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कमजोरी को दूर भगाए योग

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योग
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भीतर की शक्ति से ही जीवन चलता है। इस शक्ति का पतन तीन कारणों से होता है- पहला ऐसा सोचना जिससे चिंता होने लगे। दूसरा ऐसा खाना जिससे अपच होने लगे और तीसरा ऐसी अनियमित जीवन शैली मानो जिंदगी बीत जाए जीवन को संभालने में।

सोचो मगर जरा ध्यान से : व्यक्ति विचारों में खोकर खुद को तो खो ही देता है, साथ ही वह मानसिक रूप से कमजोर भी होने लगता है। सोच पर नियंत्रण जरूरी है। कहते हैं कि खाली दिमाग शैतान का और भरा दिमाग भूत का। तो सोचे समाधान के लिए चिंता के लिए नहीं। इसके लिए योग के प्राणायाम को अपनाएं, क्योंकि श्वास बदलेगी तो विचार भी बदल जाते हैं। प्राणायाम विचारों को सही दिशा देता है।

आहार से बिगड़ता शरीर : कुछ तो भी खाते-पीते रहने से शरीर कुछ तो भी होने लगता है। इससे सर्वप्रथम स्नायु दुर्बलता पैदा हो जाती है। स्नायु दुर्बलता से भीतर की शक्ति जाती रहती है। स्नायु दुर्बलता के कारण हैं- अनियमित भोजन, मद्यपान, बाजारू भोजन, अश्लिल पढ़ना, देखना, सुनना और कहना। इससे शरीर किसी भी रोग की चपेट में आ सकता है।

स्नायु कमजोरी के कारण अनावश्यक तनाव बना रहेगा और चिड़चिड़ापन रोगी को दिमागी द्वंद्व में उलझा देता है। दिमागी द्वंद्व के कारण रोगी झूठ बोलना, स्वार्थी व नीच बन जाना आदि बुरी आदतों का शिकार हो जाता है। इससे नपुंसकता और स्वप्नदोष जैसे रोगों का जन्म होता है।

इस तरह की कमोजरी को भगाने के लिए पहले बदलें अपना आहार और इसका पालन करें कम से कम पूरे एक वर्ष तक। शुरुआत में एक माह तक सिर्फ फलाहार और दूध लें। दूध में शहद तथा भीगे हुए बादाम या किशमिश का प्रयोग कर सकते हैं। बाद में 8-10 बादाम, 25 दाने किशमिश तथा 7-8 मनुक्के भिगोकर नाश्ते में लें। फिर हरी सब्जी और छिलकों वाली दाल का उपयोग पतली चपाती के साथ करें। चपाती मक्खन या मलाई के साथ लें। भोजन में सलाद का भरपूर उपयोग और प्याज, लहसुन तथा अदरक का संतुलित सेवन करें।

अनियमित जीवनशैली : खराब अन्न और मन का लाइफ स्टाइल पर प्रभाव पड़ता है। व्यक्ति लापरवह और गैर-जिम्मेदार होने लगता है। स्कूल, ऑफिस या अन्य किसी भी जगह देर से पहुंचना। जीवन की प्रत्येक बातों को कल के लिए स्थगित करते रहना आदि सैकड़ों ऐसे व्यवहार है जिससे ‍जीवन प्रभावित होता रहता है।

अत्यधिक विचार से द्वंद्व, द्वंद्व से भ्रम और संशय की उत्पत्ति होती है। संशय से खुद पर और दूसरों पर विश्वास की कमी होती जाती है। अविश्वास से अच्छे-बुरे को परखने की समझ पर असर पड़ता है। निर्णय क्षमता कमजोर होती है। यह सब अनियमित जीव शैली के परिणाम हैं।

अनियमित जीवन शैली को बदलने के लिए स्वाध्‍याय अर्थात स्वयं का अध्ययन करें। स्वयं की समीक्षा करें। स्वयं की बुरी आदतों और गलतियों को स्वीकार कर इसे बदलने के लिए छोटे-छोटे संकल्प लेकर आगे बढ़ें। संकल्प ही तप है।

योग पैकेज : नियमित योगासनों का अभ्यास और प्रतिदिन आधे घंटे योग-निद्रा करना इसकी मुख्य चिकित्सा है। योगासनों में प्रारंभ में कमर चक्रासन, जानुशिरासन, सुप्तवज्रासन, भुजंगासन, हलासन, हस्तपादोत्तनासन, योगमुद्रा, पवनमुक्तासन तथा मकरासन करें। फिर धीरे-धीरे खुली और स्वच्छ हवा में नाड़ी शोधन प्राणायम का अभ्यास करें। तब कपालभाति तथा भ्रामरी का अभ्यास करें। बंधों में उड्डियान बंध लगाएँ। सप्ताह में एक बार तेल मालिश अवश्य कराएँ। यह सब करें किसी योग्य योग चिकित्सक की सलाह पर।

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