लंदन ड्रीम्स दो दोस्तों सलमान खान और अजय देवगन के सपनों की कहानी है। इनके जीवन में संगीत है, रिदम है और बीट्स है और ये आसमाँ पर छा जाने की तमन्ना रखते हैं। इसीलिए फिल्म का म्यूजिक युवाओं को पसंद आ रहा है क्योंकि यह रॉकिंग है। प्रसून जोशी ने युवा दिलों की धड़कनों से सुर मिलाते हुए पोएटिक सॉन्ग लिखे हैं और उन्हें कभी जोश भरी और कभी मुलामय और मधुर धुनों में बाँधा है शंकर-अहसान-लॉय ने ।
बॉलीवुड फिल्म लंदन ड्रीम्स सपनों की, सपनों को पूरा करने के लिए संघर्ष की कहानी है। यह दो दोस्तों के बीच दोस्ती के जज्बे और जीत के जश्न की कहानी भी है। और चूँकि ये दोस्त रॉक स्टार बनना चाहते हैं लिहाजा यह गीत-संगीत की कहानी भी है क्योंकि अंततः ये संगीत के जरिए ही संगीत का सपना पूरा करते हैं। इसलिए इसके गीत-संगीत में दोस्ती की भावुकता भी है तो संगीत के लिए प्रेम भी। सपने भी हैं तो सपनों को पूरा करने का जज्बा भी है। यह आसमाँ पर छा जाने और गुनगुनाने का संगीत है।
इसलिए इस कहानी को ध्यान में रखते हुए प्रसून जोशी ने बेहतरीन गीत लिखे हैं। इसमें कविता भी है और वह सब भाव भी जो किसी भी युवा के दिल की धड़कनें हैं। और फिर इन धड़कनों को कल्पनाशीलता के साथ कंपोज किया है शंकर-अहसान-लॉय ने। चूँकि यह फिल्म म्यूजिकल है लिहाजा एक बार फिर प्रसून जोशी और शंकर-अहसान-लॉय ने रॉकिंग गीत-संगीत का गिफ्ट दिया है।
फिल्म में नौ गाने ओरिजनल हैं और तीन रीमिक्स हैं। सबसे जबर्दस्त गीत है बरसो यारों बरसो रे। चूँकि यह गीत स्टेज पर होता है लिहाजा यह पॉवर पैक्ड सॉन्ग है। इसमें ऊर्जा है, उमंग है और आसमाँ को छूने और गुनगुनाने की हिलोरें मारती तमन्नाएँ हैं। प्रसून जोशी युवाओं की नब्ज बेहतर जानते हैं लिहाजा इसमें जोश है और वैसा ही जोशभरा संगीत भी है। इसे उतने ही जोश-ओ-खरोश के साथ गाया है विशाल ददलानी और रूपकुमार राठौड़ ने।
यारी बिना... गीत शुद्ध सिचुएशनल सॉन्ग है और यह बात खूबी से अभिव्यक्त करता है कि यारी बिना बेसुरी है जिंदगी। इसे रूप कुमार और मिलिंद ने गाया है लेकिन जश्न है जीत का... गीत फिर रॉकिंग है जिसे अभिजीत घोषाल ने गाया है। लेकिन फिल्म का सोलफुल सॉन्ग है ख्वाब को राग दे...। यह पोएटिक है और इसे राहत फतेह अली खान और शंकर महादेवन ने डूबकर गाया है। सुंदर बोलों को मीठी धुन ने धड़कता-फड़कता बना दिया है। शोला शोला तू है शोला... गीत जुबिन गर्ग ने गाया है लेकिन इसमें एक मजेदार गीत है मन को अति भावे गीत...। इसमें लोकगीतों का असर है और शुद्ध कविता करते हुए प्रसून ने लिखा है और इसकी आत्मा को बरकरार रखते हुए शंकर ने खूबी से गाया है।