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जानिए जल योग को

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योग
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जल ही जीवन है। जल के अलग-अलग तरह से सेवन करने से सभी तरह के रोग में लाभ मिलता है। जल योग न केवल उच्च रक्तचाप, कब्ज, गैस आदि बीमारियों से मुक्ति दिलाता है, बल्कि यह हमारी हड्डियों, मस्तिष्क और हृदय को मजबूत बनाने में भी खास भूमिका निभाता है।

दूसरी ओर शरीर और प्राण के बीच की कड़ी है जल। अर्थात भोजन और वायु के बीच की कड़ी है जल, जो व्यक्ति अपना जल और वायु शुद्ध तथा पुष्ट रखता है वह निरोगी रहकर दीर्घायु जीवन व्यतीत करता है। तो भोजन कम खाएं, जल ज्यादा पीएं और वायु जल से दोगुनी ग्रहण करें।

प्रतिबंध : अशुद्ध जल से लीवर और गुर्दों का रोग हो जाता है। यदि उक्त दोनों में जरा भी इंफेक्शन है तो इसका असर दिल पर भी पड़ता है। लगभग 70 प्रतिशत रोग जल की अशुद्धता से ही होते हैं। तो जल को जीवन में महत्व दें। कहीं का भी जल ना पीएं। जल पीते वक्त सावधानी रखेंगे तो भोजन और प्राण में इसका भरपूर लाभ मिलेगा। जल योग के संबंध में योग में बहुत कुछ लिखा है उसे जानें।

कैसे करें जल योग :
1.कुछ घंटे जल न पीएं और सर्वप्रथम शरीर का जल सूखा दें। फिर जल न कम पीएं और न ही अत्यधिक। फिर जल पीकर गणेश क्रिया, जलनेति, धौति क्रिया और वमन क्रिया किसी योग शिक्षक से सीखकर करें।

2.शरीर में 10 छिद्र हैं। दो आंखें, नाक के दो और कान के दो छिद्र के अलावा, मुंह, ‍लिंग और गुदा के छिद्र मिलाकर कुल दस। इन छिद्रों को दस बार के पानी से अच्छे से होने से उनमें किसी भी प्रकार का विकार नहीं रह जाता।

2.रात में ‘तांबे के बर्तन’ में जल रखकर प्रात:काल बासी मुंह से ‘उत्कट’ आसन में बैठकर उसका सेवन करना चाहिए। इस जल से हमारे शरीर में वात-पित्त और कफ का नाश होता है।

शुरू-शुरू में दो गिलास तक जल पीएं। उसके बाद धीरे-धीरे 5 गिलास तक पीने का अभ्यास करें। जल का सेवन करने के बाद शौच आदि के लिए जाएं। इस योग से शरीर में कॉपर की मात्रा जाती रहती है जिससे शरीर को हड्डियों और मांसपेशियों को लाभ मिलता है।

इसका लाभ : जल योग से उच्च रक्तचाप, कब्ज, गैस, अजीर्ण और हृदय रोग जैसे रोगों में लाभ मिलता है। जल से जहां हमारे शरीर के दूषित पदार्थ बाहर निकल जाते हैं वहीं यह हमारे चेहरे की कांति बनाए रखता है। क्रमश:

अनिरुद्ध जोशी 'शतायु'

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