रवींद्र व्यास

मुझे लगता है गीतकार स्वानंद किरकिरे के साथ ऐसा ही हुआ है जिन्हें हाल ही में फिल्म 'लगे रहो मुन्नाभाई' के गीत 'बंदे में...
वे डरती नहीं। न बोलने से, न लिखने से। मन का लिखने से न कभी अपने को रोका, न टोका। आत्मकथा लिखी। उसमें अपने मन और शऱीर के छिलके...
ब्लॉग की दुनिया में इतने सारे इलाके हैं कि वहाँ जाकर आप कई तरह के अनुभव हासिल कर सकते हैं, कई तरह के सुख और कई तरह के दुःख...
भाषा की चरम कलात्मकता मुझे छूती है और यही कारण है कि खोखें हुई बोर्खेज से लेकर गैब्रियल गार्सिया मार्खेज, आइजक बाशेविस...
मैं एक औरत के रूप में नाकामयाब हूँ। मेरा आदमी मुझसे बहुत ज्यादा अपेक्षाएँ रखता है। यह इस वजह से है क्योंकि उन्होंने...
हिंदी पत्रकारिता के जाने-माने पत्रकार और स्तंभकार राजकिशोर का ब्लॉग विचारार्थ पढ़ते हुए जो बात सबसे पहले ध्यान खींचती...
नोबेल पुरस्कार से सम्मानित कोलंबिया के महान उपन्यासकार गैब्रियल गार्सिया मार्केज कहते हैं
सीरज सक्सेना युवा चित्रकार औऱ शिल्पकार हैं। हाल ही में उन्होंने अपना ब्लॉग बनाया है, जिस पर उनके कुछ लेख औऱ कविताएँ...
वह जादू ही क्या जो सिर चढ़कर न बोले। फुटबॉल ऐसा ही जादू है और यूरो-2008 में इसे सिर पर चढ़कर बोलता हुआ देखा जा सकता है। यह...
मैं कभी भी स्पेन नहीं गया, डाली को मैंने कभी रूबरू नहीं देखा, फिर भी डाली ने मुझे विद्यार्थी जीवन से ही प्रभावित किया...
ब्लॉग की दुनिया ने अभिव्यक्ति की नई और कई खिड़कियाँ खोल दी हैं। एक तरफ ये खिड़कियाँ हमारा उस संसार से परिचय कराती हैं...
रेडियो से आती ख़बरों, बाहर खेलते बच्चों और बोरियत से बोर होकर खरीददारी करने निकली औरतों, साइबर कैफे में चैट करते लोगों...
समकालीन हिंदी के सबसे चर्चित कथाकार-कवि उदय प्रकाश का ब्लॉग पिछले तीन माह से सूना है। वे कह गए थे कि डे़ढ़ माह बाद लौट...
15 अगस्त ज्यादा दूर नहीं है, और वे नजारे भी दूर नहीं है जब राष्ट्रभक्ति और राष्ट्रप्रेम के नारे लगाते लोग चीखते-चिल्लाते...
राधिकाजी ने अपने ब्लॉग की शुरुआत एक आशंका से शुरू की थी लेकिन जब उन्हें अच्छा प्रतिसाद मिला तो उनका उत्साह बढ़ा। इसीलिए...
यह एक कवि की आवाज थी जिसमें सुबह-सुबह अवसाद तैर रहा था। आज सुबह करीब पौने आठ बजे चंद्रकांत देवतालेजी का फोन आया कि वेणु...
अपनी कोई महीन बात को कहने के लिए गुलजार अक्सर कुदरत का कोई हसीन दृश्य चुनते हैं। कोई दिलकश दृश्य खींचते हैं, बनाते हैं।...
चोरी, चोर और चुराना। किस्सा बहुत पुराना है। और यदि थोड़ा पीछे जाकर गौर करें तो हमारे यहाँ तो चोरी को कला माना गया है।...
ब्लॉग की दुनिया में क्रोध है। विरोध है। संवदेनाएँ हैं, आकांक्षा है। विलाप भी है। प्रतिरोध के स्वर भी हैं। अपने समय की...
मौत बेबात का फसाना है। जिंदगी ही असल कहानी है। मौत को धता बताती। पछाड़ती। लड़कर जीतती। यही सुप्रतिम है। अप्रतिम है।...
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