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रात की मटकी फोड़ें

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एक समय था जब स्टूडेंट्स अलसुबह उठकर स्टडी करते थे लेकिन लाइफ स्टाइल बदल जाने के बाद अब तमाम स्टूडेंट्स रातभर स्टडी करते हैं। यदि रात मटकी है तो इसे फोड़कर वे अपने लिए गुडलक की गुल्लक निकालते हैं। रात-रातभर पढ़ाई करने के ट्रेंड पर एक रिपोर्ट-

रात का सन्नाटा, कमरे में रखी स्टडी टेबल, उस पर कोर्स की मोटी-मोटी किताबें और नोट्स। टेबल पर ही रखा चाय का कप, नाइट लैंप की फोकस लाइट और स्टडी में डूबे स्टूडेंट्स। पढ़ाई के लिए एक अच्छा माहौल बनाता म्यूजिक। यह युवाओं की लाइफ स्टाइल का अंग सा बनता जा रहा है। पहले जहाँ ब्रह्म मुहूर्त में जागकर पढ़ाई की जाती थी, वहीं अब स्थिति बदल गई है। अलसुबह का अलार्म लगाना, मम्मी या दादी से सुबह जल्दी जगाने की रिक्वेस्ट करना और जागने के बाद भी अलसाए और ऊँघते हुए पढ़ना अतीत की बातें हैं।

ऐसा नहीं कि युवा सुबह जल्दी जागकर पढ़ने के फायदे को नकारते हैं पर पसंद करते हैं रात-रातभर जागकर पढ़ने की आदत को। जल्दी सोने और जल्दी जागने की बजाए अब युवा देर रात तक पढ़ने और सुबह देर तक सोने की बात करते हैं। अब दस बजे कॉलेज के लिए रवाना होने के लिए नौ बजे नींद उड़ाई जाती है और भागते-दौड़ते लेट ही सही कॉलेज पहुँचा ही जाता है। ये युवा मानते हैं कि रात के वक्त एकांत का लाभ मिलता है।

युवाओं ने खुद बताए रात को पढ़ने के क्या-क्या फायदे हैं और उन्हें रात में पढ़ना क्यों पसंद है।

एकांत से एकाग्रता

पीजीडीसी कर रही नेहा शर्मा रात को जागकर पढ़ना ही पसंद करती है। वे कहती हैं कि रात को एकांत रहता है और पढ़ाई में इससे एकाग्रता बढ़ती है। अलसुबह तो परिवार के सदस्य भी जाग जाते हैं और इससे ध्यान भटकने लगता है जबकि रात को पढ़ना सहज होता होता है। रात को एक ही लंबी सीटिंग में ज्यादा बेहतर ढंग से पढ़ा जा सकता है।

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रात है बेहतर

एमएसी इलेक्ट्रॉनिक इन मीडिया की छात्रा अनन्या मिश्रा भी यही मानती हैं कि सुबह जल्दी जागकर पढ़ाई बेहतर होती है लेकिन इनके लिए सुबह जल्दी जागने का अर्थ है रात के 2-3 बजे से पढ़ना। वे कहती हैं जल्दी सोकर थकान दूर कर देर रात उठ जाती हूँ। लिहाजा ताजगी के साथ पढ़ भी लेती हूँ। इसलिए मैं मानती हूँ कि स्टडी के लिए आधी रात बेहतर है।समय का सदुपयोग

ऋषि जोशी और मयूर जोशी भी रात को ही पढ़ते हैं। बीकॉम प्रथम वर्ष के विद्यार्थी ऋषि और लॉ के स्टूडेन्ट मयूर कहते हैं सुबह कॉलेज देर से ही लगता है और शाम देर से लौटना होता है। इसलिए जब परिवार के सदस्य सो जाते हैं तब हम पढ़ने लगते हैं। और अलसुबह सो जाते हैं। जाहिर है इस तरह हम रात का पूरा सदुपयोग करते हैं।

रिवीजन होता है

मैं रात को देर तक रिवीजन करता हूँ। यह कहना है एमबीए की तैयारी कर रहे अर्जुनसिंह कुशवाह का। वे कहते हैं कि इस तरह रिवीजन से डाउट भी क्लीयर हो जाते हैं। रात को चूँकि शांति रहती है इसलिए ऑनलाइन टेस्ट की भी प्रेक्टिस बेहतर तरीके से हो जाती है। रात को पढ़ाई करने के दौरान किसी तरह का व्यवधान नहीं आता और मन ज्यादा लगता है।

यह माकूल वक्त है

एमबीए की तैयारी कर रहे विशाल जैन और एमकॉम कर रहे शुभम जैन कहते हैं कि आम तौर पर सुबह जल्दी जागने में कई बार आलस आ जाता है जबकि रात को एक ही बैठक में देर तक पढ़ाई हो जाती है। दिन में जो पढ़ा जाता है उसे रात को दोहराने का मौका मिल जाता है और याद करने के लिए भी पर्याप्त शांति भी मिलती है।

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