How was Jesus Christ born christmas: परंपरा से 25 दिसंबर को ईसा मसीह का जन्म हुआ था। भारत और विदेशों में उनका जन्म दिवस क्रिसमय के रूप में मनाया जाता है लेकिन उनके जन्म समय, दिनांक आदि पर अभी तक मतभेद बने हुए हैं। ईसाई रोमन सम्राट कॉन्सटेंटाइन के शासनकाल में 336 ईस्वी में पहली बार क्रिसमस मनाया गया था। आइये जानते हैं कि क्या है ईसा मसीह के जन्म की कथा।
जन्म दिनांक: ईसा मसीह का जन्म 25 दिसंबर को हुआ। हालांकि कुछ विद्वानों के अनुसार मार्च में उनका जन्म किसी तारीख को हुआ था। ईसा मसीह का जन्म 25 दिसंबर को हुआ था या बसंत की किसी तारीख को, इसको लेकर भी मतभेद है। शोधकर्ता मानते हैं कि ईसा मसीह के जन्म के समय का जो वर्णन मिलता है वह वसंत ऋतु की ओर संकेत करता है। वसंत ऋतु मार्च और अप्रैल के मध्य रहती है। रशिया सहित 18 देशों में 7 जनवरी को क्रिसमस मनाया जाता है। अर्मेनियाई अपोस्टोलिक चर्च 6 जनवरी को एपिफेनी के साथ क्रिसमस मनाता है। ग्रीक कैलेंडर के मुताबिक इसे 6 अप्रैल माना जाता है।
जन्म सन्: ईसा मसीह का जन्म 4 ईसा पूर्व हुआ या 6 ईसा पूर्व इसको लेकर भी मतभेद है। मैथ्यू की गॉस्पेल के अनुसार यीशु का जन्म करीब 4 ईसा पूर्व हेरोड दि ग्रेट की डेथ के करीब 2 साल पहले हुए था। जबकि ल्यूक गॉस्पेल के अनुसार यीशु का जन्म 6 ईस्वी में हुआ था। हालांकि अधिकतर जगह मान्य है कि 6 ईसा पूर्व उनका जन्म हुआ था।
जन्म स्थान: ईसा मसीह का जन्म बेथलेहम के एक अस्तबल में हुआ था। यह भूमि दुनिया भर के ईसाईयों की आस्था का केंद्र है। इसराइल में यह स्थल यरुशलम से 10 किलोमीटर दक्षिण में स्थित एक फिलिस्तीनी शहर है। यहां मुस्लिमों की संख्या अधिक है। बेथलहम शहर को मूल रूप से एफ्राथ कहा जाता था। जहां उनका जन्म हुआ वहां आज एक चर्च है जिसे आज चर्च ऑफ नेटिविटी कहा जाता है। कॉन्स्टेंटाइन द ग्रेट (330 ईस्वी) की मां सेंट हेलेना द्वारा निर्मित चर्च ऑफ द नेटिविटी, बेथलेहम के केंद्र में पवित्र क्रिप्ट नामक एक कुटी या गुफा के ऊपर स्थित है, जो ईसाई परंपरा के अनुसार, वह स्थान है जहां यीशु का जन्म हुआ था। मान्यता के अनुसार जन्म स्थान पर 333 ईस्वी में एक बेसिलिका बनाई गई थी। उसके बाद वहां क्रिसमय मानाने के लिए आने लगे। फिर यहां पर सबसे पहले 339 ईस्वी में एक चर्च पूरा किया गया। इस बीच 336 ईस्वी में पहली बार क्रिसमस मनाया गया था।
जन्म की कहानी:
2 हजार वर्ष पूर्व की बात है। एक बढ़ई था जिसका नाम युसुफ था। वह इसराइल का नाजरथ नामक एक गांव में रहता था। युसुफ का विवाह मैरी के साथ हुआ था। एक दिन एक परी मैरी के सामने प्रकट हुई और उसने कहा आपके घर एक दिव्य बालक जन्म लेगा। वह एक मसीहा होगा जो दुनिया को बदल देगा। मैरी कुछ दिनों के बाद गर्भवती हुई।
एक कथा के अनुसार फ़रिश्ता गेब्रियल मैरी को बताता है कि वह जीसस को जन्म देगी; एक फ़रिश्ता जोसेफ को मैरी से शादी करने के लिए कहता है।
इसी बीच बेथलेहम शहर में जगनणना आयोजित की जा रही थी। राज्य में हर किसी को उसमें भाग लेकर अपना नाम लिखवाना था। इसीलिए मैरी भी अपने पति युसुफ के साथ बेथलेहम के लिए निकल पड़ी। उस वक्त बेथलेहम में बहुत भीड़ थी और हर कोई जनगणना में भाग लेने के लिए आया था। इसलिए इन दोनों को सराय में आराम करने के लिए कोई जगह नहीं मिली। अंत में उन्हें रात बिताने के लिए एक जगह मिल गई। एक गडरिये ने उन्हें अपने अस्तबल में रुकने की जगह दी। उसी रात उसी जगह पर युशी मसीहा का जन्म हुआ और उन्हें चरनी में लिटाया गया। सूखे घास के अलावा उनके पास कोई बिस्तर नहीं था। उनसे मिलने के लिए चरवाहों के अलावा कोई नहीं था।
बेथलेहेम से बहुत दूर तीन बुद्धिमान पुरुषों ने आसमान में चमकते हुए एक सितारे को देखा, जो कहीं जा रहा था। उन तीनों ने इसे दिव्य माना और वे भी उस सितारे के पीछे हो लिए। वह सितारा वहां पहुंचकर गायब हो गया जहां यीशु थे। वे तीन बुद्धिमान पुरुष यीशु से मिले और उन्हें आशीर्वाद दिया। उन्होंने चरवाहों को कहा कि ये बच्चा आगे चलकर यहूदी समुदाय का राजा बनेगा।
मागी एक तारे का पीछा करते हैं, जीसस को ढूंढते हैं, और उपहार (सोना, लोबान, गंधरस) लाते हैं। चरवाहों के कारण सभी जगह ये खबर फैल गई। एक व्यक्ति इस खबर से खुश नहीं था। और वह था उस देश का राजा हेरोड। हेरोड को जब यह पता चला तो उसने सोच कि यह बच्चा तो अपना प्रतिद्वंदी है, लेकिन वह नहीं जानता था कि कौनसा दिव्य बच्चा प्रतिद्वंदी है। इसलिए उसने 2 साल की उम्र तक के सभी बच्चों को मारने का आदेश दे दिया। इस बात का पता चलते ही सौभाग्य से युशी को परिवार रातोरात मिस्र जा पहुंचा। हालांकि यह भी कहते हैं कि जोसेफ को सपने में राजा हेरोड (हेरोदेस) की जीसस को मारने की साजिश के बारे में चेतावनी दी जाती है, इसलिए वे मिस्र भाग जाते हैं। बाद में वे राजा की मृत्यु के बाद ही अपने घर वापस लौट आते हैं।
डिस्क्लेमर: लेख में दी गई जानकारी विभिन्न स्रोत से प्राप्त, शोध, मान्यता और परंपरा पर आधारित जानकारी है इसकी पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। इसके लिए किसी विशेषज्ञ से जरूर सलाह लें।