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स्मृति इरानी के हारने की वजह क्या बता रही है अमेठी की जनता?

हमें फॉलो करें स्मृति इरानी के हारने की वजह क्या बता रही है अमेठी की जनता?

BBC Hindi

, रविवार, 9 जून 2024 (09:21 IST)
अनुभव स्वरूप यादव, अमेठी से बीबीसी हिंदी के लिए
लोकसभा चुनाव को लेकर सबसे चौंकाने वाले परिणाम उत्तर प्रदेश के रहे। इंडिया गठबंधन ने सारे अनुमान और एग्ज़िट पोल को ग़लत साबित करते हुए बीजेपी के अकेले पूर्ण बहुमत हासिल करने की राह में रोड़ा डाल दिया है।
 
वैसे तो उत्तर प्रदेश की कई सीटों पर एनडीए और इंडिया गठबंधन के प्रत्याशी के बीच रोचक चुनाव देखने को मिला है लेकिन इस बार राज्य में एक सीट ऐसी थी जिस पर चुनाव शुरू होने से लेकर परिणाम आने तक सभी की नज़रें टिकी हुई थीं और यह अमेठी की सीट थी।
 
जहां कांग्रेस के किशोरी लाल शर्मा ने बीजेपी सरकार में केंद्रीय मंत्री स्मृति इरानी को एक लाख 66 हज़ार से ज़्यादा मतों से हराया।
 
किशोरी लाल शर्मा इतने अधिक मतों से जीतेंगे, इसकी उम्मीद भी किसी को नहीं थी। स्मृति इरानी को अमेठी की सभी पांच विधानसभा सीटों पर हार का सामना करना पड़ा।
 
अपने-अपने विधानसभा में दबदबा रखने वाले बीजेपी विधायक और मंत्री अपनी विधानसभा में स्मृति ईरानी को जीत नहीं दिलवा सके।
 
यहां तक कि बीजेपी के लिए प्रचार करने वाले सपा के बाग़ी विधायक राकेश प्रताप सिंह और महाराजी देवी के विधानसभा क्षेत्र से भी बीजेपी को करारी हार का सामना करना पड़ा।
 
तिलोई विधायक और प्रदेश के स्वास्थ्य राज्यमंत्री मयंकेश्वर शरण सिंह की विधानसभा में बीजेपी 18,818 वोटों से पराजित हुई। बीजेपी विधायक अशोक कोरी के सलोन विधानसभा में भी बीजेपी को सबसे बड़ी हार 52,318 वोटों से मिली।
 
जगदीशपुर विधानसभा में मौजूदा बीजेपी विधायक सुरेश पासी भी कोई कमाल नहीं कर सके और इस विधानसभा में स्मृति इरानी को 15,425 वोटों से मात खानी पड़ी।
 
गौरीगंज विधानसभा में सपा विधायक राकेश प्रताप सिंह का जादू नहीं चला और यहां स्मृति इरानी की 30,318 वोटों से हार का सामना करना पड़ा। जबकि सपा विधायक महाराजी देवी के अमेठी में स्मृति को 46,689 वोटों से बड़ी हार का सामना करना पड़ा।
 
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किशोरी लाल शर्मा का भरोसा
दरअसल, इंडिया गठबंधन ने किशोरी लाल शर्मा को चुनाव जितवाने के लिए पूरी ताक़त लगा दी थी। प्रियंका गांधी ने ना केवल रायबरेली में बड़े भाई राहुल गांधी के लिए पूरी मेहनत की बल्कि अमेठी में किशोरी लाल शर्मा के लिए भी उतनी मेहनत के साथ काम किया।
 
वहीं दूसरी ओर स्मृति इरानी के प्रति जनता की नाराज़गी ने भी किशोरी लाल शर्मा के लिए जीत की राह आसान कर दी। स्मृति इरानी ने 2019 में जब राहुल गांधी को हराया था, उसके बाद से राहुल गांधी का अमेठी आना बंद हो गया था।
 
ऐसे में राजनीतिक विश्लेषकों के बीच ऐसी चर्चा भी होने लगी थी कि गांधी परिवार ने सीट को हमेशा के लिए छोड़ दिया है।
 
2024 चुनाव की अधिसूचना जारी होने के बाद इस सीट से कांग्रेस का उम्मीदवार कौन होगा, इसको लेकर चर्चाओं का दौर फिर से शुरू हुआ। नामांकन के अंतिम दिन तक सस्पेंस बनाए रखने के बाद तीन मई की सुबह इंडिया गठबंधन ने अमेठी से किशोरी लाल शर्मा को कांग्रेस का प्रत्याशी बनाया।
 
किशोरी लाल शर्मा रायबरेली में सोनिया गांधी और अमेठी में राहुल गांधी के सांसद प्रतिनिधि के रूप में काम कर चुके थे, लेकिन पार्टी उन्हें अमेठी से चुनाव मैदान में उतार देगी, इसका अंदाज़ा किसी को नहीं था।
 
हालांकि इस फ़ैसले पर भी तमाम सवाल उठे कि राहुल गांधी ने एक तरह से मैदान छोड़ दिया है। पहले यह उम्मीद की जा रही थी कि अगर राहुल गांधी यहां से चुनाव मैदान में होंगे तो पिछली हार को देखते हुए सारा दबाव उन पर होगा और स्मृति इरानी को चुनाव लड़ने में आसानी होगी लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
 
किशोरी लाल के आने के बाद सारा दबाव स्मृति इरानी पर हो गया। वहीं दूसरी ओर अमेठी की जनता में मोदी सरकार में मंत्री स्मृति इरानी को लेकर ख़ासी नाराज़गी भी थी।
 
अमेठी के वरिष्ठ पत्रकार हम्माद सिद्दीक़ी बताते हैं, "जनता में स्मृति इरानी के व्यवहार को लेकर रोष था। स्मृति इरानी केंद्र सरकार में मंत्री थीं लेकिन उन्होंने पिछले पांच सालों में विकास का कोई ठोस काम नहीं किया। इसके साथ-साथ महंगाई और बेरोज़गारी को लेकर भी जनता ने इस बार स्मृति का साथ नहीं दिया।"
 
अमेठी की जनता क्या बोली
वहीं गौरीगंज क्षेत्र के निवासी कर्म प्रसाद द्विवेदी ने दावा किया कि स्मृति इरानी ने कोई काम नहीं किया।
 
उन्होंने बताया, 'जनता को इनसे बड़ी उम्मीद थी कि ये मंत्री हैं क्षेत्र में बहुत काम होगा लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ। स्मृति इरानी की हार का एक कारण यह भी है कि प्रधानमंत्री ने जिस तरह से भैंस और मंगलसूत्र जैसे बयान दिए उससे जनता में नाखुशी हुई। पिछली बार राहुल गांधी हार गए इसको लेकर जनता खुद दुखी थी और किशोरी लाल शर्मा को क्षेत्र की जनता अच्छे से जानती है इसलिए उनकी जीत हुई।'
 
वहीं गंगा शंकर मिश्र ने कहा, 'जो परिणाम आया है वो पहले से तय था कि यहाँ से कांग्रेस को ही जीतना है चूंकि पिछली बार राहुल गांधी चुनाव हार गए थे इसलिए इस बार जनता ने कर्ज़ चुकाने के लिए किशोरी लाल शर्मा को चुनाव जितवाया है। स्मृति इरानी और उनके स्थानीय प्रतिनिधि की कार्यशैली से लोगों को नाराज़गी थी इसलिए भी उनकी हार हुई।'
 
अमेठी के एक युवा ने कहा, 'मेरा नाम अमेठीयन है क्योंकि हम अमेठी के निवासी हैं यही हमारी पहचान है।' इस युवा ने कहा, 'अमेठी ने अपने सम्मान को वापस लिया है। 2019 में राहुल गांधी की हार के बाद से अमेठी की जनता क्षुब्ध थी। लोगों को एहसास हुआ कि उसने बहकावे में आकर हीरा खो कर प्लास्टिक की तरफ़ हाथ बढ़ा दिया था।'
 
एक अन्य युवक अब्दुल मजीद ने कहा, 'जायस क़स्बे में एक महिला अस्पताल है जो कि बंद पड़ा है लेकिन कोई पूछने नहीं आया। क्षेत्र में महिलाओं के इलाज के लिए बड़ी समस्या है लेकिन स्मृति इरानी ने सांसद रहते हुए इसको लेकर कुछ नहीं किया।'
 
महंगाई और आवारा पशु भी थे मुद्दा
स्मृति इरानी की हार पर बात करते हुए अमेठी की महिला बिट्टन ने कहा कि महंगाई और 'छुट्टा जानवरों' को लेकर किसान परेशान हैं इसलिए लोगों ने बीजेपी को वोट नहीं दिया। वहीं रीता ने कहा, 'छुट्टा जानवर, महंगाई और बेरोज़गारी के कारण जनता ने बीजेपी को वोट नहीं दिया। महंगाई कम होनी चाहिए और लोगों को रोज़गार चाहिए।'
 
स्थानीय निवासी संजय कुमार शर्मा इलाके में आवारा पशुओं की समस्या को रेखांकित करते हुए कहते हैं, 'किसान छुट्टा जानवरों से परेशान है। सरकार पांच किलो राशन देती है लेकिन पांच बीघा फसल जानवर खा जाते हैं। पहले जिन खेतों में पांच क्विंटल राशन होता था अब उसमे एक भी क्विंटल नहीं होता है अगर किसान रातभर खेत ताकेगा तो दिन में काम कैसे कर पाएगा। इसीलिए जनता ने बीजेपी को नकार दिया है।'
 
वहीं एक महिला खुशबू ने बताया कि, 'अमेठी को राहुल गांधी की सरकार में ज़्यादा सुविधाएं मिलती थीं, इसलिए लोगों ने कांग्रेस को वोट किया।'
 
'जनता से कनेक्ट नहीं था'
एमबीए के छात्र सनत कुमार मिश्र स्मृति इरानी की हार की वजहों को गिनाते हैं, 'उन्होंने जनता से कनेक्ट नहीं किया। जब भी दौरे पर आती थीं वो जनता से नहीं मिलती थीं। कुछ चंद लोगों से घिरी रहती थीं। बीते पांच सालों में राहुल गांधी की आलोचना के सिवा उन्होंने कोई काम नहीं किया था।'
 
'आप ये भी देखिए कि इस बार यहां चुनाव जनता ने लड़ा क्योंकि यहां जो कुछ भी है कांग्रेस का दिया हुआ है। एचएल, बीएचएल, फूड पार्क और पेपर मिल ये सभी कांग्रेस की देन है। राहुल गांधी की हार के बाद से ऐसा लग रहा था जैसे अमेठी उजड़ गया है।'
 
एक अन्य निवासी संजय बाबा ने कहा, 'जायस से अमेठी जाने के लिए आज भी बस की सुविधा नहीं है। हमारे यहां की आठ पैसेंजर ट्रेन बंद है इसको लेकर कई बार शिकायत की गई लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।'
 
किशोरी लाल शर्मा को जीत दिलवाने में समाजवादी पार्टी का भी योगदान रहा है। किशोरी लाल शर्मा के पक्ष में माहौल बनाने के लिए अखिलेश यादव और राहुल गांधी ने अमेठी में संयुक्त रैली की थी।
 
अमेठी से समाजवादी पार्टी के कोषाध्यक्ष जैनुल हसन ने कहा, 'स्मृति इरानी का कोई भी काम धरातल पर नहीं दिखा और पिछले पांच सालों में सिर्फ़ अमेठी की ही नहीं बल्कि पूरे प्रदेश की जनता भारतीय जनता पार्टी से ऊब चुकी थी। जनता ने बहकावे में आकर 2019 में भाजपा को वोट दे दिया था।'
 
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और किशोरी लाल शर्मा के इलेक्शन एजेंट सुरेश प्रताप सिंह किशोरी लाल शर्मा की जीत के कई कारण बताते हैं। उन्होंने कहा, 'सबसे बड़ी वजह तो यही है कि क्षेत्र के हर गांव में कुछ ना कुछ लोग ऐसे हैं जो किशोरी लाल शर्मा जी से सीधे जुड़े हुए हैं। वह पिछले 40 सालों में राजीव गांधी, सोनिया गांधी और राहुल गांधी के साथ काम कर चुके हैं। इसके अलावा अमेठी की जनता ने 2019 में हुई ग़लती को सुधारने का काम किया है।'
 
स्मृति इरानी के समय कौन से काम हुए?
वहीं दूसरी ओर स्मृति इरानी की हार के बाद से ही अमेठी के बीजेपी कार्यालय में सन्नाटा पसरा हुआ है। कार्यालय में कोई भी पदाधिकारी मौजूद नहीं थे।
 
अमेठी क्षेत्र में बीजेपी के महामंत्री सुधांशु ने बताया कि 'दीदी ने अमेठी में बहुत विकास करवाया इतना काम तो 70 वर्षो में नहीं हुआ था।'
 
कामों को गिनवाते हुए वो कहते हैं कि स्मृति ईरानी ने अमेठी शहर में जाम की समस्या को ख़त्म करने के लिए 4 किलोमीटर का बायपास बनवाया, अमेठी के दक्षिणी हिस्से में रेलवे का ओवर ब्रिज बनवाया जिससे क्षेत्र के लगभग 50 हज़ार लोगों को जाम से निजात मिली है, केंद्रीय विद्यालय की बिल्डिंग बनवाई, कृषि विज्ञान केंद्र बनवाया, मृदा परिक्षण केंद्र बनवाया, अमेठी लोकसभा क्षेत्र के रेलवे स्टेशनों का विस्तार और सौंदर्यीकरण करवाया।
 
एफ़एम सेंटर की स्थापना हुई, सैनिक स्कूल बनवाया, 50 बेड आयुष हॉस्पिटल बनवाया, तिलोई क्षेत्र में 200 बेड का रेफ़रल अस्पताल का निर्माण करवाया। जगदीशपुर में ट्रामा सेंटर का निर्माण करवाया, गोमती नदी पर पीपे के कई पुलों का निर्माण करवाया, खारे पानी की समस्या से ग्रसित निगोहाँ क्षेत्र में पानी की टंकी का निर्माण करवाया। क्षेत्र के मंदिरों का सौंदर्यीकरण करवाया।
 
वो कहते हैं कि दीदी लगातार जनता के बीच में रही हैं और जनता की समस्याओं का निस्तारण किया, जितना काम आज़ादी के बाद कभी नहीं हुआ उससे ज़्यादा काम पिछले 10 वर्षों में हुआ। खासकर 2019 से 2024 के बीच में दीदी ने सांसद रहते हुए बहुत विकास करवाया है, अब हार क्यों हुई इस पर चिंतन किया जाएगा और हार के कारणों को तालाशा जाएगा।
 
स्मृति इरानी ने सोशल प्लेटफॉर्म एक्स पर हार के बाद लिखा है, यही जीवन है। मैंने एक दशक तक एक गांव से दूसरे गांव तक जाती रही, लोगों के जीवन और उम्मीदों को संवारती रही। सड़क, नाली, खड़ंजा, बायपास और मेडिकल कॉलेज सहित दूसरी चीज़ें बनवाईं। जो लोग जीत और हार में मेरे साथ खड़े रहे, उनकी मैं हमेशा अभारी रहूंगी। स्मृति इरानी ने ये भी कहा कि उनका जोश अभी भी 'हाई' है।

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