हवा : भोजन कुछ दिन न मिले तो जीवन चल जाएगा। पानी कुछ घंटे न मिले तो भी चल जाएगा, लेकिन हवा हमें हर पल चाहिए। जिस तरह दूषित भोजन और पानी स्वत: ही निकल जाते हैं या कभी-कभार निकालने का प्रयास करते हैं, उसी तरह शरीर के फेफड़ों और पेट में एकत्रित दूषित वायु को निकालने का प्रयास करें। हलके प्रेशर से साँस बाहर फेंक दें, फिर पूरी गहराई से साँस भीतर खींचें, भ्रस्त्रिका और कपालभाति के इस हिस्से को जब भी समय मिले करते रहें। छींक आए तो पूरी ताकत से छींकें।नींद : नींद एक डॉक्टर है और दवा भी। आपकी नींद कैसी होगी, यह निर्भर करता है इस पर कि आप दिनभर किस तरह से जीएँ। जरूरी है कार्य, विचार, आहार और व्यवहार पर गंभीर मंथन करना। यदि यह संतुलित और सम्यक रहेगा तो भरपूर नींद से स्वास्थ्य में लाभ मिलेगा। यह भी ध्यान रखें कि ज्यादा या कम नींद से सेहत और मन पर विपरीत असर पड़ता है। अच्छे स्वप्नों के लिए अच्छी दिनचर्या को मैनेज करें। इससे स्वास्थ्य अच्छा रहेगा। कैसे करें रिफ्रेश योगा :योगा एक्सरसाइज : आँखों को, जीभ को, हाथ-पैर की कलाइयों को, कमर को, गर्दन को दाएँ-बाएँ और ऊपर-नीचे करते हुए गोल-गोल घुमाएँ। हाथों की मुट्ठी को खोलें और बंद करें। इसी तरह पैरों की अँगुलियों की योगा एक्सरसाइज करें। कानों को मरोड़ें, पूरा मुँह खोलकर बंद करें। बदन में किसी देवता के आने जैसा हिलें या धूजें। गादी पर लोट लगाएँ। गुलाटी लगाने का प्रयास न करें। बदन में लचक हो तो ही गुलाटी लगाएँ। अंगड़ाई आए तो उसको अच्छे से मजा लेते हुए करें। यह सब कुछ अंग संचालन का हिस्सा मात्र है।मन और मस्तिष्क : मानसिक द्वंद्व, चिंता, दुख: या दिमागी बहस हमारी साँसों की गति को अनियंत्रित करते हैं, जिससे खून की गति भी असंतुलित हो जाती है। इसका सीधा असर हृदय, फेफड़े और पेट पर होता है और यह गंभीर रोग का कारण भी बन सकता है। इसका सीधा-सा समाधान है कि जब भी तनावग्रस्त्र या ज्यादा सोचग्रस्त्र रहें तो पेट और फेफड़ों की हवा पूरी तरह से बाहर निकाल दें और नए सिरे से ताजी हवा भरें। ऐसा पाँच से छह बार करें। हँसने का मौका हो तो खिलखिलाकर हँसें।झपकी ध्यान : सिर्फ एक मिनट का झपकी ध्यान करें। ऑफिस या घर में जब भी लगे तो 60 सेकंड की झपकी मार ही लें। इसमें साँसों के आवागमन को तल्लीनता से महसूस करें। गहरी-गहरी साँस लें। यह न सोचें कि कोई देख लेगा तो क्या सोचेगा। हाँ आफिस में इसे सतर्कता से करें, वरना बॉस गलत समझ बैठेंगे। इस ध्यान से आप स्वयं को हर वक्त तरोताजा महसूस करेंगे।
मौन : मौन से मन की आंतरिक्त शक्ति और रोगों से लड़ने की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। कुछ क्षण ऐसे होते हैं जबकि हम खुद-ब-खुद मौन हो जाते हैं। ऐसा कुछ विशेष परिस्थिति में होता है, लेकिन मौन रहने का प्रयास करना और यह सोचते हुए कि मौन में कम से कम सोचने का प्रयास करूँगा, ज्यादा से ज्यादा देखने और साँसों के आवागमन को महसूस करने का प्रयास करूँगा, एक बेहतर शुरुआत होगी। दो घंटे की व्यर्थ की बहस से 10 मिनट का मौन रिफ्रेश कर विजन पावर बढ़ाएँगा।
अंतत: : यदि कर सकें तो कभी-कभार भ्रस्त्रिका, कपालभाति और अनुलोम-विलोम प्राणायाम करें। आसनों में सुप्त वज्रासन, पश्चिमोत्तनासन पादहस्तासन, भुजंगासन, हलासन, वकरासन और अर्धमत्स्येंद्रासन करें। जरूरी नहीं कि सभी आसन या प्राणायम एक साथ करें या इनके लिए अलग से समय निकालें। कोई भी एक आसन का चयन कर लें और सुबह टॉइलेट के बाद नहाने के पहले या बाद में कर डालें।