Publish Date: Fri, 31 Mar 2017 (13:36 IST)
Updated Date: Fri, 31 Mar 2017 (13:42 IST)
- अमिताभ भट्टासाली (कोलकाता)
अकादमी पुरस्कार से सम्मानित बंगाल की कवयित्री मंदाक्रांता सेन को कथित तौर पर फ़ेसबुक पर गैंगरेप की धमकी मिली है। मंदाक्रांता सेन धार्मिक कट्टरता के ख़िलाफ़ लिखती रही हैं। सेन ने कोलकाता पुलिस की साइबर अपराध शाखा में एफ़आईआर दर्ज कराई है। उन्होंने पुलिस से खुद की सुरक्षा की भी गुहार लगाई है। पुलिस ने जल्द से जल्द जांच का आश्वासन दिया है।
मंदाक्रांता सेन ने बीबीसी से कहा, "फ़ेसबुक पर एक व्यक्ति जिसका नाम राजा दास है, उसने फ़ेसबुक पर धमकी दी है कि मेरा गैंगरेप होना चाहिए।" उन्होंने कहा, "राजा दास ने जिस भाषा का इस्तेमाल किया है उसे छापा नहीं जा सकता लेकिन उसने अपनी टिप्पणी में कहा है कि मंदाक्रांता सेन जैसी महिलाएं देश चला रही हैं और इसलिए उनकी गैंगरेप होना चाहिए।"
उन्होंने आगे कहा, "मामला सिर्फ़ धमकी पर ही ख़त्म नहीं हुआ। एक विशेष वर्ग भी मेरे और कवि श्रीजीतो बंदोपाध्याय के लिए इसी तरह की घटिया भाषा का इस्तेमाल कर रहा है।" मंदाक्रांता सेन ने अपने फ़ेसबुक पन्ने पर राजा दास का नाम लिखा है और कहा है कि उन्हें सामूहिक बलात्कार की धमकी दी गई है।
श्रीजीतो बंदोपाध्याय को भी उस समय से हिंदू कट्टरपंथियों की धमकियों का सामना करना पड़ रहा है जबसे उन्होंने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में योगी आदित्यनाथ के शपथ लेने पर एक कविता लिखी थी। इस मामले में उत्तरी बंगाल के बीस साल के एक छात्र ने शिकायत दर्ज कराई है।
श्रीजीतो के ख़िलाफ़ पुलिस में दर्ज शिकायत में कहा गया है कवि ने कुछ विशेष शब्दों का इस्तेमाल किया है जिससे शिकायतकर्ता के धार्मिक भावनाओं के ठेस पहुंची है। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बैनर्जी ने श्रीजीतो को निश्चिंत रहने का भरोसा दिलाया है।
पहले श्रीजीतो और मंदाक्रांता सेन को हिंदू कट्टरपंथियों के अपशब्दों का सामना करना पड़ रहा है। मंदाक्रांता सेन ने बीबीसी से कहा, "पश्चिम बंगाल में धार्मिक असहिष्णुता कभी नहीं थी। लेकिन एक विशेष राजनीतिक उद्देश्य के लिए इस तरह का माहौल बनाया जा रहा है। हमारे जैसे लोगों को निशाना बनाया जा रहा है, जो कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के साथ-साथ धार्मिक कट्टरवाद के ख़िलाफ़ बोलते हैं।"
महिलाओं के मुद्दों पर काम करने वाली शावस्ती घोष पूछती हैं, "जब एक महिला या लड़की विरोध करती है तो उसकी पूरी रचनात्मकता को शारीरिक स्तर पर ले आया जाता है और शारीरिक तौर पर अपमानित किया जाता है। उसका दंड तब तक पूरा नहीं होता जब तक उसकी गैंगरेप नहीं होता।"
शावस्ती कहती हैं कि ये पहली बार नहीं है जब धार्मिक कट्टरपंथियों ने किसी लेखक या कवि को धमकी दी हो, "ये शहर इस बात का गवाह रहा है कि किस तरह से मुस्लिम कट्टरपंथियों ने तस्लीमा नसरीन को धमकियां दी और शहर छोड़ने पर मजबूर किया।"
सामाजिक कार्यकर्ता इमामुल हक कहते हैं, "सोशल मीडिया के रूप में हमारे पास एक नया माध्यम है। लेकिन अब तक हमने इसका इस्तेमाल करना नहीं सीखा। किसी को भी, किसी भी समय गाली देना सोशल मीडिया पर आम हो चला है।"
वो कहते हैं, "कभी श्रीजीतो तो कभी मंदाक्रांता, कभी ममता बैनर्जी या फिर पैगंबर। कोई भी जिसे जो जी में आता है लिख देता है।" हालांकि मंदाक्रांता गैंगरेप की धमकी से डरी नहीं हैं। उन्होंने एक और कविता लिखी है जिसमें उन्होंने अपशब्दों का इस्तेमाल करने वाले और कट्टरपथियों को चुनौती दी हैं।