कुछ लोगों को कुछ चीजें विरासत में मिलती हैं, बाकी उन्हें अपनी मेहनत और लगन से हासिल करना होती हैं। अपनी कुशलता और कौशल से हासिल करना होती हैं। अपने खून और अपने सपनों से हासिल करना होती हैं। जोया अख्तर ऐसी ही युवा निर्देशिका हैं।
जोया अख्तर भले ही जावेद अख्तर और हरी ईरानी की बेटी हों, फरहान अख्तर की बेटी हों, लेकिन फिल्म लिखने और निर्देशित करने की कला उन्होंने हासिल की है। जिंदगी ना मिलेगी दोबारा को मिली कामयाबी से वे खुश हैं और सुर्खियाँ बटोर रही हैं।
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हाल में बिग बी ने कहा कि जिंदगी ना मिलेगी दोबारा एक डिलाइटफुल फिल्म है। कुल मिलाकर यह फिल्म सभी वर्ग के और खासकर युवा वर्ग के दर्शकों को खासी पसंद आ रही है। क्रिटिक्स पहले ही तारीफ में पन्ने रंग चुके हैं। यह फिल्म बहुत ही हल्के-फुल्के पलों में बहुत गहराई से मानवीय रिश्तों की गरिमा, तनाव, सुख और दुःख, अपराध बोध और उससे उबरने की ताकत को अभिव्यक्त करती है।
अपनी पहली फिल्म लक बाय चांस से ही वे बता देती हैं कि एक साफ-सुथरी और मानीखेज फिल्म बनाने के सारे गुण उनमें मौजूद हैं। इन गुणों को जिंदगी ना मिलेगी दोबारा में विकसित होते देखा जा सकता है। इसकी कास्टिंग जोरदार है और यह नहीं भूलना चाहिए कि जोया ने बतौर कास्टिंग डायरेक्टर भी काम किया है। जिंदगी ना मिलेगी दोबारा में बेहतरीन कास्टिंग है और लगता है अभय देओल, रितिक रोशन और फरहान अख्तर का रोल उनके लिए ही लिखा गया था।
इसके अलावा जोया ने दिल चाहता है, लक्ष्य फिल्म में बतौर असिस्टेंट डायरेक्टर काम किया। इन फिल्मों का अनुभव भी निश्चित काम आया है। कहने की जरूरत नहीं कि बॉलीवुड के पुरुष निर्देशकों के वर्चस्व के बीच जोया की यह बहुत ही रचनात्मक दखल गौर करने लायक है।