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चाइना से संदेश आते थे कि आप 'पलटन' में चाइना से कैसे लड़ रहे हैं: सोनू सूद

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रूना आशीष

'मैंने 1967 के बारे में ज्यादा नहीं सुना था, बस थोड़ा बहुत इधर-उधर का पढ़ा हुआ था। लेकिन जब ये फिल्म मुझे मिली तब मुझे जेपी सर ने एक डॉक्यूमेंट दिया था पढ़ने के लिए। उसमें बहुत रिसर्च थी। फिर मेरे घर में इतिहास की कई किताबें हैं। मम्मी इतिहास और अंग्रेजी की प्रोफेसर हैं, तो अभी भी मैंने उनकी कई किताबें संभालकर रखी हैं। मैंने इन्हीं किताबों से पढ़कर तैयारी की। बल्कि जब भी मुझे कोई इतिहास से जुड़ा किरदार मिलता है, तो मैं किताबों की मदद लेता हूं।'

सोनू सूद अपनी कद-काठी और छेदी के रूप में लोगों को बहुत पसंद आते हैं, साथ ही 'जोधा-अकबर' में उनके रोल और अभिनय को सराहना भी मिली है। सोनू ने 'पलटन' में मेजर बिशन सिंह का रोल अदा किया है। 'वेबदुनिया' संवाददाता ने बातचीत की और 'पल्टन' से जुड़ीं कई बातों को जाना।

आपका रोल मेजर बिशनसिंह का है, वो कैसे शख्स थे?
वो बहुत ही निडर किस्म के थे। आज भी उन्हें लोग 'टाइगर नाथूला' कहकर बुलाते हैं। उनसे तो चीनी सिपाही भी डरते थे। मैं तो बहुत खुश हूं ये सोचकर कि जेपी सर ने मुझे इस रोल के लिए चुना।

आप इसके पहले 'एलओसी' के लिए भी तो चुने गए थे?
कुछ साल पहले जब मैं जेपी सर के ऑफिस में आया था तो मुझे 'एलओसी' में एक रोल के लिए चुन लिया गया था। सैफ ने मेरा नाम जेपी सर को सुझाया था और कहा था कि सोनू से मिल लीजिए। वो तो लंबा-चौड़ा है और दिखता भी सोल्जर जैसा ही है। बात तय हो गई लेकिन उसी समय मेरी 'भगत सिंह' शुरू हो गई थी। मेरे पास डेट्स नहीं थी और मैं फिर 'एलओसी' नहीं कर पाया। तब ये मलाल रह गया कि कभी तो वर्दी पहने सोल्जर का रोल करूंगा तो लीजिए 'पलटन' में कर रहा हूं वैसा रोल। शायद ये मेरी किस्मत में था, तो हो ही गया।

आप रोल करते करते कहीं सच में चाइनीज लोगों पर गुस्सा तो नहीं हो गए?
(हंसते हुए) अरे नहीं, मैंने तो चाइनीज फिल्में की हैं, तो कैसे गुस्सा होऊं? वैसे मेरे सोशल मीडिया पर चाइना से लोगों के संदेश आते हैं कि हम तो आपको पसंद करते हैं और आप कैसे चाइना से लड़ रहे हैं, तो उन्हें जवाब देना पड़ता है कि मैं एक फिल्म कर रहा हूं बस। लेकिन एक बात जरूर शेयर करूंगा कि हम क्लाईमैक्स फिल्मा रहे थे और उसमें मुझे रोना था। इसे कई एंगल से फिल्माने वाले थे। मैं हर बार असली में रोने लग जाता था, तो इसे देखकर रीयल फौजी जो हमारे साथ फिल्म का हिस्सा भी बने थे, वो आकर पूछने लगे कि कैसे हर बार मैं रो देता हूं? मैं ठीक हूं या नहीं? शायद जब आपने वर्दी पहनी हो और भले ही फिल्म के लिए ही सही, आप एक्टिंग भी कर रहे हों तब भी आप जज्बाती हो जाते हैं। पता नहीं, मैं बिना ग्लीसरीन डाले भी हर शॉट में रो देता था। शायद ये मेरे अंदर की देशभक्ति ही थी।

आपके तो साउथ में भी बड़े फैन हैं?
हां, खुशकिस्मत हूं। एक बार अलू अरविंद के साथ काम कर रहा था, तब उन्होंने कहा था कि तुम नॉर्थ के शायद इकलौते ऐसे स्टार हों जिसे लोगों ने सिर्फ पसंद ही नहीं किया बल्कि अपनाया भी है, वरना साउथ में लोग हर किसी को आसानी से अपनाते नहीं हैं। वैसे वहां मेरी एक ऐसी फिल्म 'अरुंधती' को इस प्यार का पहला कारण या श्रेय दूंगा। 'अरुंधती' को आज वहां की 'शोले' भी कह सकते हैं। बच्चों तक को डायलॉग याद हैं उसके। सब कहते हैं कि बड़े लंबे समय बाद किसी फिल्म हॉल के बाहर इतनी लंबी लाइन देखी है। इसे रिपीट ऑडियंस भी खूब मिली।

कौन से जॉनर की फिल्मों में काम करना ज्यादा पसंद करते हैं?
एक बात बताता हूं। बचपन में मुझे कॉमिक्स पढ़ने का शौक हुआ करता था। उस समय अमर चित्र कथा या डायमंड कॉमिक्स जो भी मार्केट में आतीं, मैं पढ़ता था और बाद में उसे बाइंड कराकर रखता था। मेरी मां खुद कह देती थीं कि चलो कई सारी हो गई हैं, अब बाइंडिंग करा लेते हैं। तो जब मैं कोई पीरियॉडिक फिल्म करता हूं, तो मुझे लगता है कि मैं मेरे बचपन का सपना जी रहा हूं, तो ये मेरा पसंदीदा जॉनर है।

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