Publish Date: Mon, 27 Apr 2026 (12:40 IST)
Updated Date: Mon, 27 Apr 2026 (17:03 IST)
Bhaum Pradosh Vrat 2026: हिंदू धर्म में भौम प्रदोष व्रत का विशेष महत्व है। जब त्रयोदशी तिथि मंगलवार के दिन पड़ती है, तो उसे 'भौम प्रदोष' कहा जाता है। यह दिन भगवान शिव और हनुमान जी (मंगल के कारक) दोनों की कृपा पाने का दुर्लभ संयोग होता है। भौम प्रदोष व्रत करने से मंगल और शनि दोष शांत होते हैं। इससे व्यक्ति के व्यापार में लाभ, नौकरी में समान्य उन्नति, और कार्यस्थल पर सम्मान और प्रतिष्ठा बढ़ती है।
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शास्त्रों और मान्यताओं के अनुसार, इस व्रत को करने से मुख्य रूप से निम्नलिखित 3 कार्यों में अभूतपूर्व सफलता मिलती है:
1. कर्ज मुक्ति और आर्थिक स्थिरता
भौम प्रदोष का सबसे बड़ा लाभ ऋण (कर्ज) से छुटकारा पाना है। मंगल ग्रह को ऋणहर्ता भी माना जाता है। यदि आप लंबे समय से कर्ज के बोझ तले दबे हैं या व्यापार में आर्थिक तंगी का सामना कर रहे हैं, तो यह व्रत आपके मार्ग खोलता है।
विशेष: इस दिन 'ऋणमोचक मंगल स्तोत्र' का पाठ करना अत्यंत फलदायी होता है।
2. भूमि, भवन और संपत्ति के मामले
मंगल देव को 'भूमिपुत्र' कहा जाता है। जमीन-जायदाद से जुड़े कार्यों में आ रही बाधाओं को दूर करने के लिए यह व्रत अचूक है। यदि आपका मकान नहीं बन पा रहा है, जमीन की खरीद-बिक्री में दिक्कत आ रही है या कोई कानूनी संपत्ति विवाद चल रहा है, तो शिव जी की कृपा से इन कार्यों में विजय प्राप्त होती है।
3. आरोग्य और साहस में वृद्धि
मंगल साहस, ऊर्जा और रक्त का कारक है। भौम प्रदोष व्रत रखने से शारीरिक और मानसिक शक्ति में वृद्धि होती है। जो लोग पुरानी, विशेषकर रक्त संबंधी बीमारियों से जूझ रहे हैं या जिनमें आत्मविश्वास की कमी है, उन्हें इस व्रत से आरोग्य और रोगों से लड़ने की शक्ति मिलती है। यह शत्रुओं पर विजय पाने के लिए भी उत्तम माना जाता है।
पूजा के लिए विशेष मंत्र
इस दिन पूजा के समय इन मंत्रों का जाप करना आपके कार्यों को और गति प्रदान कर सकता है:
- भगवान शिव के लिए: ॐ नमः शिवाय
- मंगल देव के लिए: ॐ अं अंगारकाय नमः
नोट: प्रदोष व्रत की पूजा हमेशा 'प्रदोष काल' (सूर्यास्त से लगभग 45 मिनट पहले और 45 मिनट बाद का समय) में करना सबसे श्रेष्ठ माना जाता है।
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