हेमा मालिनी की जिंदगी की बेहद रोचक दास्तान पढ़कर आप भी चौंक पड़ेंगे...

27 मई 2020 के दिन देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू को दुनिया से गुजरे 56 बरस हो गए... नेहरू का ख्यात बॉलीवुड की 'ड्रीमगर्ल' हेमा मालिनी की जिंदगी में एक खास मुकाम है, जो वे कभी नहीं भूल सकती। हेमा मालिनी की जिंदगी खुली किताब की तरह है...इस किताब की रोचक दास्तान पढ़कर आप भी चौंक पड़ेंगे...
 
दरअसल हेमा मालिनी फिल्मों में कभी आना ही नहीं चाहती थीं। 9 बरस की उम्र में उन्होंने दिल्ली में एक कार्यक्रम में भरत नाट्यम की प्र‍स्तुति दी। इस कार्यक्रम में अतिथि के रूप में प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू और राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद मौजूद थे। इन दोनों ने हेमा मालिनी की खूब तारीफ की।
 
जयललिता के कारण फिल्म से हुई बाहर : हेमा को तो भरत नाट्‍यम का जुनून था। वह अपने कार्यक्रमों के जरिए शोहरत हासिल कर रही थी। जब वो 16 साल की हुईं, तब एक तमिल प्रोड्‍यूसर ने अपनी फिल्म में अभिनय करने का प्रस्ताव दिया। चूंकि हेमा मालिनी चक्रवर्ती परिवार से थी और परिवार फिल्मों में जाने या काम करने से खुश नहीं हुआ। फिल्म की शूटिंग हुई और मां हमेशा साथ रहीं लेकिन 3 दिन के बाद उस तमिल प्रोड्‍यूसर ने हेमा को फिल्म से बाहर कर दिया। उस फिल्म की नायिका थी- जयललिता, जो बाद में तमिलनाडु की मुख्यमंत्री बनीं।
 
सच हुई राज कपूर की भविष्यवाणी : तमिल फिल्म से निकाले जाने से 16 साल की खूबसूरत हेमा का दिल टूट गया लेकिन उन्होंने फैसला किया कि वो अब फिल्मी अदाकारा बनकर ही खुद को साबित करेंगी। फिर वे बॉम्बे (मुंबई) आईं और उन्हें 1968 में पहली फिल्म मिली 'सपनो का सौदागर'। हेमा के हीरो राजकपूर थे जो उम्र के मामले में हेमा से बहुत बड़े थे। राज कपूर ने तभी भविष्यवाणी कर दी थी कि एक दिन यह लड़की सिनेमा की बहुत बड़ी स्टार बनेगी। राज साहब की भविष्यवाणी को हेमा ने सच कर दिखाया।
'सपनो का सौदागर' फिल्म ने हेमा की किस्मत के दरवाजे भी खोल दिए थे। जो भी हेमा को देखता, सोचता उसके बुरे दिन यही लड़की दूर कर सकती है। देवानंद ने जब हेमा को देखा तो उन्हें 1970 में 'जॉनी मेरा नाम' फिल्म के लिए साइन किया। इस फिल्म की सफलता ने हेमा को शीर्ष पर पहुंचा दिया। 
 
हेमा को जब पहली बार धर्मेन्द्र ने देखा : धर्मेन्द्र ने जब हेमा को देखा तो अपने मित्र शशि कपूर को पंजाबी में कहा- 'किन्नी चंगी कुड़ी है।' हेमा को पंजाबी आती है, यह जानकर धर्मेन्द्र शरमा गए, फिर उनके सामने हिम्मत नहीं कर सके लेकिन दिल ही दिल में वे हेमा से मोहब्बत करने लगे थे। धर्मेन्द्र उनके करीब जाने का कोई न कोई बहाना जरूर ढूंढ लेते थे। बाद में हेमा और धर्मेन्द्र की जोड़ी 'सुपर हिट' हो गई। 
हेमा ने शादी का प्रस्ताव ठुकराया : 1972 में फिल्म 'सीता और गीता' की शूटिंग के बीच हेमा और धर्मेन्द्र के बीच दोनों की नजदीकियां बढ़ी। यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर सुपर हिट हुई। तभी धर्मेन्द्र ने हेमा के सामने विवाह का प्रस्ताव रखा, जिसे उन्होंने अस्वीकार कर दिया। हेमा तब, ऐसी स्टार बन चुकीं थी, जिस पर हर स्टार फिदा था। हर बड़ा स्टार उन्हें अपनी हमसफर बनाने का ख्वाब बुन रहा था।
 
संजीव कुमार और जीतेंद्र का दिल टूटा : कुंआरे संजीव कुमार ने अपनी मां को हेमा के घर शादी का प्रस्ताव लेकर भेजा लेकिन हेमा तो धर्मेन्द्र को अपना दिल दे बैंठी थी और फैसला कर लिया था कि 'लाइफ पार्टनर' हो तो धर्मेन्द्र जैसा हो। हेमा की अस्वीकृति के बाद संजीव कुमार इतने निराश हुए कि ताउम्र कुंआरे ही रहे। उधर जीतेंद्र का रोमांस एक एयर होस्टेस से चल रहा था। उन्होंने भी हेमा को शादी का प्रस्ताव दिया, जो अस्वीकार हो गया। 
असल में जब जीतेंद्र का विवाह प्रस्ताव उनके पास आया तो वे काफी कंफ्यूज थीं। वे अपनी गुरु मां के पास गई कि उन्हें क्या करना चाहिए? गुरु मां ने कहा कि अपने दिल की आवाज सुनो। दिल से आवाज आई धर्मेन्द्र से अच्छा जीवन साथी नहीं मिलेगा।
 
बुरे वक्त में धर्मेन्द्र बने मददगार : हेमा की मां जया चक्रवर्ती थोड़ी नरम दिल की थी लेकिन पिता रामानुजम चक्रवर्ती कतई नहीं चाहते थे कि हेमा चार बच्चों के पिता धर्मेन्द्र से शादी करे। 1978 में हेमा के घर में कोई चोर घुस आया था। असल में यह चोर नहीं पाकिस्तान से आया हेमा मालिनी का प्रशंसक था। उसे पकड़ने के लिए हेमा के पिता वीएस रामानुजम चक्रवर्ती सीढ़ियों से गिर पड़े थे और बाद में उनका निधन हो गया। इस बुरे वक्त में धर्मेन्द्र ने उनके परिवार का बहुत खयाल रखा।
'शोले' में धर्मेन्द्र ठाकुर का रोल करने वाले थे : इस बीच फिल्म 'शोले' की कास्ट हुई। फिल्म निर्माता रमेश सिप्पी ने हिरोइन के लिए हेमा को सबसे पहले बसंती के रोल के लिए फाइनल किया। फिर संजीव कुमार को ठाकुर के रोल में। धर्मेन्द्र से बात हुई तो उन्हें लगा कि ठाकुर का रोल ज्यादा प्रभावी है। सिप्पी ने कहा, ठीक है तुम ठाकुर बन जाओ और वीरू का रोल संजीव निभा लेंगे। धर्मेन्द्र ने पूछा- हिरोइन कौन है? सिप्पी का जवाब था- हेमा...तब धर्मेन्द्र वीरू बनने को तैयार हो गए। फिर धर्मेन्द्र ने दोस्ती निभाते हुए अमिताभ बच्चन को जय का रोल दिलवाया।
 
शोले से बढ़ी नजदीकियां : कालजयी फिल्म 'शोले' की शूटिंग दक्षिण भारत के रामलिंगन गांव में हुई और पूरे गांव को एक सेट में बदल दिया गया। साल भर तक चली शूटिंग से धर्मेन्द्र-हेमा और करीब आ गए। धर्मेन्द्र और हेमा की नजदीकियों की खबर धर्मेन्द्र की पत्नी प्रकाश कौर को भी थी क्योंकि जूहू में धर्मेन्द्र के बंगले में और हेमा के बंगले में ज्यादा फासला नहीं था। धर्मेन्द्र दोनों घरों में जाते थे। प्रकाश कौर ने एक साक्षात्कार में कहा था कि मैं अपने पति को जानती हूं, जब मैं कोई मुसीबत में होऊंगी और उन्हें पता चल जाएगा कि मुझे उनकी जरूरत है, वो फौरन मेरे पास चले आएंगे।
शादी के लिए धर्मेन्द्र ने बदला धर्म : धर्मेन्द्र की शादी 19 साल की उम्र में प्रकाश कौर से हुई थी, जिनसे 4 बच्चे हुए। धर्मेन्द्र की बेताबी देखकर उनके पिता किशन लाल हेमा की मां जया चक्रवर्ती के पास गए और उन्हें शादी के लिए राजी किया। चूंकि कानून के अनुसार पहली पत्नी के रहते वे दूसरी शादी नहीं कर सकते थे, लिहाजा उन्होंने इस्लाम धर्म कबूल करते हुए 21 अगस्त 1979 के दिन हेमा से निकाह किया। 
 
नाम रखे दिलावर और आशया बी : निकाहनामे के मुताबिक धर्मेन्द्र का नाम था दिलावर और हेमा का नाम आयशा बी। हेमा और धर्मेन्द्र का यह निकाह हेमा के जुहू वाले बंगले में हुआ, जहां बहुत करीबी दोस्त और धर्मेन्द्र के पिता किशन लाल मौजूद थे। विवाह के बाद बहुत समय तक हेमा सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आईं।

न तो हेमा को धर्मेन्द्र की पत्नी प्रकाश कौर से कोई शिकायत थी और न प्रकाश कौर को हेमा से। बाद में दोनों ने फिल्में भी की। 'रजिया सुल्तान' में दोनों साथ थे लेकिन फिल्म फ्लॉप हुई। हेमा को फिल्म क्रांति में भी मनोज कुमार ने ब्रेक दिया।
 
धर्मेन्द्र ने निभाया पिता का धर्म : हेमा ने 2 नवंबर 1981 के दिन ईशा देओल को जन्म दिया और फिर आहना को। ईशा की शादी में धर्मेन्द्र शामिल हुए और उन्होंने पिता का धर्म निभाया। एक बात आज भी धर्मेन्द्र निभा रहे हैं। वो दोनों परिवारों में संतुलन का। तो इस तरह धर्मेन्द्र और हेमा की प्रेम कहानी रही, जो शादी के मुकाम पर जाकर खत्म हुई। धर्मेन्द्र, राजेश खन्ना, जीतेन्द्र और अमिताभ बच्चन के साथ हेमा मालिनी की जोड़ी को बेहद पसंद किया गया।
मां जया ने भगवान से मांगी थी बेटी : 16 अक्टूबर 1948 में हेमा मालिनी का जन्म जया और रामानुजम चक्रवर्ती के घर हुआ। जब जया चक्रवर्ती के गर्भ में हेमा थी, तब मां ने अपने कमरे में शयनकक्ष में दुर्गा, सरस्वती, लक्ष्मी के अनेक चित्र लगा रखे थे और चाहती थी भगवान उन्हें बेटी ही दे, जो बहुत बहादुर हो। यह वो वक्त था, जब हर मां चाहती थी कि वह पुत्र को ही जन्म दे लेकिन जया को चाहिए थी बेटी। गर्भ में ही उन्होंने बेटी का नाम 'हेमा मालिनी' रखने का फैसला तक कर लिया था।
 
मां के अधूरे सपने को हेमा ने पूरा किया : जया की मां को बेटी इसलिए चाहिए थी ताकि वह उसके जरिए अपने अधूरे सपने को पूरा कर सकें। खुद जया नर्तकी थी लेकिन ख्याति नहीं पा सकीं। उन्होंने फैसला किया था कि बेटी को कुशल नृत्यांगना बनाएंगी और वे अपने मकसद में सफल भी हुई। जिसकी बेटी 9 साल की उम्र में राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के सामने नृत्य प्रस्तुत करे, यह कोई मामूली उपलब्धि नहीं थी। हेमा ने भरतनाट्यम, कुचिपुड़ी और ओडिसी में विधिवत प्रशिक्षण लिया है और देश-विदेश में कई स्टेज शो किए हैं।

हेमा मालिनी का निजी जीवन : हेमा मालिनी 71 वर्ष की उम्र में भी काफी फिट हैं। वे अपनी सुंदरता बनाए रखने के लिए प्रतिदिन योग तथा व्यायाम करती हैं। फिल्म ‘बागबान’ में उनकी ताजगी देखकर अमिताभ बच्चन ने तो यह तक बोल दिया था कि आप अपनी बेटियों से अधिक जवान लगती हैं। हेमा सप्ताह में 2 बार उपवास करती हैं। इनमें से एक दिन शुक्रवार को होता है। उन्हें कांजीवरम साड़ियों के अलावा ज्वेलरी का शौक है। उनकी पसंद में चमेली के गजरे भी होते हैं।
 
अटल जी भी हेमा के मुरीदों में : बॉलीवुड की ड्रीमगर्ल भले ही करोड़ों दिलों पर राज करती हो लेकिन अवॉर्ड उन्हें एक ही फिल्म के लिए मिला। 11 बार फिल्म फेअर अवॉर्ड्स की सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री की श्रेणी में हेमा का नाम हुआ और सिर्फ 1 बार फिल्म 'सीता और गीता' के लिए उन्हें यह पुरस्कार मिला। अटल बिहारी वाजपेयी भी हेमा के बहुत बड़े फैन थे और उन्होंने उनके डबल रोल वाली फिल्म 'सीता और गीता' को कई बार देखा।
राजनैतिक करियर : हेमा मालिनी अटल बिहारी वाजपेयी की बहुत बड़ी प्रशंसक थी। 1999 के लोकभा चुनाव में भाजपा की स्टार प्रचारक रही हेमा मालिनी ने विनोद खन्ना के लिए चुनाव प्रचार किया और उन्हें जीत दिलाई। उन्होंने 2004 में भाजपा की प्राथमिक सदस्यता ग्रहण की। वे 2003 से 2009 तक राज्यसभा के लिए नामित हुई जबकि 2010 में भाजपा ने उन्हें राष्ट्रीय महासचिव बनाया। 2014 और 2019 के लोकसभा चुनाव में वे मथुरा से भाजपा की सांसद हैं। Photo Curtsey: Facebook

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