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दम मारो दम से गूंजा इंदौर, आरडी बर्मन को याद कर झूम उठे संगीतप्रेमी

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RD Burman Classics
संगीतकार राहुल देव बर्मन और उनके संगीत को आज इतने बरस बाद भी लोग कितना चाहते हैं, इसकी मिसाल है इंदौर में उनकी याद में संस्था सारेगामा द्वारा आयोजित कार्यक्रम। वक्त के पहले ही 1000 से ज्यादा कैपेसिटी वाला हॉल खचाखच भर गया और तीन घंटे तक लोग बिना हिले गीत-संगीत का मजा लेते रहे।  
 
यदि आरडी जीवित होते तो 27 जून 2005 86 वर्ष के हो जाते। उनके जन्मदिन के एक दिन बाद 28 जून को ‘आरडी बर्मन क्लासिक्स’ नामक कार्यक्रम रखा गया था, जिसमें आरडी द्वारा संगीतबद्ध अनेक गीतों में से चु‍निंदा गीत सुनाए गए। 
 
श्रुति भिड़े (बंगलौर), मंदार आप्टे (मुंबई), सागर मधुमत्के (नागुपर) और श्रुति जगताप (मुंबई) ने आरडी के सदाबहार और हिट गीतों को गाकर समां बांध दिया। नि:संदेह बाजी मारी श्रुति ने, जिन्होंने संजीदा गानों के साथ-साथ तड़क-भड़क वाले गानों में अपनी गायकी के जौहर दिखा कर श्रोताओं की दाद बटोरी। 
 
कार्यक्रम के अंत में ‘मोनिका, ओ माय डार्लिंग’ और ‘दम मारो दम’ के जरिये उन्होंने वो माहौल बनाया, जो श्रोता लंबे समय से तलाश रहे थे। काश इस तरह के गीत बीच-बीच में आते रहते तो कार्यक्रम की सफलता का स्तर और बढ़ जाता। 
 
आरडी बर्मन ने अपने करियर में कई सुपरहिट और मधुर गीत रचे। उसमें से चुनिंदा गानों का चयन कर सभी को खुश नहीं किया जा सकता, लेकिन इस कार्यक्रम में संजीदा गीतों के चयन का प्रतिशत ज्यादा था, जिससे उत्साही और प्रयोगधर्मी आरडी के रंग थोड़े कम दिखे। यदि जोशीले गीतों को थोड़ा और शामिल किया जाता तो यह कार्यक्रम और भी यादगार बन सकता था।
 
बहरहाल, आरडी के कई हिट गानों का मजा श्रोतागण तीन घंटे तक लेते रहे और एक से बढ़ कर एक गीतों पर आरडी और इन कलाकारों को दाद देते रहे। 
 
संजय पटेल ने एंकर के रूप में न सिर्फ गीतों के पीछे की रोचक कहानियाँ साझा कीं, बल्कि दर्शकों को आरडी के संगीत के अनछुए पहलुओं से भी रूबरू कराया। वहीं, अभिषेक गावड़े और उनकी टीम की साउंड और इवेंट मैनेजमेंट में भूमिका उल्लेखनीय रही, जिन्होंने पूरे आयोजन को एक सुरमयी अनुभव में बदल दिया।

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