शरीर का महत्वपूर्ण अंग है गुर्दा जिसे अंग्रेजी में किडनी कहा जाता है। 150 ग्राम वजनी गुर्दे का आकार किसी बीज की भांति होता है। यह शरीर में पीछे कमर की ओर रीढ़ के ढांचे के ठीक नीचे के दोनों सिरों पर स्थित होते हैं। शरीर में दो गुर्दे होते हैं।
गुर्दे का कार्य : गुर्दा रक्त में से जल और बेकार पदार्थो को अलग करता है। शरीर में रसायन पदार्थों का संतुलन, हॉर्मोन्स छोड़ना, रक्तचाप नियंत्रित करने में सहायता प्रदान करता है। यह लाल रक्त कोशिकाओं के निर्माण में भी सहायता करता है। इसका एक और कार्य है विटामिन-डी का निर्माण करना, जो मनुष्य की हड्डियों को स्वस्थ और मजबूत बनाता है।
गुर्दे के रोग : लगातार दूषित पदार्थ खाने, दूषित जल पीने और नेफ्रॉन्स के टूटने से गुर्दे के रोग उत्पन्न होते हैं। इस टूटन के कारण गुर्दे शरीर से व्यर्थ पदार्थो को निकालने में अक्षम हो जाते हैं। गुर्दे के रोग का बहुत समय तक पता नहीं चलता, लेकिन जब भी कमर के पीछे दर्द उत्पन्न हो तो इसकी जांच करा लेनी चाहिए।
गुर्दे के गंभीर रोगों को दो श्रेणियों में विभाजित किया जा सकता है- पहला एक्यूट रीनल फेल्योर इसमें गुर्दे आंशिक अथवा पूर्ण रूप से काम करना बंद कर देते हैं परंतु लगातार उपचार द्वारा यह धीरे-धीरे पुन: कार्यशील हो जाते हैं। गुर्दे की दूसरी बीमारी क्रोनिक रीनल फेल्योर है इसमें नेफ्रॉन्स की अत्यधिक मात्रा में क्षति हो जाती है जिसके कारण गुर्दो की कार्यक्षमता उत्तरोत्तर कम होती चली जाती है।
गुर्दे की जांच : उक्त दो तरह के रोगों के निदान के लिए सबसे पहले रक्त यूरिया नाइट्रोजन तथा किरेटिनाइन का रक्त परीक्षण करवाना चाहिए। मूत्र जांच भी करा लेना चाहिए क्योंकि इससे यह पता चलता है कि गुर्दो की कार्यशीलता और कर्यक्षमता कैसी है।
लक्षण : जब गुर्दा किसी रोग से रोगग्रस्त हो जाता है तो मूत्र संबंधि तकलीफ शुरू हो सकती है। आंखों के नीचे सुजन या पैरों के पंजों में सुजन हो सकती है। पाचन क्रिया भी कमजोर पड़ जाती है।
गुर्दे को मजबूत बनाए रखने के लिए योगासन: 1.खड़े होकर किए जाने वाले आसन : अंर्धचंद्रासन, त्रिकोणासन और पश्चिमोत्तनासन। 2.बैठकर किए जाने वाले आसन : उष्ट्रासन, योगमुद्रा और मार्जायासन। 3.लेटकर किए जाने वाले आसन : सर्पासन, धनुरासन और हलासन।
विशेष : उपरोक्त आसन न भी कर सकते हैं तो सूर्यनम:स्कार और खड़े रहकर किए जाने वाले अंग संचालन को नियमित करें। अंगसंचालन (सूक्ष्म व्यायाम) जिसमें कमर का अधिक व्यायाम होता हो वह करें। बहुत तेजी से फायदा के लिए योग के सभी बंधों को सिख लें। बंध त्रय और अर्थमत्येंद्रासन का नियमित अभ्यास करें।
इसके अलावा नियंत्रित आहार से खराब किडनी को ठीक किया जा सकता है। आप नियमित नींबू, आलू का रस और हमेशा शुद्ध जल का अधिक से अधिक सेवन करें। भोजन में मसालेदार भोज्यपदार्थ का सदा के लिए त्याग कर दें। तनाव और प्रदूषण से दूर रहें।
नोट : अंर्धचंद्रासन, त्रिकोणासन, पश्चिमोत्तनासन, उष्ट्रासन, योगमुद्रा, मार्जायासन, सर्पासन, धनुरासन और हलासन के अलावा आप चाहें तो वृक्षासन, ताड़ासन, पादस्तासन, आंजनेय आसन और विरभद्रासन भी कर सकते हैं। यदि आप गुर्दे के रोग से ग्रस्त हैं तो उपरोक्त आसन किसी योगाचार्य से पूछकर उसके सानिध्य में ही करें। डॉक्टर की सलाह लें।-WD