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समाज में बढ़ रही घृणा की प्रवृत्ति देश के लिए बड़ी चुनौती : बिशप चाको

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वृजेन्द्रसिंह झाला

देश आजादी का अमृत महोत्सव मना रहा है। आजादी के बाद के 75 वर्षों में देश में हर क्षेत्र में विकास हुआ, इसका देशवासियों को फायदा भी मिला। लेकिन, देश का बड़ा तबका आज भी विकास से वंचित है। समाज में एक-दूसरे के प्रति पनप रही घृणा की प्रवृत्ति वर्तमान समय में देश के लिए बड़ी चुनौती है। 
 
आजादी के अमृत महोत्सव के तहत 'कल, आज और कल' श्रृंखला के लिए इंदौर डायोसिस के बिशप चाको थोत्तूमरिक्कल ने शिक्षा, देश के विकास समेत विभिन्न मुद्दों पर खुलकर विचार रखे। उन्होंने कहा कि इसमें कोई संदेह नहीं कि देश में चौतरफा विकास हुआ है, लेकिन समाज का एक बड़ा वर्ग आज भी विकास से वंचित है। ऐसे लोगों को विकास की यात्रा में शामिल करना निश्चित ही बड़ी चुनौती है। भारत युवा देश है, युवाओं की संख्या भी यहां बहुत ज्यादा है, यह हमारे लिए उपलब्धि है, लेकिन ऐसे युवाओं को रोजगार समेत विभिन्न क्षेत्रों में उचित अवसर मिलें तो हमारा देश और आगे बढ़ सकता है। सबको शिक्षा के साथ रोजगार उपलब्ध करवाना बड़ी चुनौती है। 
 
वेबदुनिया से बातचीत में बिशप कहते हैं कि सामाजिक क्षेत्र में भी चुनौतियां कम नहीं हैं। वसुधैव कुटुंबकम हमारी नीति रही है, देश के सभी वर्ग और धर्म के लोग आपसी सद्भाव और प्रेम के साथ रहते हैं, लेकिन पिछले कुछ समय से देखने में आ रहा है कि मिल-जुलकर रहने वाली इस संस्कृति में 'दरारें' नजर आने लगी हैं। एक दूसरे को शंका और घृणा की दृष्टि से देखने की संस्कृति पनप रही है। यह हमारे देश के हित में नहीं है।
 
विभिन्न भाषा-भाषियों और धर्मावलंबियों के साथ दूसरे देशों के लोग भी भारत में आकर बसे हुए हैं। सभी सद्भाव और प्रेम से रहते हैं। हमारी मूलभूत संस्कृति सबको जोड़ने की रही है। सभी एक दूसरे को विश्वास की दृष्टि से देखें और सहयोग की दृष्टि से काम करें तो हम बहुत आगे जा सकते हैं। यदि ऐसा होगा तो विकास की गति आगे भी कायम रह सकेगी।
 
शिक्षा के क्षेत्र में हुआ काफी विकास : बिशप चाको ने वेबदुनिया से बातचीत में कहा कि यह प्रसन्नता का विषय है कि दूरदर्शी नेताओं के मार्गदर्शन में हमने सभी क्षेत्रों में प्रगति है। निश्चित ही आजादी के समय शिक्षा की मूलभूत सुविधाएं काफी कम थीं, लेकिन धीरे-धीरे शिक्षा के क्षेत्र में भी काफी प्रगति हुई। हमारे यानी कैथलिक समुदाय के ही एक समय इंदौर में मात्र 2 स्कूल थे, जिनकी संख्‍या बढ़कर अब 30 हो गई। इसके अलावा हमारा महाविद्यालय भी है, नर्सों की शिक्षा के लिए नर्सिंग कॉलेज की भी हमने स्थापना की है।
इंदौर देश का एकमात्र ऐसा शहर है जहां आईआईटी और आईआईएम दोनों मौजूद हैं। 1970 के आसपास इंदौर में 4 ही महाविद्यालय थे, लेकिन अब इनकी संख्‍या बढ़कर 200 हो गई है। अभी आधा दर्जन से ज्यादा विश्वविद्यालय हैं। शिक्षा के क्षेत्र में इंदौर में काफी विकास हुआ है। यहां प्रदेश और देश के दूसरे स्थानों से आकर विद्यार्थी अध्ययन करते हैं। स्वास्थ्य शिक्षा की बात करें तो पहले एकमात्र कॉलेज एमजीएम था, लेकिन अब इंडेक्स और अरविन्दो जैसे संस्थान मेडिकल एजुकेशन प्रदान कर रहे हैं।
 
औद्योगिक विकास में तेजी : बिशप चाको ने कहा कि औद्योगिक विकास भी तेजी से हुआ। प्रधानमंत्री मोदी जी के सपने 'मेक इन इंडिया' अब ज्यादातर चीजें देश में ही बन रही है। पहले बहुत से चीजें बाहर से आती हैं। कृषि के क्षेत्र में बड़े-बड़े बदलाव हुए हैं। हरित क्रांति के माध्यम से देश में कृषि उत्पादन बढ़ा, श्वेत क्रांति के माध्यम से दुग्ध उत्पादन बढ़ा। हम आत्मनिर्भर भारत की ओर अग्रसर होते जा रहे हैं। अंतरिक्ष, ट्रांसपोर्ट, हाईवे, इन्फ्रास्ट्रक्चर आदि सभी क्षेत्रों में हमने तरक्की की है।

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