'वेबदुनिया' के पाठकों के लिए 'पाक्षिक पंचांग' श्रृंखला में प्रस्तुत है भाद्रपद कृष्ण पक्ष का पाक्षिक पंचांग
संवत्सर- परिधावी
संवत्- 2076 शक संवत् : 1941
माह- भाद्रपद
पक्ष- कृष्ण पक्ष (16 अगस्त से 30 अगस्त तक)
ऋतु : वर्षा-शरद
रवि : दक्षिणायणे
गुरु तारा- उदितस्वरूप
शुक्र तारा- अस्तस्वरूप
सर्वार्थ सिद्धि योग-18 अगस्त, 20 अगस्त, 24 अगस्त
अमृतसिद्धि योग- 20 अगस्त, 24 अगस्त
द्विपुष्कर योग- अनुपस्थित
त्रिपुष्कर योग- 17 अगस्त, 27 अगस्त
रविपुष्य योग- अनुपस्थित
गुरुपुष्य योग- अनुपस्थित
एकादशी- 26 अगस्त (जया एकादशी व्रत)
प्रदोष- 28 अगस्त
भद्रा- 18 अगस्त (उदय-अस्त), 22 अगस्त (उदय-अस्त), 25 अगस्त (उदय)-26 अगस्त (अस्त),
28 अगस्त (उदय)-29 अगस्त (अस्त)
पंचक : 20 अगस्त को समाप्त
मूल- 19 अगस्त से प्रारंभ 21 अगस्त को समाप्त, 28 अगस्त से प्रारंभ 30 अगस्त को समाप्त
अमावस- 30 अगस्त (कुशोत्पाटनी)
ग्रहाचार : सूर्य-सिंह, चंद्र- (सवा दो दिन में राशि परिवर्तन करते हैं), मंगल-सिंह, बुध-कर्क (26 अगस्त से सिंह राशि में), गुरु-वृश्चिक, शुक्र-कर्क, शनि-धनु, राहु-मिथुन, केतु- धनु
व्रत/त्योहार : 19 अगस्त- गणेश चतुर्थी (चंद्रोदय रात्रि 9.39 मि.), 21 अगस्त- हलषष्ठी, 24 अगस्त- श्रीकृष्ण जन्माष्टमी (वैष्णव)
(विशेष- उपर्युक्त गणनाओं में पंचांग भेद होने पर तिथियों/योगों में परिवर्तन संभव है।)
-ज्योतिर्विद् पं. हेमन्त रिछारिया
प्रारब्ध ज्योतिष परामर्श केंद्र
About Writer
पं. हेमन्त रिछारिया
ज्योतिर्विद पं. हेमन्त रिछारिया ज्योतिष प्रभाकर उपाधि से सम्मानित हैं। विगत 12 वर्षों से ज्योतिष संबंधी अनुसंधान एवं ज्योतिष से जुड़ी गलत धारणाओं का खंडन कर वास्तविक ज्योतिष के प्रचार-प्रसार में योगदान दे रहे हैं। कई ज्योतिष आधारित पुस्तकों का लेखन।....
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