AIIMS के डायरेक्टर का बयान, लंबी हो सकती है कोरोना के खिलाफ लड़ाई, जून-जुलाई में पीक पर होंगे मामले

गुरुवार, 7 मई 2020 (21:49 IST)
नई दिल्ली। देश इस समय कोरोना महामारी से जूझ रहा है। देश में लॉकडाउन के बाद भी संक्रमित मामलों की संख्या में लगातार बढ़ते जा रहे हैं। इस बीच दिल्ली एम्स (AIIMS) के डायरेक्टर डॉक्टर रणदीप गुलेरिया ने बयान दिया है कि मॉडलिंग डाटा के अनुसार जिस तरह भारत में कोरोना के मामले बढ़ते ही जा रहे हैं, उससे संभावना है कि यह लड़ाई लंबी चले।

एक समाचार चैनल पर दिए बयान में गुलेरिया ने कहा कि हो सकता है इस बीमारी के आंकड़े जून-जुलाई के दौरान अपने शिखर पर हों। उन्होंने कहा कि इसे प्रभावित करने वाली कई और कारण भी हैं। केवल समय के साथ, हमें पता चल जाएगा कि वे कितने प्रभावी हैं और लॉकडाउन को बढ़ाना कितना असरकारक रहा।
 
हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन नहीं है संजीवनी बूटी : कोरोना के खिलाफ फिलहाल कोई विशेष दवा नहीं होने के कारण हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन कोविड-19 के मरीजों के इलाज के लिए एक प्रमुख दवा के रूप में उभर कर आई है। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), दिल्ली के पूर्व निदेशक और भारत के शीर्ष सर्जनों में से एक डॉक्टर एमसी मिश्रा ने कहा है कि हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन कोई ‘संजीवनी बूटी’ नहीं है।

सिर्फ ऐसे उदाहरण हैं जहां डॉक्टर कोविड-19 के लिए विशेष दवा/इलाज नहीं होने के कारण हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन को अन्य एंटी-वायरल (एचआईवी या अन्य वायरस के इलाज के लिए बनी दवाएं) दवाओं के साथ मिलाकर मरीजों का इलाज कर रहे हैं। मिश्रा ने कहा कि हम अन्य दवाओं के साथ हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन का उपयोग कर रहे हैं, लेकिन इसके खतरनाक साइडइफेक्ट्स को नजरअंदाज कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि दुनिया में अकेले हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन देने या फिर उसे एजिथ्रोमाइसिन के साथ मिलाकर दिए जाने पर मरीजों की मौत होने की खबरें हैं।

कई जगहों से ऐसी सूचना है कि हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन के कारण मरीजों की हृदय गति में असमानता आ गई है और इसके कारण दिल का दौरा भी पड़ सकता है। एम्स के ट्रॉमा सेंटर में तैनात अस्पताल की कोविड-19 टीम के प्रमुख सदस्य युद्धवीरसिंह इस बात से इत्तेफाक रखते हैं।
 
एम्स में एनेस्थेसिया के सहायक प्रोफेसर ने कहा कि कोविड-19 के इलाज में हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन के उपयोग के संबंध में अलग-अलग खबरें/सूचनाएं आ रही हैं।  (भाषा/एजेंसियां)

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