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एक बार योग का योग

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सिद्धार्थ झा

इस बार 21 जून को 'अंतरराष्ट्रीय योग दिवस' देहरादून में एक बार फिर बड़े स्तर पर आयोजित किया जा रहा है। ये चौथा योग दिवस है। लेकिन लगता नहीं है कि ये दिन मनाते हुए हमें सिर्फ 4 साल ही हुए हैं, क्योंकि योग और ध्यान हमारी जिंदगियों में रच-बस गया है। योग जिसे कुछ समय पहले ऋषि-मुनियों की साधना और स्वस्थ जीवन का आधार समझा जाता था, आज की तारीख में सिर्फ भारत में ही नहीं, पूरे विश्व की रगों में प्रवाहित हो रहा है।
 
देश-विदेश में लोगों पर योग-ध्यान का ऐसा जादू चढ़ा है कि यह अब एक बड़ी इंडस्ट्री की शक्ल अख्तियार कर चुका है। आज पूरा विश्व भारत की तरफ टकटकी लगाए देख रहा है और भारत के सामने योग का एक बहुत बड़ा बाजार है। जहां तक भारत की बात की जाए तो लोगों की सुबह की शुरुआत ही योग-ध्यान से होती है और अब तो स्कूल-कॉलेज, सरकारी या कॉर्पोरेट कार्यालय, सेना अस्पताल ऐसा कोई क्षेत्र नहीं है, जहां योग से लोग लाभान्वित न हो रहे हों। लोगों के दिन की शुरुआत ही घर या पार्क में योग और व्यायाम द्वारा होती है। लोगों में जागरूकता का आलम ये है कि वो योग और व्यायाम का अपनी जिंदगी में नियम की तरह पालन करते हैं।
 
राजपथ गवाह है, जब 21 जून 2015 को पहला 'अंतरराष्ट्रीय योग दिवस' मनाया गया था, तब कितनी बड़ी संख्या में आम लोगों ने इसमें अपनी भागीदारी की थी और वो सिलसिला आज भी जारी है।
 
पीएम मोदी ने 27 सितंबर 2014 को जिस अंदाज में संयुक्त राष्ट्र संघ में 21 जून को विश्व योग दिवस के रूप में मनाने की अपील की और जिस ग्रैंड अंदाज में विश्व के 192 देशों ने प्रस्ताव का समर्थन किया और 177 देशों ने सह-प्रायोजक बनना स्वीकार किया, वो अभूतपूर्व था। यूं कहें कि प्रधानमंत्री की अगुआई में योग दिवस के प्रस्ताव से इसके पास होने तक जो कुछ भी किया गया, उससे भारत योग के एक ब्रांड के तौर पर उभरकर सामने आया।
 
आज 'अंतरराष्ट्रीय योग दिवस' सिर्फ एक सरकारी खानापूर्ति का दिन नहीं बल्कि एक बहुत बड़े उत्सव और त्योहार में तब्दील हो चुका है। दरअसल, योग सिर्फ स्वस्थ जीवन का ही आधार नहीं है बल्कि ये लोगों को जोड़ने का माध्यम भी बनकर उभरा है।
 
प्रधानमंत्री ने कुछ समय पहले सोशल मीडिया पर प्राणायाम करके लोगों को प्रेरणा भी दी। हालांकि वे समय-समय पर ऐसा करते रहते हैं जिससे कि देशवासी सेहतमंद और फिट रहें। योग की लोकप्रियता का आलम ये है कि क्या आम क्या खास, आज हर कोई योग से अपनी जिंदगी संवार रहा है। प्रधानमंत्र‍ी ही नहीं, न जाने कितने ही माननीय सांसद और मंत्रियों की दैनिक दिनचर्या की शुरुआत योग से होती है। इस बीच सोशल मीडिया पर तमाम मंत्रियों और गणमान्य लोगों ने फिटनेस चैलेंज दिया, जो इस बात का सबूत है कि योग का प्रचार-प्रसार कितनी तेजी से हुआ है।
 
आज योग भारत के विभिन्न प्रतिष्ठानों में अहम भूमिका निभा रहा है, चाहे वह सेना हो, अस्पताल, स्कूल-कॉलेज या फिर कोई कार्यालय हो। सेना की जिंदगी में मेहनत और तनाव कितना ज्यादा होता है, यह बताने की जरूरत नहीं है। तनाव और अवसाद का ही नतीजा है कि प्रतिवर्ष कई सैनिक आत्महत्या जैसे कदम भी उठा लेते हैं, ऐसे में योग सैनिकों का तनाव घटाने में काफी हद तक मदद करता है।
 
आज योग सेना के नियमित अभ्यास का अहम हिस्सा है, चाहे सियाचिन जैसी विषम परिस्थितियों में सरहदों की निगेहबानी करने वाले हमारे जांबाज हों या फिर देश के भीतर एयरपोर्ट, मेट्रो, संसद भवन और अन्य प्रमुख इकाइयों में तैनात हमारे सीआईएसएफ के जवान हों, जो तपती धूप और बारिश की परवाह किए बगैर लगातार खड़े होकर देश की सेवा में लगे रहते हैं। योग ने वहां भी तनाव को खत्म करके मानसिक और शारीरिक रूप से उनको और मजबूत किया है। इसी का नतीजा है कि योग आज उनके प्रतिष्ठान का अहम हिस्सा है।
 
दरअसल, सैन्य जीवन ही कठिनाइयों से पूर्ण है। सिर्फ शारीरिक ही नहीं, मानसिक कठिनाइयों से भी उन्हें हर रोज रूबरू होना पड़ता है। आपको याद होगा कि कुछ समय पहले तक ऐसे खबरें यदा-कदा अखबारों में आती थीं कि सैनिक से अपने बड़े अधिकारी या साथियों ने दुर्व्यवहार किया या आत्महत्या की या झगड़ा किया। ऐसे में योग उनके तनाव को कम करने का बड़ा माध्यम बनकर उभरा है।
 
यदि आप बीमार हैं तो निश्चित तौर पर आप चिकित्सक के पास जाएंगे और वो कुछ जांच करने के बाद आपको कुछ दवाएं लिखकर देगा, ये बात सामान्य है। किंतु अब वो आपको सिर्फ दवा ही नहीं देता है बल्कि किसी योग्य योग चिकित्सक के पास जाने की सलाह भी देगा या कुछ आसन भी बताएगा, क्योंकि दवाओं के साथ योग आपको जल्द स्वस्थ करने में बड़ी भूमिका निभाता है और योग के इसी गुण के कारण आज ज्यादातर सरकारी और निजी अस्पतालों में योग प्रशिक्षकों की भारी मांग है। उनके लिए बाकायदा अलग विभाग भी बनाए गए हैं।
 
आज ज्यादातर अस्पतालों में भी तेजी से योग शिक्षकों की मांग बढ़ी है और उनके लिए नए-नए पद सृजित किए जा रहे हैं। यानी ज्ञान और विज्ञान अब कदम से कदम मिलकर मानवता की सेवा कर रहा है, क्योंकि सिर्फ दवा और ऑपरेशन से ही नहीं, नियमित योगाभ्यास से मरीज तन और मन से स्वस्थ होते हैं। किडनी, हृदयरोग, उच्च रक्तचाप समेत अनेक बीमारियों का हल योग में निहित है।
 
ज्यादातर नॉन कम्युनिकेबल डिसीज जैसे मधुमेह, उच्च रक्तचाप, हृदय संबधित बीमारियां आधुनिक जीवनशैली की देन हैं। खासतौर से कार्यालयों में काम करने वाले कर्मचारी, जो 9 से 5 बजे तक की ड्यूटी करते हैं, उन्हें लगातार अपनी सीट पर बैठकर काम करना होता है और ऐसे में उन्हें जबर्दस्त मानसिक श्रम तो करना ही होता है, लेकिन शारीरिक श्रम न के बराबर होता है और ऐसे में उनका शरीर बहुत-सी बीमारियों का घर बन जाता है।
 
आज बहुत से सरकारी और गैरसरकारी प्रतिष्ठानों में सिर्फ 21 जून को 'अंतरराष्ट्रीय योग दिवस' मनाकर ही खानापूर्ति नहीं की जाती, बल्कि वहां ऐसे इंतजाम किए गए हैं जिससे कि यदि कोई काम के घंटों के बीच फुर्सत के लम्हों में योगाभ्यास के जरिए खुद को चुस्त-दुरुस्त रखना चाहे तो वो कर सकता है। यहां तक कि बड़े कॉर्पोरेट्स में भी ये सुविधा है, क्योंकि अनेक योग के आसन ऐसे हैं जिसे आप चाहे तो अपनी कुर्सी पर बैठे-बैठे भी कर सकते हैं। निश्चित तौर पर ऐसे कदमों से न सिर्फ कर्मचारी स्वस्थ रहता है, बल्कि उसकी कार्यक्षमता भी बेहतर होती है।
 
वर्तमान में देश के नौनिहालों और युवाओं पर पढ़ाई-लिखाई का कितना बोझ है, यह बताने की जरूरत नहीं है, क्योंकि आगे प्रतियोगिता कड़ी है और हमेशा बेहतर करने की होड़ कहीं-न-कहीं उनमें तनाव और निराशा के भाव को जन्म देती है, मगर कुछ देर का नियमित योगाभ्यास उन्हें और बेहतर करने में मदद करता है। इसी का नतीजा है कि योग आज स्कूली जीवन का अहम हिस्सा है। यहां तक कि कॉलेज और महाविद्यालयों में भी योग युवाओं के बीच में खासा लोकप्रिय है और इसके लिए बाकायदा विभाग भी सृजित किए गए हैं।
 
अगर आपके पास योग का ज्ञान है और आपके लिए योग एक व्यवसाय से बढ़कर जिंदगी का अहम हिस्सा है तो निस्संदेह आपको कहीं नौकरी मांगने की जरूरत नहीं होगी बल्कि उस ज्ञान का आप घर बैठे हुए भी सदुपयोग कर सकते हैं जिससे कि आप खुद निरोगी रहते हुए समाज को न सिर्फ निरोगी रखेंगे बल्कि ये आपकी आमदनी का भी हिस्सा बन जाएगा।
 
योग ने महिला सशक्तीकरण में भी अहम भूमिका निभाई है। ऐसी महिलाएं, जो घर से बाहर काम करने नहीं जा सकतीं, घर-गृहस्थी का बोझा और बच्चों की परवरिश का सवाल है और सम्मानजनक काम करने के लिए जमा-पूंजी भी नहीं है, उनके लिए योग का ज्ञान निस्संदेह रामबाण है।

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दक्षिणी दिल्ली में अपना योग सेंटर चलाने वाली काजल चौधरी कुछ समय पहले तक आम गृहिणी का जीवन जी रही थीं। कुछ समय पहले तक इनकी जिंदगी भी आम घरेलू महिलाओं की भांति ही थी लेकिन योग ने उनके जीवन की दशा ही बदल दी। उन्होंने आसपास रहने वाली महिलाओं को योग के लिए प्रेरित किया और आज अच्छी-खासी संख्या में महिलाएं उनके पास योगाभ्यास के लिए आती हैं।
 
यहां आप देख सकते हैं कि इनकी कक्षा में उम्र का कोई बंधन नहीं है। वे महिला सशक्तीकरण का एक नायाब उदाहरण समाज के सामने पेश करती हैं। ये महिलाएं घर-परिवार के अलावा अपना कुछ समय स्वयं के स्वास्थ्य पर भी खर्च करती हैं जिससे कि वे स्वस्थ रहें। निस्संदेह योग से उनकी जिंदगियों में बड़ा बदलाव बदलाव आया है। आज ऐसे युवाओं की भी कमी नहीं है, जो योग सीखकर उसे जनसेवा के साथ अपनी आजीविका का भी माध्यम बनाना चाहते हैं।
 
आज योग का बहुत बड़ा बाजार है जिससे लाखों लोगों की आजीविका जुड़ी हुई है। एक रिपोर्ट के मुताबिक दुनिया में योग सीखने वाले लोगों की संख्या करीब 20 करोड़ है, इसके साथ ही योग टीचर्स की मांग सालाना 35 प्रतिशत की दर से बढ़ी है। देश में योग ट्रेनिंग का कारोबार करीब 2.5 हजार करोड़ रुपए का हो चुका है। इसमें लगाए जाने योग शिविर, कॉर्पोरेट्स कंपनियों को दी जाने वाली ट्रेनिंग और प्राइवेट ट्रेनिंग शामिल है।
 
योग टीचर प्रतिघंटे 400-2000 रुपए तक फीस लेते हैं। बीते कुछ सालों में योग शिक्षकों की मांग काफी तेजी से बढ़ी है। योग सीखने के लिए योग्य और प्रशिक्षित शिक्षक की जरूरत होती है जिसकी वजह से देश और विदेशों में योग शिक्षकों की मांग में बहुत तेजी से बढ़ोतरी हुई है। भारतीय योग प्रोफेशनल की मांग देश में ही नहीं, विदेशों में भी काफी है।
 
एक रिपोर्ट के अनुसार सिर्फ अमेरिका में 76,000 रजिस्टर्ड योग शिक्षक हैं और इसके साथ ही 7,000 योग के स्कूल जुड़े हुए हैं। Yoga Alliance से 2014 से 2016 के बीच 14,000 नए योग शिक्षक जुड़े। एसोचैम की रिपोर्ट के अनुसार देश में योग की मांग आने वाले वर्षों में 30-40 प्रतिशत प्रतिवर्ष की दर से बढ़ने का अनुमान है। एसोचैम की इसी रिपोर्ट में कहा गया है कि योग की शिक्षा देने वालों की मांग 30-35 प्रतिशत प्रतिवर्ष की दर से बढ़ने का अनुमान है।
 
योग के ब्रांड एम्बेसेडर बाबा रामदेव की बात न की जाए, तो बात अधूरी ही है। निस्संदेह बाबा रामदेव का बहुत बड़ा योगदान है योग को विश्व पटल पर लाने का। आज बाबा लाखों नौजवानों के प्रेरणास्रोत हैं। कल तक जिस योग को दुनिया 'करतब' और 'सरकस' कहने से नहीं झिझकती थी, आज उन सबकी नजरें हमारी तरफ एक उम्मीद से देख रही हैं कि कैसे 'योग' के माध्यम से हम संसार को तनावमुक्त और निरोगी काया दे रहे हैं।
 
 

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