुआत करने वाले शेन वॉटसन को इस विश्वकप के सबसे अच्छे ऑलराउंडर में शामिल किया जा सकता है।

वे जब बल्लेबाजी के लिए मैदान में आते हैं तो हर गेंदबाज चाहता है कि उन्हें सेट न होने दिया जाए। वे टीम के प्रमुख गेंदबाजों में शामिल है। अब तक पाँच शतक और 19 अर्धशतक बना चुके हैं।

क्रिस गेल : वेस्टइंडीज के सबसे अनुभवी खिलाड़ी क्रिस गेल से टीम को काफी उम्मीदें है। इस मैच विजेता खिलाड़ी में दुनिया के हर गेंदबाज की धुनाई करने की क्षमता है। टीम के लिए ओपनिंग करने वाले गेल भारतीय पिचों पर अपनी ऑफब्रेक गेंद से भी कमाल दिखा सकते हैं। भारतीय पिचों पर शानदार रिकॉर्ड। 19 शतक और 42 अर्धशतक बना चुके हैं।

अब्दुल रज्जाक : रज्जाक भी अब तक पाकिस्तान के लिए एक उपयोगी ऑलराउंडर साबित हुए है। जितने सफल गेंदबाज उतने ही उम्दा बल्लेबाज। उन्होंने अपनी गेंदबाजी और बल्लेबाजी से कई मैचों का रुख पाक की और मोड़ा है। तेजी से रन बनाने में सक्षम। वसीम अकरम का यह चेला अपनी गेंदों में लगातार परिवर्तन कर बल्लेबाजों अक्सर चौंकाता है। अनुभव की कमी नहीं। 3 शतक और 22 अर्धशतक बना चुके हैं।

युसूफ पठान : पठानी अंदाज में जब युसूफ बैटिंग करने के लिए क्रीज पर आते हैं तो विरोधी टीम में खलबली मच जाती है। बेहद आक्रामक बल्लेबाजी युसूफ की खासियत है। कमजोर गेंदों को मैदान के बाहर पहुँचाने में माहिर। मैच विजेता खिलाड़ी युसूफ अपनी स्पिन गेंदबाजी के जरिए भी महत्वपूर्ण योगदान देते हैं।

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शा‍हिद अफरीदी : इस विश्वकप में अगर पाकिस्तान को 1992 का इतिहास दोहराना है ‍तो शाहिद अफरीदी का बल्ला चलना जरूरी है। वे अच्छे से अच्छे गेंदबाज के हौसले पस्त करने की क्षमता रखते हैं।

अपनी तेजतरार बल्लेबाजी के लिए मशहूर शा‍हिद एक बेहतरीन लेग ब्रेक गेंदबाज भी है। सेट बल्लेबाजों को पैवेलियन पहुँचाने में माहिर यह ऑलराउंडर टीम को लगातार बेहतर करने की प्रेरणा देता है।

शाहिद अफरीदी एकदिवसीय 6 शतक और 31 अर्धशतक बना चुके हैं।


जॉन हास्टिंग्स: एक आक्रामक ऑलराउंडर, अपनी गेंदबाजी से विरोधी टीम के बल्‍लेबाजों को खासा परेशान करते हैं। घरेलू क्रिकेट में शानदार प्रदर्शन के दम पर राष्‍ट्रीय टीम में जगह मिली। वे इस विश्वकप में ऑस्ट्रेलिया के लिए छुपा रूस्तम साबित हो सकते हैं।

माइकल यार्डी : माइकल यार्डी भारतीय सरजमीं पर विपक्ष टीमों के लिए घातक सिद्ध हो सकते हैं। बाएँ हाथ के इस स्पिन गेंदबाज ने अपने छोटे से अंतरराष्ट्रीय करियर में खासा प्रभावित किया है। हालाँकि वे बल्लेबाजी में काफी सफल नहीं रहे हैं पर घरेलू क्रिकेट में उनके बल्लेबाजी प्रदर्शन को देखते हुए उन्हें ऑलराउंडरों की श्रेणी में शामिल किया जा सकता है।

जोहान बोथा: टीम के उपयोगी ऑलराउंडर। यह किफायती गेंदबाज अपनी राइट आर्म ऑफ स्पिन गेंदबाजी से द‍ुनिया से दिग्गज बल्लेबाजों को पैवेलियन का रास्ता दिखाने में सक्षम है। टीम के निचले क्रम के अच्छे बल्लेबाज। बड़े शॉट लगाने में माहीर। भारत के खिलाफ खेलने का फायदा मिलेगा।

जैकम ओरम : इस अनुभवी ऑलराउंडर से न्यूजीलैंड को काफी उम्मीदे हैं। जैकब ओरम बल्लेबाजी और गेंदबाजी दोनों में समान रूप से योगदान देते हैं। यह वामहस्त बल्लेबाज जरूरत पड़ने पर बहुत तेजी से रन बनाने की क्षमता रखता है। मजबूत पक्ष गेंदबाजी। 2 विश्वकप में खेलने का अनुभव। 1 शतक और 12 अर्धशतक बना चुके हैं।

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एंजेलो मैथ्यूज : 1996 में श्रीलंका ने जब विश्वकप जीता था तो उसमें सनथ जयसूर्या और अरविंद डिसिल्वा जैसे ऑलराउंडर्स की भूमिका अहम थी। इस विश्वकप में श्रीलंका को मैथ्यूज से ऐसे ही प्रदर्शन की उम्मीद है। अपनी स्विंग गेंदों से बल्लेबाजों को परेशान करने में माहिर।

बल्लेबाजी से भी गेंदबाजों के छक्के छुड़ाने की क्षमता। भारतीय उपमहाद्वीप में खेलने का अनुभव। अब तक 6 अर्धशतक बनाए हैं।


स्कॉट स्टाइरिस : मध्यम क्रम का यह तूफानी बल्लेबाज अपने करारे शाटों से मैच का रुख पलट सकता है। एक संतुलित ऑलराउंडर माने जाने वाले स्टाइरिस ने तेज गेंदबाज के रूप में करियर शुरू‍ किया था। घुटने की चोट ने उन्हें विश्व क्रिकेट का चमकता सितारा बना दिया। वे वनडे और टी-20 के स्पेशलिस्ट खिलाड़ी है।

केरॉन पोलार्ड : यह आक्रामक ऑलराउंडर अपने प्रदर्शन से टीम को हारा हुआ मैच जिताने में माहिर है। ताबड़तोड़ बल्लेबाजी के लिए मशहूर पोलार्ड को इस विश्वकप में विकेट पर समय भी देना होगा। विकेट टेकिंग गेंदबाज। भारतीय पिचों पर खेलने का अनुभव। अभी तक सिर्फ एक अर्धशतक बनाया है।


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