Hanuman Chalisa

Select Your Language

Notifications

webdunia
webdunia
webdunia
webdunia

वृषभ संक्रांति 2026 कब है? जानिए पुण्यकाल, महत्व और क्या करें

Advertiesment
Vrishabha Sankranti 2026 Suryadev
सूर्य के वृषभ राशि में गोचर को वृषभ संक्रांति कहते हैं। 15 मई 2026 शुक्रवार के दिन सुबह 06:28 बजे सूर्य वृषभ राशि में गोचर करेंगे। वृषभ संक्रांति पुण्‍य काल: प्रात: 05:30 से 06:28 के बीच रहेगा। सभी संक्रांतियों के दिन दान, पुण्य और स्नान का महत्व बताया गया है। इसी के साथ ही प्रत्येक संक्रांति का फल भी अलग अलग माना गया है। चलिए जानते हैं इस संक्रांति का क्या है महत्व।
 

वृषभ संक्रांति: एक परिचय

वृषभ संक्रांति वह खगोलीय और धार्मिक अवसर है जब सूर्य देव मेष राशि से निकलकर वृषभ राशि में प्रवेश करते हैं। यह हिंदू सौर कैलेंडर के दूसरे महीने, ज्येष्ठ की शुरुआत का प्रतीक है। 'वृषभ' का अर्थ बैल होता है, जिसे भगवान शिव के वाहन नंदी से जोड़कर देखा जाता है।
 

1. धार्मिक एवं कृषि महत्व

कृषि चक्र: यह समय नई कृषि गतिविधियों और बीज बोने के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है।
नंदी और शिव संबंध: वृषभ भगवान शिव का वाहन है, इसलिए इस दिन प्रकृति और पशु धन (विशेषकर गाय और बैल) के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की जाती है।
सकारात्मक ऊर्जा: सूर्य का यह गोचर जीवन में सकारात्मक बदलाव और नई ऊर्जा का संचार करने वाला माना जाता है।
 

2. पूजा विधि और अनुष्ठान

वृषभ संक्रांति के दिन पुण्य प्राप्ति के लिए निम्नलिखित विधि अपनानी चाहिए:
शुद्धिकरण: सूर्योदय से पूर्व उठकर घर की सफाई करें और पवित्र नदी या जलकुंड में स्नान करें। (घर पर स्नान के पानी में गंगाजल मिला सकते हैं)।
सूर्य अर्घ्य: स्नान के बाद सूर्य देव को जल अर्पित करें। अर्घ्य देते समय इस मंत्र का उच्चारण करें:
एहि सूर्य! सहस्त्रांशो! तेजो राशे! जगत्पते! अनुकम्प्यं मां भक्त्या गृहाणार्घ्य दिवाकर!
विष्णु पूजा: भगवान विष्णु की फल, फूल, धूप-दीप और दूर्वा से पूजा करें। "ॐ नमो भगवते वासुदेवाय" मंत्र का जाप करें।
व्रत एवं उपवास: इस दिन निराहार व्रत रखने का विधान है। शाम को आरती के बाद फलाहार करें और अगले दिन पूजा के बाद व्रत खोलें।
 

3. दान-पुण्य और तर्पण

विशेष दान: इस संक्रांति पर गौ-दान (गाय का दान) करना सर्वश्रेष्ठ माना गया है।
प्याऊ स्थापना: ज्येष्ठ माह की गर्मी को देखते हुए प्यासे को पानी पिलाना या प्याऊ लगवाना यज्ञ के समान पुण्य देता है।
पितृ कार्य: पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए तर्पण और श्राद्ध कर्म करना इस दिन फलदायी होता है।
 

4. ज्योतिषीय तथ्य: 2026 और रोहिणी नक्षत्र

प्रचंड गर्मी (नौतपा): वृषभ संक्रांति के दौरान सूर्य रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करते हैं। इस नक्षत्र के शुरुआती 9 दिनों में अत्यधिक गर्मी पड़ती है।
शुभ समयावधि: 2026 में संक्रांति क्षण से 16 घटी पूर्व का समय दान-पुण्य की गतिविधियों के लिए अत्यंत श्रेष्ठ माना जाएगा। दक्षिण भारत में इसे 'सङ्क्रमणम्' के नाम से मनाया जाएगा।
 

5. वृषभ संक्रांति 2026 का फल (भविष्यवाणी)

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार इस संक्रांति के प्रभाव निम्नलिखित होंगे:
व्यापार: व्यापारियों के लिए यह समय लाभकारी सिद्ध होगा।
अर्थव्यवस्था: वस्तुओं की लागत में वृद्धि हो सकती है (महंगाई बढ़ेगी)।
सामाजिक स्थिति: राष्ट्रों के बीच संबंधों में मधुरता आएगी और आपसी तालमेल बढ़ेगा।
स्वास्थ्य एवं कृषि: जनमानस को स्वास्थ्य लाभ होगा और अनाज के भंडारण में वृद्धि होगी।
चुनौतियां: कुछ क्षेत्रों में व्यक्तिगत तनाव और संघर्ष की स्थितियां बन सकती हैं।
विशेष संदेश: यह पर्व हमें प्रकृति के करीब लाता है और पर्यावरण के सम्मान का संदेश देता है। दान और सेवा इस दिन के मुख्य आधार हैं।
 

Share this Story:

Follow Webdunia Hindi

अगला लेख

10 May Birthday: आपको 10 मई, 2026 के लिए जन्मदिन की बधाई!