एमएफ हुसैन के जाने का युवाओं के लिए क्या मतलब हो सकता है। हुसैन जीवनभर अपने कैनवास को अपनी कल्पना से रंगते रहे। उन्होंने मदर टेरेसा को एक करुणामयी माँ के रूप में चित्रित किया। मदर टेरेसा की साड़ी के पल्लू को उन्होंने माँ के आंचल के रूप चित्रित किया, जिसमें देश का अनाथ बचपन पलता-बढ़ता है।
उन्होंने माधुरी दीक्षित को एक भारतीय स्त्री के रूप में देखकर ठेठ भारतीय सौंदर्य को रंग-रेखाओं में चित्रित किया। माधुरी और तब्बू को लेकर उन्होंने फिल्में भी बनाईं और उनके चित्र बताते हैं कि अपने-अपने मुल्क और संस्कृति से कितना प्रेम करते थे। यह सब प्रेम की ही अभिव्यक्तियाँ हैं। उनके चित्र हों, रेखा चित्र हों या फिल्में हों, ये सब उनके प्रेम की ही अभिव्यक्तियाँ हैं। प्रेम एक व्यक्ति को कितना रचनात्मक और कल्पनाशील बना सकता है।
क्या युवा आज जो प्रेम की खातिर मरने-मारने पर उतारू है, उसे हुसैन से नहीं सीखना चाहिए कि प्रेम के जरिए वे कितने रचनात्मक और कल्पनाशील हो सकते हैं।