लॉकडाउन में बरकत बनी रहे इसके लिए करें ये 8 महत्वपूर्ण कार्य

अनिरुद्ध जोशी

सोमवार, 6 अप्रैल 2020 (12:16 IST)
बरकत को हिन्दी में प्रचुरता मान सकते हैं। कुछ लोग इसे प्रभु की कृपा और कुछ इसे लाभ मानते हैं। कुछ इसका अर्थ समृद्धि या सौभाग्य से लगाते हैं। अंग्रेजी में इसे abundance कहते हैं।
 
 
बरकत अर्थात वह शुभ स्थिति जिसमें कोई चीज या चीजें इस मात्रा में उपलब्ध हों कि उनसे आवश्यकताओं की पूर्ति होने के बाद भी वह बची रहे। अर्थात अन्न इतना हो कि घर के सदस्यों के सहित अतिथि आए तो वह भी खाले। धन इतना हो कि आवश्यकताओं की पूर्ति के बावजूद वह बचा रहे। आओ हम जानते हैं कि बरकत बनी रहे या अन्नपूर्णा की कृपा बनी रहने के लिए कौन सी 8 सावधानियां अपनाएं।
 
 
1.भोजन के नियम : भोजन करने के बाद थाली में ही हाथ न थोएं। थाली में कभी जूठन न छोड़े। भोजन करने के बाद थाली को कभी, किचन स्टेन, पलंग या टेबल के नीचे न रखें। उपर भी न रखें। रात्रि में भोजन के जूठे बर्तन घर में न रखें। रात में चावल, दही और सत्तू का सेवन करने से लक्ष्मी का निरादर होता है।
 
 
2. दान दें : प्रकृति का यह नियम है कि आप जितना देते हैं वह उसे दोगुना करके लौटा देती है। गरीब, जरूतमंद, पशु, पक्षी, अपंग, महिला, विद्यार्थी, संन्यासी, चिकित्सक और धर्म के रक्षक आदि को अन्न जल दें। इसे अतिथि यज्ञ कहते हैं, जिससे अन्य धन की प्रचूरता बनी रहती है। कर मदद तो मिलेगी मदद।
 
 
3. अग्निहोत्र कर्म करें : जिस तरह हम जरूतमंदों को अन्न जल देते है उसी तरह हमने जिस अग्नि और जल के माध्यम से यह अन्य बनाया है तो उसे भी अर्पित करें। इसे अग्निहोत्र कर्म कहते हैं। अग्निहोत्र कर्म दो तरह से होता है पहला यह कि हम जब भी भोजन खाएं उससे पहले उसे अग्नि को अर्पित करें। दूसरा तरीका है यज्ञ की वेदी बनाकर हवन किया जाता है।
 
 
4.टपकता नल ठीक करवाएं : नल से पानी का टपकना आर्थिक क्षति का संकेत है। टपकते नल को जल्द से जल्द ठीक करवाएं। घर में किसी भी बर्तन से पानी रिस रहा हो तो उसे भी ठीक करवाएं। छत पर रखी पानी की टंकी से पानी बहता हो तो उसे भी ठीक करवाएं।
 
 
5. क्रोध-कलह से बचें : घर में क्रोध, कलह और रोना-धोना आर्थिक समृद्धि व ऐश्वर्य का नाश कर देता है। इसलिए घर में कलह-क्लेश पैदा न होने दें। आपस में प्रेम और प्यार बनाएं रखने के लिए एक दूसरे की भावनाओं को समझें और परिवार के लोगों को सुनने और समझने की क्षमता बढ़ाएं। अपने विचारों के अनुसार घर चलाने का प्रयास न करें। सभी के विचारों का सम्मान करें। घर की स्त्री का सम्मान करें।
 
 
6. घर की सफाई : कभी भी ब्रह्ममुहूर्त या संध्याकाल को झाड़ू नहीं लगाना चाहिए। झाड़ूं को ऐसी जगह रखें जहां किसी अतिथि की नजर न पहुंचे। झाड़ू को पलंग के नीचे न रखें। घर को साफ सुधरा और सुंदर बनाकर रखें। घर के चारों कोने साफ हों, खासकर ईशान, उत्तर और वायव कोण को हमेशा खाली और साफ रखें।
 
 
दांतों को अच्छे से साफ और चमकदार बनाएं रखें। बार-बार थूकने, झींकने या खासने की आदत को बदले।घर में हर कही गंदगी फैलाने का कार्य न करें। नाखून और बाल बढ़ा कर न रखें। प्रतिदिन शरीर के सभी छीद्रों को तीन वक्त जल से छोएं। सुबह, शाम और रात्रि।
 
 
सप्ताह में एक बार (गुरुवार को छोड़कर) समुद्री नमक से पोंछा लगाने से घर में शांति रहती है। घर की सारी नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होकर घर में झगड़े भी नहीं होते हैं तथा लक्ष्मी का वास स्थायी रहता है। घर में या वॉशरूप में कहीं भी मकड़ी का जाला न बनने दें। घर में कहीं भी कचरा या अटाला जमान न होने दें। छपर पर बांस न रखें और किसी भी प्रकार की अनुपयोगी वस्तुएं भी न रखें।
 
 
घर की वस्तुओं को वास्तु अनुसार रखकर प्रतिदिन घर को साफ और स्वच्छ कर प्रतिदिन देहरी पूजा करें। घर के बाहर  देली (देहली या डेल) के आसपास स्वस्तिक बनाएं और कुमकुम-हल्दी डालकर उसकी दीपक से आरती उतारें। इसी के साथ ही प्रतिदिन सुबह और शाम को कर्पूर भी जलाएं और घर के वातावरण को सुगंधित बनाएं।

 
7. इन कर्मों से बचें : कहते हैं कि जहां मदिरा सेवन, स्त्री अपमान, तामसिक भोजन और अनैतिक कृत्यों को महत्व दिया जाता है उनका धन दवाखाने, जेलखाने और पागलखाने में ही खर्च होता रहता है। झूठ बोलते रहने से बरकत जाती रहती है। दक्षिण दिशा में पैर करके न सोएं इसे शहर कमजोर होगा। 

 
8. संधिकाल में मौन रहें : संधिकाल में अनिष्ट शक्तियां प्रबल होने के कारण इस काल में निम्नलिखित बातें निषिद्ध बताई गई हैं- सोना, खाना, पीना, गालियां देना, झगड़े करना, अभद्र एवं असत्य बोलना, क्रोध करना, शाप देना, यात्रा के लिए निकलना, शपथ लेना, धन लेना या देना, रोना, वेद मंत्रों का पाठ, शुभ कार्य करना, चौखट पर खड़े होना।

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