ज्यादातर लोग जब भी परेशानियों से घिरते हैं या अपने आपको असहाय महसूस करते हैं तो भगवान को जरूर याद करते हैं। क्या हो यदि भगवान हमारी सहायता करें और हम उन्हें पहचान भी नहीं पाए।
राजेन्द्र (विनय पाठक) एक साधारण आदमी है। वह सेल्समैन है और उसके बड़े-बड़े सपने हैं। इसके लिए वह कठोर परिश्रम करने को भी तैयार है और धीरूभाई अंबानी को वह अपना आदर्श मानता है।
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सुमन (दिव्या दत्ता) उसकी पत्नी है और अपनी जिंदगी से बेहद खुश है। राजेन्द्र की तरह उसकी कोई महत्वाकांक्षा नहीं है। लेकिन राजेन्द्र का वह हर तरह से सहयोग और समर्थन करती है। राजेन्द्र उसका हीरो है।
उनकी शादी को पाँच वर्ष हो गए, लेकिन राजेन्द्र अभी भी परिवार बढ़ाने के लिए तैयार नहीं है। सुमन को भगवान पर पूरा भरोसा है कि राजेंद्र एक न एक दिन जरूर कामयाब होगा। वह इसके लिए भगवान से प्रार्थना भी करती है। राजेन्द्र हर काम पूरी योजना के साथ करता है। उसने अपना पैसा कई स्कीमों में लगा रखा है।
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फिल्म में भगवान भी हैं और ये किरदार निभाया है सौरभ शुक्ला ने। आमतौर पर हम जैसे भगवान देखते हैं, उससे कुछ अलग किस्म के भगवान हैं ये। वे चॉकलेट, चिप्स और पिज्जा खाते हैं। सूट पहनते हैं और कभी-कभी निराश भी हो जाते हैं। आम आदमी की तरह वे बोर भी होते हैं और जिस दुनिया को उन्होंने बनाया है उससे परेशान भी हो जाते हैं। भगवान राजेन्द्र की मदद करने का फैसला करते हैं ताकि वह सफल हो, लेकिन राजेंद्र इन अवसरों को पहचान नहीं पाता।
एक आम आदमी की कहानी को निर्देशक सौरभ श्रीवास्तव ने हास्यभरे अंदाज में पेश किया है। इस फिल्म की शूटिंग उन्होंने मात्र 19 दिनों में पूरी की।