Yoga Articles %e0%a4%af%e0%a5%81%e0%a4%b5%e0%a4%be %e0%a4%ae%e0%a4%a8 %e0%a4%94%e0%a4%b0 %e0%a4%af%e0%a5%8b%e0%a4%97%e0%a4%a8%e0%a4%bf%e0%a4%a6%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%be 110040200079_1.htm

Hanuman Chalisa

Select Your Language

Notifications

webdunia
webdunia
webdunia
webdunia

युवा मन और योगनिद्रा

Advertiesment
योग और ध्यान
ND
आधुनिक युग की गलाकाट प्रतियोगिता और ढेर सारे सपनों को हकिकबनानकी तमन्ना के चलते तेज गति से चलने वाले इस चंचल और भटके हुए मन को काबू में कर तनाव को दूर भगाने के लिए ही योगनिद्रा है। योगनिद्रा युवा मन को तरोताजा और तेज बनाए रखने के लिए कारगर सिद्ध हो सकती है।

क्या है योगनिद्रा : योगनिद्रा का मतलब आध्यात्मिक नींद। यह वह नींद है, जिसमें जागते हुए सोना है। सोने व जागने के बीच की स्थिति है योगनिद्रा। यह झपकी जैसा है या कहें कि अर्धचेतन (Semi conscious) जैसा है। 10 से 45 मिनट में बहुत कुछ घट सकता है। आप सपने देखकर पुन: सचेत हो सकते हो। यह प्रारंभिक अवस्था है। फिर सपने देखते हुए भी जाग्रत रह सकोगे। इसके लिए लगातार अभ्यास की आवश्यकता है। देवता इसी निद्रा में सोते हैं।

विधि : ढीले कपड़े पहनकर शवासन करें। जमीन पर दरी बिछाकर उस पर एक कंबल बिछाएँ। दोनों पैर लगभग एक फुट की दूरी पर हों, हथेली कमर से छह इंच दूरी पर हो। आँखे बंद रखें।

अपने शरीर व मन-मस्तिष्क को शिथिल कर दीजिए। सिर से पाँव तक पूरे शरीर को शिथिल कर दीजिए। पूरी साँस लेना व छोड़ना है। अब कल्पना करें आप के हाथ, पाँव, पेट, गर्दन, आँखें सब शिथिल हो गए हैं। अपने आप से कहें कि मैं योगनिद्रा का अभ्यास करने जा रहा हूँ।

अब अपने मन को शरीर के विभिन्न अंगों पर ले जाइए और उन्हें शिथिल व तनावरहित होने का निर्देश दें। पूरे शरीर को शांतिमय स्थिति में रखें। गहरी साँस ले।

फिर अपने मन को दाहिने पैर के अँगूठे पर ले जाइए। पाँव की सभी अँगुलियाँ कम से कम पाँव का तलवा, एड़ी, पिंडली, घुटना, जाँघ, नितंब, कमर, कंधा शिथिल होता जा रहा है। इसी तरह बायाँ पैर भी शिथिल करें। सहज साँस लें व छोड़ें। अब लेटे-लेटे पाँच बार पूरी साँस लें व छोड़ें। इसमें पेट व छाती चलेगी। पेट ऊपर-नीचे होगा।

सावधानी : योगनिद्रा में सोना नहीं है। योगनिद्रा 10 से 45 मिनट तक की जा सकती है। योगनिद्रा के लिए खुली जगह का चयन किया जाए। यदि किसी बंद कमरे में करते हैं तो उसके दरवाजे, खिड़की खुले रखें। शरीर को हिलाना नहीं है, नींद नहीं निकालना, यह एक मनोवैज्ञानिक नींद है, विचारों से जूझना नहीं है। सोचना नहीं है साँसों के आवागमन को महसूस करना हूँ।

लाभ : योगनिद्रा द्वारा मनुष्य से अच्छे काम भी कराए जा सकते हैं। बुरी आदतें भी इससे छूट जाती हैं। योगनिद्रा का प्रयोग रक्तचाप, मधुमेह, हृदय रोग, सिरदर्द, तनाव, पेट में घाव, दमे की बीमारी, गर्दन दर्द, कमर दर्द, घुटनों, जोड़ों का दर्द, साइटिका, अनिद्रा, थकान, अवसाद, प्रसवकाल की पीड़ा में बहुत ही लाभदायक है।

योगनिद्रा में किया गया संकल्प बहुत ही शक्तिशाली होता है। योगनिद्रा द्वारा शरीर व मस्तिष्क स्वस्थ रहते हैं। यह नींद की कमी को भी पूरा कर देती है। इससे थकान, तनाव व अवसाद भी दूर हो जाता है।

योगनिद्रा के कई आध्यात्मिक लाभ भी है, लेकिन आधुनिक चंचल, उत्तेजित और तनावग्रस्त मन के लिए यह बहुत ही लाभदायक है। यही ध्यान की स्थिति भी है।

Share this Story:

Follow Webdunia Hindi