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योग करने से जीवन पर पड़ते हैं यह 10 तरह के प्रभाव

हमें फॉलो करें योग करने से जीवन पर पड़ते हैं यह 10 तरह के प्रभाव

अनिरुद्ध जोशी

हमारे पीएम नरेंद्र मोदीजी भी प्रतिदिन योग करते हैं। हमारे पीएम नरेंद्र मोदीजी भी प्रतिदिन योग करते हैं। दुनियाभर में अब योग का प्रचलन बढ़ गया है। योग को हिन्दू धर्म से जोड़कर देखने के चलते बहुतों के मन में इसको लेकर विरोध भी है और संदेह भी। हालांकि योग विद्या का मूल उद्देश्य आपको स्वस्थ करना ही नहीं है, बल्कि मोक्ष अर्थात खुद को पहचानना है। योग मानता है कि स्वयं तक पहुंचने के लिए आपको सबसे पहले अपने शरीर को ही सीढ़ी बनाना होगा अत: इसका स्वस्थ रहना जरूरी है। एक स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मन और आत्मा का निवास होता है। आओ अब जानते हैं कि योग करने से जीवन में क्या प्रभाव पड़ता है?
 
 
जब हम कहते हैं कि योग सीखना चाहिए, इसका यह मतलब नहीं कि आसन सीखना। यदि आप योग सीखना चाहते हैं तो योग के सभी अंगों को धीरे-धीरे सीखें। शुरुआत अंग संचालन से करते हैं और फिर धीरे-धीरे यम, नियम साधते हुए आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार व धारणा साधने की सोचते हैं। इस बीच उसे ध्यान, बंध, मुद्रा और क्रियाओं को भी सीखना चाहिए। यदि यह सभी सीख लिया तो समझो कि आप योगी बन गए लेकिन लोग बस आसन ही सीख ले, तो बहुत बड़ी बात है।
 
 
1. पहला प्रभाव शरीर होता है स्वस्थ
यदि आहार नियम का पालन करते हुए लगातार सूर्य नमस्कार के साथ आप योग के प्रमुख आसन करते रहते हैं तो 4 माह बाद आपका शरीर एकदम लचीला होकर स्वस्थ हो जाएगा। आप हरदम एकदम तरो-ताजा और खुद को युवा महसूस करेंगे। योगासनों के नियमित अभ्यास से मेरूदंड सुदृढ़ बनता है जिससे शिराओं और धमनियों को आराम मिलता है। शरीर के सभी अंग-प्रत्यंग सुचारु रूप से कार्य करते हैं।

 
2. मन रहता है हमेशा प्रसन्न
योग करते रहने से मन में कभी भी उदासी, खिन्नता और क्रोध नहीं रहता है। मन हमेशा प्रसन्नचित्त रहता है जिसके चलते आपके आसपास एक खुशनुमा माहौल बन जाता है। आप जीवन में किसी भी विपरीत परिस्थिति से हताश या निराश नहीं होंगे।

 
3. विचार हो जाते हैं परिष्कृत
मस्तिष्क में किसी भी प्रकार का द्वंद्व और विकार नहीं रहता है। व्यक्ति की सोच बहुत ही विस्तृत होकर परिष्कृत हो जाती है। परिष्कृत का अर्थ साफ-सुथरी व स्पष्ट। ऐसे में व्यक्ति की बुद्धि बहुत तीक्ष्ण हो जाती है तथावह जो भी बोलता है, सोच-समझकर ही बोलता है। भावनाओं में बहकर नहीं बोलता है। योग करते रहने का प्रभाव यह होता है कि शरीर, मन और मस्तिष्क के ऊर्जावान बनने के साथ ही आपकी सोच बदलती है। सोच के बदलने से आपका जीवन भी बदलने लगता है। योग से सकारात्मक सोच का विकास होता है।


4. मिट जाते हैं मानसिक रोग
यदि किसी भी प्रकार का मानसिक रोग है तो वह मिट जाएगा, जैसे चिंता, घबराहट, बेचैनी, अवसाद, शोक, शंकालु प्रवृत्ति, नकारात्मकता, द्वंद्व या भ्रम आदि। एक स्वस्थ मस्तिष्क ही खुशहाल जीवन और उज्ज्वल भविष्य की रचना कर सकता है। योग से जहां शरीर की ऊर्जा जाग्रत होती है, वहीं हमारे मस्तिष्क के अंतरिम भाग में छिपी रहस्यमय शक्तियों का उदय होता है। जीवन में सफलता के लिए शरीर की सकारात्मक ऊर्जा और मस्तिष्क की शक्ति की जरूरत होती है। यह सिर्फ योग से ही मिल सकती है, अन्य किसी कसरत से नहीं।

 
4. मिट जाते हैं मानसिक रोग
यदि किसी भी प्रकार का मानसिक रोग है तो वह मिट जाएगा, जैसे चिंता, घबराहट, बेचैनी, अवसाद, शोक, शंकालु प्रवृत्ति, नकारात्मकता, द्वंद्व या भ्रम आदि। एक स्वस्थ मस्तिष्क ही खुशहाल जीवन और उज्ज्वल भविष्य की रचना कर सकता है। योग से जहां शरीर की ऊर्जा जाग्रत होती है, वहीं हमारे मस्तिष्क के अंतरिम भाग में छिपी रहस्यमय शक्तियों का उदय होता है। जीवन में सफलता के लिए शरीर की सकारात्मक ऊर्जा और मस्तिष्क की शक्ति की जरूरत होती है। यह सिर्फ योग से ही मिल सकती है, अन्य किसी कसरत से नहीं।

 
6. बढ़ती है कार्यशीलता
लगातार योग करते रहने से व्यक्ति में कार्यशीलता बढ़ जाती है और वह अपने जीवन के लक्ष्य जल्द से जल्द पूर्ण करने की ओर फोकस कर देता है। मान लो यदि हमारा जीवनकाल 70-75 वर्ष है तो उसमें से भी शायद 20-25 वर्ष ही हमारे जीवन के कार्यशील वर्ष होंगे। उन कार्यशील वर्षों में भी यदि हम अपने स्वास्थ्य और जीवन की स्थिरता को लेकर चिंतित हैं तो फिर कार्य कब करेंगे? जबकि कर्म से ही जीवन में धन, खुशी और सफलता मिलती है।

 
7. बदल जाता है व्यक्तित्व
योग करते रहने से व्यक्ति का व्यक्तित्व और चरित्र बदल जाता है। वह अपने भीतर से नकारात्मकता और बुरी आदतों को बाहर निकाल देता है। 2 तरह के लोग होते हैं- अंतर्मुखी और बहिर्मुखी। लेकिन योग करते रहने से व्यक्ति दोनों के बीच संतुलन स्थापित करना सीख जाता है। योगी व्यक्ति का व्यक्तित्व अलग ही होता है। भीड़ में उसकी अलग ही पहचान बनती है। वह सबसे अलग ही नजर आता है।

 
8. आती है अच्छी नींद
प्राणायाम द्वारा प्राणवायु शरीर के अणु-अणु तक पहुंच जाती है जिससे अनावश्यक एवं हानिप्रद द्रव्य नष्ट होते हैं, विषांश निर्वासित होते हैं जिससे सुखद नींद अपने समय पर अपने आप आने लगती है। प्राणायाम और ध्यान से मस्तिष्क आम लोगों की अपेक्षा कहीं ज्यादा क्रियाशील और शक्तिशाली बनता है।

 
9. आदत से मिलती है मुक्ति
लगातार योग करते रहने से आपके जीवन में हर तरह की आदतों से आपको मुक्ति मिल जाती है। कई लोगों में देर से उठने और देर से सोने की आदत होती है। अनियमित रूप से भोजन करने और शौच जाने की आदत होती है। इसी तरह कुछ तो भी बोलने, सोचने, समझने, सुनने की आदत भी होती है। योग से व्यक्ति हर तरह की आदतों से मुक्त होकर जीवन को एक सुंदर शैली और अनुशासन में ढाल लेता है।

 
आपको यह जानकर हैरानी होगी कि जिस तरह हमें बचपन से ही खाने की आदत है, उसी तरह हमें जन्म लेने की भी आदत हो जाती है। आदत के चक्र को समझना जरूरी है। क्रोध करने, नफरत करने या प्यार करने की भी आदत हो जाती है। आदतमुक्त जीवन क्या होता है? यह जानना बहुत जरूरी है।

 
10. योग से पाता है व्यक्ति सिद्धि
यदि व्यक्ति लगातार योग कर रहा है और वह योग के यम और नियम का पालन करते हुए योग की हर तरह की विद्या को फॉलो कर रहा है तो यह तय है कि उसके मस्तिष्क में सिद्धियों का वास होने लगेगा। मन और मस्तिष्‍क इतना तीक्ष्ण हो जाता है कि वह सभी हदों को पार करके इधर माध्यम के संपर्क में आ जाता है। वह नींद में भी जागा हुआ होता है। बस यहीं से सिद्धियों की शुरुआत होती है। ऐसा साक्षीत्व योग से घटित होने लगता है।
 

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