मेरी इस हरकत को देख दोस्त कहते थे कि मैं पागल हो गई हूं: आलिया भट्ट

वेबदुनिया से बात करते हुए आलिया भट्ट ने बताया कि कैसे उन्हें राजामौली की फिल्म 'आरआरआर' मिली और उनका क्या रोल है। साथ ही माधुरी के साथ डांस और कलंक का बारे में भी बताया।

"मेरे पास ब्रेक लेने का समय नहीं है और मैं ब्रेक लेना भी नहीं चाहती। मैं स्लो डाउन नहीं होना चाहती। मैं सिर्फ काम करते रहना चाहती हूँ। मेरी एक फिल्म के बाद दूसरी फिल्म आ जाती है। इस बीच कभी दो-तीन दिन की छुट्टी मिल जाए तो अलग है। काश की कहीं से अचानक मुझे कोई तीन-चार दिन की छुट्टी दे दे तो मज़ा आ जाए।"
 
पिछले छ: सालों में एक दर्ज़न से ज़्यादा फ़िल्मों में कभी कैमियो तो कभी पूरा का पूरा रोल निभाने वाली आलिया भट्ट टॉप गियर में पहुंच चुकी हैं। उनका करियर ऊफान पर है। उनकी अगली फिल्म 'कलंक' के प्रमोशनल इंटर्व्यूज़ के दौरान वेबदुनिया से बात करते हुए आलिया ने उस पल का ज़िक्र भी किया जब उन्हें माधुरी दीक्षित के सामने गाने के दौरान कथक डांस करना था। 
 
आलिया कहती हैं "मेरे लिए वो डांस करना बहुत मुश्किल था। मेरे बाल सफ़ेद हो गए उस डांस को करने में। मेरे दिमाग में सारे समय वो स्टेप्स छाई रहती थीं। मैं चलते-बैठते स्टेप्स दुहराती रहती। मेरी सहेलियाँ मुझे देख कर कह रही थीं कि मैं पागल हो गई हूँ। लेकिन मैंने भी ठान लिया था कि मैं माधुरीजी से बेहतर नहीं हो सकती तो क्या, मैं अलग तो हो सकती हूँ। जो मैंने आज तक किया है या करती आई हूँ उससे अलग करना होगा। मैंने बहुत मेहनत की है।"

कथक करना आसान नहीं होता। किसने मदद की ये डांस करने में? 
मुझे रेमो ने जो स्टेप्स दिए थे वो मैंने समझे और करीब ढाई महीने तक प्रैक्टिस की। मैं पिछले एक साल से कथक सीख रही हूँ। मैं पंडित बिरजू महाराज जी के पास भी गई थी। उन्होंने मुझे बताया कि आपको सिर्फ एक्ट नहीं करना है या एक्सप्रेस नहीं करना है बल्कि उन एक्सप्रेशन में आपको भोलापन भी लाना होगा। मैं तो उनसे बोली कि ये सब भी होता है। वैसे भी कथक किसी मोनोलॉग की तरह होता है, जहां आपको बहुत सारी बातें सुंदर और सादगी के साथ कहनी होती हैं। मैंने महाराज जी से बहुत कुछ सीखा है। 

'स्टूडेंट्स ऑफ द ईयर' से लेकर 'आरआरआर' तक कई तरह की फ़िल्में की हैं। इतना सब कैसे कर लेती हो? 
जब प्यार किया तो डरना क्या और मैंने फ़िल्मों से प्यार किया है। मैं चार साल की थी तबसे मुझे एक्ट्रेस बनना था। मैं अपने दर्शकों को कह सकती हूँ कि मैं आप सभी से बहुत प्यार करती हूँ, लेकिन इससे क्या होगा? मुझे एक के बाद एक अच्छी और अलग फ़िल्में करती रहनी होंगी तभी तो मेरे दर्शकों का प्यार मुझ तक लौट कर आएगा। 
 
मैं फ़िल्में करना पसंद करती हूं जिसमें मुझे फिल्म मेकिंग प्रोसेस पसंद है। सेट पर होने वाली आवाज़ें और वो माहौल मुझे बहुत पसंद है।  एक बार मैंने फिल्म कर ली और वो रिलीज़ हो गई तो वो दर्शकों के पास चली गई। मुझे यकीन नहीं होता कि मुझे अवॉर्ड मिल गए, मुझे संजय लीला भंसाली की फिल्म मिल गई, राजामौली की फिल्म मिल गई। मैं सोचती हूं कि किसी मंदिर या कहीं जाकर किसी को थैंक्स तो कहूं। वैसे मैं बहुत पूजा-पाठ नहीं करती हालाँकि मैं स्पिरिच्युअल हूँ, लेकिन एक के बाद एक ऐसी बातें हुईं कि मैं भी संभल ही नही पा रही थी। लगा कुछ दान-पुण्य कर दूँ, बिना सोचे कि ये सब क्यों हो रहा है। 

राजामौली की फिल्म कर रही हैं उनके बारे में और उनकी फिल्म के बारे में बताएं। 
मैं उनसे पहली बार तब मिली जब वे कॉफी विद करण शूट कर हैदराबाद लौट रहे थे और मैं भी हैदराबाद एक शूट के लिए जा रही थी। कॉफी शॉप से लेकर प्लेन तक मैंने उनसे अपने दिल की बात कह दी कि मैं आपके साथ काम करना चाहती हूं। आप जब कहें मैं तैयार हूँ। मैंने तो अपनी तरफ से रोल पाने के लिए हर मुमकिन कोशिश कर डाली। शायद उन्हें मेरे टाइम मैनेजमेंट को ले कर थोड़ा संशय था। हाल ही में हमारी मीटिंग हुई तो मैंने कह दिया आप सिर्फ बताएं मैं कर लूँगी सब मैनेज। 

किस तरह का रोल है? 
में सीता का किरदार निभा रही हूँ। ये मायथोलॉजिकल कैरेक्टर है। ये सीता की शान, दोस्ती और अच्छे आचरण पर लिखा गया रोल है। आपको बाहुबली और बाहुबली 2 में राजामौली ने चौंका दिया था। ये फिल्म भी आपको जरूर चौंकाएगी। हालाँकि शूट किस तारीख से शुरू होगा या कब खत्म होगा इसकी रूपरेखा नहीं बनी है। ये एक पीरियड फिल्म है और मेरी पहली तेलुगू फिल्म। ये इंटरव्यू खत्म करके मैं अपनी तेलुगू क्लास के लिए जाने वाली हूँ, जो इस फिल्म के लिए मैं सीख रही हूँ। 

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