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एक चतुर नार मूवी रिव्यू: टाइटल जितनी दिलचस्प नहीं है फिल्म

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हमें फॉलो करें Ek Chatur Naar movie review

WD Entertainment Desk

, शनिवार, 13 सितम्बर 2025 (13:17 IST)
अक्सर देखा जाता है कि आइडिया दिलचस्प रहा जाता है, लेकिन उस पर फिल्म की जो इमारत खड़ी की जाती है वो मजबूत नहीं रहती। एक चतुर नार के साथ भी यही वाकया दोहराया गया है। यह फिल्म साधारण से दिखने वाली एक महिला की असाधारण कहानी कहती है, जो हालात से जूझते हुए बड़े-बड़े नेताओं और उद्योगपतियों को अपनी चतुराई से मात देती है।
 
फिल्म की कहानी ममता (दिव्या खोसला) की ज़िंदगी से शुरू होती है। ममता एक मिडिल क्लास हाउसवाइफ है, जो अपने छोटे बेटे और माँ (छाया कदम) के साथ रहती है। पति की आत्महत्या के बाद वह कर्ज और परेशानियों से घिरी रहती है। अचानक किस्मत उसे एक ऐसा मोबाइल फोन पकड़ा देती है, जिसमें भ्रष्ट राजनेता कुरैशी (जाकिर हुसैन) और उद्योगपति अभिषेक वर्मा (नील नितिन मुकेश) के गुनाहों के सबूत भरे होते हैं।
 
यहीं से फिल्म असली मोड़ पकड़ती है। ममता इस फोन को हथियार बनाकर ब्लैकमेलिंग का खेल शुरू करती है। वह बार-बार इन ताकतवर लोगों के सामने ऐसी मांगें रखती है, जो उन्हें असहज कर देती हैं। एक आम और मासूम दिखने वाली महिला कैसे राजनीति और बिजनेस की बड़ी-बड़ी मछलियों को फंसा देती है, यही फिल्म का सबसे बड़ा आकर्षण है।
 
निर्देशक उमेश शुक्ला ने फिल्म में थ्रिल और कॉमेडी का मिश्रण करने की कोशिश की है। कई ट्विस्ट एंड टर्न्स अच्छे से काम करते हैं और दर्शकों को कहानी से जोड़े रखते हैं, लेकिन कॉमेडी में धार नहीं है। कई बार ऐसा भी लगता है कि ममता सब कुछ बड़ी आसानी से कर रही है जिससे फिल्म पर विश्वास कम होता है। 
 
फिल्म का दूसरा हिस्सा अपेक्षा से ज़्यादा लंबा और खिंचावदार लगता है। बैकस्टोरी पर जरूरत से अधिक समय देने के कारण फिल्म की गति धीमी हो जाती है। 
 
पटकथा की यह कमजोरी फिल्म की सबसे बड़ी कमी बन जाती है। दर्शक जब क्लाइमेक्स की ओर बढ़ते हैं, तब तक उनकी धैर्य की परीक्षा हो चुकी होती है।
 
दिव्या खोसला ने ममता के किरदार को मासूमियत और चतुराई के बीच बड़ी खूबसूरती से निभाया है। स्क्रीन पर उनकी मौजूदगी दमदार लगती है। कई जगहों पर वह अपने अभिनय से दर्शकों को चौंकाती भी हैं।
 
नील नितिन मुकेश का रोल अहम है, लेकिन उनके किरदार में गहराई की कमी खलती है। वे जरूरी तो लगते हैं, मगर प्रभावशाली नहीं। छाया कदम, जो दिव्या की माँ बनी हैं, फिल्म का सबसे मज़बूत हिस्सा हैं। उनकी एक्टिंग में जो नैचुरल अंदाज़ है, वह दर्शकों को तुरंत कनेक्ट कर देता है। जाकिर हुसैन हमेशा की तरह अपनी मौजूदगी से रंग जमाते हैं, जबकि सुशांत सिंह का रोल सीमित होने के बावजूद असर छोड़ जाता है।
 
फिल्म का टाइटल ट्रैक कानों को अच्‍छा लगता है और कहानी के साथ फिट बैठता है। बैकग्राउंड स्कोर कसा हुआ है और थ्रिलर माहौल बनाने में मदद करता है। बाकी गाने औसत दर्जे के हैं और कहानी को आगे नहीं बढ़ाते।
 
सिनेमैटोग्राफी अच्छी है। कई लोकेशन्स को खूबसूरती से दिखाया गया है। कैमरा वर्क दर्शकों को बांधे रखता है, खासकर उन दृश्यों में जहां ममता ब्लैकमेलिंग के खेल में बड़ी चालें चलती है। एडिटिंग बेहतर हो सकती थी क्योंकि कई सीन ज़्यादा लंबे लगते हैं।
 
एक चतुर नार एक दिलचस्प आइडिया पर बनी फिल्म है, जिसमें एक साधारण महिला की असाधारण जंग दिखाई गई है। फिल्म कई जगहों पर मनोरंजन करती है, लेकिन कमजोर पटकथा इसकी सबसे बड़ी बाधा बन जाती है। फिल्म अपने टाइटल से कम दिलचस्प है।  
  • निर्देशक: उमेश शुक्ला
  • गीत: वायु, शायरा अपूर्वा
  • संगीत: वायु-शरण रावत, अभिजीत 
  • कलाकार: दिव्या खोसला, नील नितिन मुकेश, छाया कदम, ज़ाकिर हुसैन, सुशांत सिंह 
  • रेटिंग : 2/5 

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