Publish Date: Sat, 27 Mar 2021 (19:30 IST)
Updated Date: Sat, 27 Mar 2021 (19:33 IST)
बर्लिन। वैज्ञानिकों ने कोरोनावायरस (Coronavirus) कोविड-19 से बचाव के लिए दुनियाभर में इस वक्त इस्तेमाल किए जा रहे टीकों को नियमित तौर पर अपडेट करने की जरूरत पड़ सकने की बात कही है, क्योंकि वायरस के नए स्वरूप सामने आ रहे हैं।
वायरस इवोल्यूशन में प्रकाशित एक अध्ययन में इस बारे में आकलन किया गया है। इससे जुड़े अनुसंधान में बर्लिन में चैरिटी-यूनिवर्सिटैट्समिडि के विषाणु वैज्ञानिकों ने चार कॉमन कोल्ड (सामान्य ज़ुकाम) कोरोनावायरसों, खासकर, 229 और ओसी43 वायरसों के अनुवांशिक परिवर्तन का अध्ययन किया।
उन्होंने इन कोरोनावायरसों के स्पाइक प्रोटीन में बदलावों का पता लगाया। अध्ययन की प्रथम लेखिका वेंडी के जो ने बताया कि ये कोरोनावायरस भी इंफ्लुएंजा की तरह ही रोग प्रतिरोधक क्षमता से बच सकते हैं।
वैज्ञानिकों ने कहा कि अन्य कोरोनावायरसों की तुलना में नोवल कोरोनावायरस में बदलावों की गति अधिक है।अध्ययन के सह लेखल जेन फ्लिक्स ड्रेग्ज़लर ने कहा कि सार्स-कोव-2 की आनुवांशिकी में तेज बदलाव होने की वजह से ही दुनियाभर में वायरस के विभिन्न स्वरूप सामने आ रहे हैं।
ड्रेग्जलर ने कहा, हमारा मानना है कि कोविड-19 टीकों की महामारी के दौरान नियमित रूप से निगरानी करनी चाहिए और जरूरत पड़ने पर उसे अपडेट करना चाहिए।(भाषा)