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2025 से खतरनाक 2026 और उससे भी खतरनाक रहेगा 2027, जानिए 5 भविष्यवाणी

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Astrological Analysis and Predictions for the Year 2027
वर्ष 2020 में लॉकडाउन, 2021 में करोना की दूसरी लहर से हजारों मौतें और फिर 2022 में रशिया-यूक्रेन के बीच युद्ध। 2023 में 7 अक्टूबर को हमास ने इज़राइल पर हमला किया, कई देशों में हिंसा। वर्ष 2024 में भारत में लोकसभा चुनाव, अमेरिका में चुनाव, जापान में 7.6 तीव्रता का भूकंप, रूस-यूक्रेन और इजराइल-हमास युद्ध और बढ़ गया। वर्ष 2025 में महाकुंभ मेला, ईरान इजराइल युद्ध, पहलमाम आतंकादी हमला, ऑपरेशन सिंदूर, अहमदाबाद प्लेन हादसा आदि हमने देखा। फिर आया वर्ष 2026- मिडिल ईस्ट में युद्ध और रूस-यूक्रेन युद्ध और होर्मुज संकट से पेट्रोल क्राइसिस को देखा, लेकिन ज्योतिष मानते हैं कि वर्ष 2027 एक निर्णायक साल रहेगा- आर या पार।
 

1. संकट में फंसी आम जनता:

पिछले 5-7 सालों में यह हुआ कि दुनिया महामारी से निकली तो महायुद्ध में फंस गई है जिसके चलते संकट घटने की बजाए और बढ़ता ही जा रहा है। इस बीच कई देशों में हिंसा के माध्यम से सत्ता परिवर्तन‍ किया गया और अब हालात ये है कि सभी देशों की समझदार जनता और मध्यम वर्ग में महंगाई और युद्ध को लेकर चिंता बढ़ गई है।
 

2. वैश्‍विक स्तर पर बढ़ेगा तनाव:

इजराइल-हमास और रूस-यूक्रेन संघर्ष के बीच, विशेषज्ञों का मानना है कि 2026-27 तक यह तनाव बड़े देशों (जैसे अमेरिका और चीन) के बीच सीधे टकराव में बदल सकता है। ज्योतिषीय गणनाओं (शनि, मंगल और राहु के गोचर) के अनुसार, 2026 के अंत तक दुनिया के कई बड़े देशों के नेतृत्व में अचानक और हिंसक बदलाव हो सकते हैं। कुछ रिपोर्ट्स में 2027 में एक नई 'रहस्यमयी बीमारी' या 'लैब-जनित वायरस' के फैलने की आशंका भी जताई गई है, जो कोरोना की तुलना में अधिक घातक साबित हो सकती है।
 

3. पांच ग्रहणों का संयोग: 

  1. 6 फरवरी 2027- वलयाकार सूर्य ग्रहण
  2. 21 फरवरी 2027- उपछाया चंद्र ग्रहण 
  3. 18 जुलाई 2027- उपछाया चंद्र ग्रहण
  4. 0 2 अगस्त 2027- पूर्ण सूर्य ग्रहण
  5. 17 अगस्त 2027- उपछाया चंद्र ग्रहण
मान्यता: ऐसा कहा गया है कि 5 या उससे अधिक ग्रहण का एक ही वर्ष में होना अशुभ होने का संकेत है।
 
21वीं सदी का सबसे लंबा पूर्ण सूर्यग्रहण 2 अगस्त, 2027 को घटित होगा। यह पूर्ण सूर्य ग्रहण होगा। इस दौरान दोपहर के समय ही आसमान में अंधेरा छा जाएगा। कहा जा रहा है कि हाल के इतिहास में ऐसा पूर्ण सूर्य ग्रहण कभी नहीं देखा गया और अब इसके बाद 100 वर्ष के बाद ऐसा सूर्य ग्रहण होगा। यह दुर्लभ खगोलीय घटना कुछ क्षेत्रों में 6 मिनट और 23 सेकंड तक चलेगी- यह अवधि इसे 1991 और 2114 के बीच भूमि से दिखाई देने वाला सबसे लंबा ग्रहण बनाती है।
 

4. कुंभ मेले का संयोग:

प्रयागराज महाकुंभ के बाद अगला कुंभ मेला वर्ष 2027 में महाराष्ट्र राज्य त्र्यंबकेश्वर में यानी नासिक से लगभग 38 किमी दूर इस सिंहस्थ कुंभ मेले का आयोजन होगा। माना जा रहा है कि नासिक में लगने वाला अगला कुंभ मेला 17 जुलाई से 17 अगस्त 2027 तक जारी रहेगा। जो कि 32 दिनों तक चलने वाला है। 
मान्यता: ऐसा देखा गया है कि कुंभ मेले के दौरान या आसपास युद्ध, भूकंप और बड़ी प्राकृतिक आपदा या कोई बड़े हादसे की संभावना प्रबल रहती है।
 

5. शनि गोचर का प्रभाव: विनाश से नव-निर्माण तक (2020-2028)

मकर व कुंभ शनि (2020-2024): शनि के मकर राशि में प्रवेश ने कोरोना महामारी जैसी वैश्विक त्रासदी दी। इसके बाद कुंभ राशि में गोचर से रूस-यूक्रेन युद्ध, इजराइल-हमास संघर्ष और भीषण प्राकृतिक आपदाओं का सिलसिला शुरू हुआ, जिसने दुनिया की स्थिरता को हिला दिया।
 
मीन शनि (2025): 29 मार्च को मीन राशि में शनि का संचरण भारत-पाकिस्तान और ईरान-इजराइल के बीच तनाव को युद्ध में बदल सकता है। इस दौरान विमान हादसा भी देखा गया। 
 
मेष शनि (2027): वर्ष 2027 में शनि: वर्ष 2027 में 3 जून को शनि मेष राशि में गोचर करके वक्री होकर पुन: 20 अक्टूबर को मीन राशि में लौट आएंगे। इस बीच भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव चरम पर रहने की प्रबल संभावना है। भविष्यवाणियों के अनुसार, इस काल में भारत एक बड़े युद्ध में शामिल हो सकता है, जहाँ उसकी सैन्य शक्ति अजेय रहेगी और वैश्विक प्रतिष्ठा में भारी वृद्धि होगी।
 
वर्ष 2028 में शनि: फिर 23 फरवरी 2028, बुधवार को शनि ग्रह पुन: मेष राशि में लौटकर फिर पूरे वर्ष यहीं पर रहेंगे। यह वर्ष बहुत ही खतरनाक रहने वाला है। 
 
वर्ष 2029 में शनि: फिर 8 अगस्त 2029 में शनिदेव मेष से निकलकर वृषभ राशि में गोचर करेंगे और इसके बाद 5 अक्टूबर 2029 को पुन: मेष राशि में लौट आएंगे यहां पर वे 17 अप्रैल 2030 तक रहेंगे। इसके बाद एक नए युग का प्रारंभ होगा।
 

6. पांच संभावित 5 भविष्‍यवाणियां:-

1. बड़ी आतंकी घटना के बाद भारत और पाकिस्तान का युद्ध होने की प्रबल संभावना।
2. भारत में किसी बड़े भूकंप के कारण तबाही के संकेत।
3. भारत के किसी बड़े नेता का अचानक से निधन।
4. भारत को अस्थिर करने के लिए होगा बड़ा आंदोलन।
5. पूर्वोत्तर राज्य सहित बंगाल में दंगा या हिंसा को रोकने के लिए बड़े फैसले लिए जाएंगे।

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