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कफ मिटाए बाधी क्रिया

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बाधी क्रिया
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हठयोग में शुद्धि क्रियाओं का बहुत महत्व है। क्रियाओं में प्रमुख है- नेती, धौती, बस्ती, कुंजर, न्यौली, त्राटक आदि। उक्त क्रियाओं के अभ्यास से संपूर्ण शरीर शुद्ध हो जाता है। किसी भी प्रकार की गंदगी जब शरीर में स्थान नहीं बना पाती है तो चित्त भी निर्मल और प्रसन्न रहता है। उक्त अवस्था से सभी तरह के रोग और शोक मिट जाते हैं। यहाँ प्रस्तुत है बाधी क्रिया के बारे में संक्षिप्त जानकारी।

बाधी क्रिया भी अन्य क्रियाओं की तरह कठिन और एक प्राचीन शुद्धि क्रिया है। हालाँकि इसका प्रचलन अब योग के साधकों तक ही सीमित रह गया है। बाघ आदि जानवर अस्वस्थ होने पर इसी प्रकार की क्रिया से स्वास्थ्य लाभ लेते हैं, इसलिए इसका नाम बाधी क्रिया है।

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विधि : खान-पान के दो घंटे बाद जब आधी पाचन क्रिया हुई होती है, ‍तब दो अँगुली गले में डालकर वमन (उल्टी) किया जाता है जिससे अधपचा भोजन बाहर निकल आता है- यही बाधी क्रिया है।

सावधानी : बाधी क्रिया को करने के लिए किसी योग्य योग चिकित्सक की सलाह लें। यदि किसी भी प्रकार का शारीरिक रोग हो तो यह क्रिया नहीं करना चाहिए। किसी भी प्रकार से किसी भी योगासन या क्रियाओं को जबरदस्ती नहीं करना चाहिए।

इसका लाभ : इससे पेट की सभी प्रकार की गंदगी, कफ आदि उस अधपचे अन्न के साथ निकल जाती है। फलतः पेट संबंधी शिकायतें दूर होती हैं, साथ ही कफजन्य रोगों में काफी लाभ मिलता है। उक्त क्रिया से बुद्धि उज्जवल हो जाती है और शरीर में सदा स्फूर्ति बनी रहती है। इससे योगाभ्यास का शत-प्रतिशत लाभ प्राप्त होता है।

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