Publish Date: Tue, 04 May 2021 (22:43 IST)
Updated Date: Tue, 04 May 2021 (23:39 IST)
नई दिल्ली। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के निदेशक डॉ. रणदीप गुलेरिया ने मंगलवार को कहा कि जिन इलाकों में कोविड-19 मामलों की संक्रमण दर 10 प्रतिशत से ज्यादा या जहां अस्पतालों में 60 प्रतिशत से ज्यादा बिस्तर भर चुके हों, वहां सख्त लॉकडाउन लगाया जाना चाहिए। उन्होंने कुछ राज्यों द्वारा कोरोनावायरस मामलों की संख्या कम करने के लिए अपनाई जा रही रात्रि कर्फ्यू और सप्ताहांत लॉकडाउन की रणनीति को खारिज करते हुए कहा कि संक्रमण दर पर इनका ज्यादा प्रभाव नहीं होगा।
गुलेरिया ने बताया कि संक्रमण की श्रृंखला तोड़ने के लिए उन इलाकों में सख्त क्षेत्रीय लॉकडाउन लगाने की आवश्यकता है, जहां कोविड-19 मामलों की संक्रमण दर 10 प्रतिशत से ज्यादा है या जहां अस्पतालों में 60 प्रतिशत बिस्तर भर चुके हैं। कोविड-19 कार्यबल भी यही सुझाव दे रहा है।
उन्होंने कहा कि यह गृह मंत्रालय के दिशा-निर्देश में भी है, लेकिन इसे सख्ती से लागू नहीं किया जा रहा। उन्होंने कहा कि एक बार संक्रमण दर घटने के बाद इन इलाकों में क्रमिक तौर पर चरणबद्ध रूप से 'अनलॉक' की प्रक्रिया शुरू की जानी चाहिए। उन्होंने हालांकि इस बात पर भी जोर दिया कि उच्च संक्रमण दर वाले इलाकों से लोगों के कम संक्रमण दर वाले इलाकों में आवाजाही पर रोक लगाई जाए जिससे प्रसार पर अंकुश लग सके।
राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन पर उनके विचार पूछे जाने पर गुलेरिया ने कहा कि लोगों की आजीविका और दिहाड़ी मजदूरों पर इसके प्रभाव को देखते हुए संपूर्ण लॉकडाउन समाधान नहीं हो सकता। कम संक्रमण दर वाले इलाकों में पाबंदियों के साथ दैनिक गतिविधियों की इजाजत दी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि कोई भी स्वास्थ्य देखभाल ढांचा इस स्तर पर मामलों का प्रबंधन नहीं कर सकता इसलिए पर्याप्त समय तक आक्रामक निषेधात्मक उपाय किए जाने चाहिए।
गुलेरिया की टिप्पणी ऐसे वक्त आई है, जब देश कोविड-19 के गंभीर संकट का सामना कर रहा है और संक्रमण के मामलों व मौतों में बढ़ोतरी हो रही है जबकि अस्पतालों में ऑक्सीजन व बिस्तरों की कमी है। भारत में कोविड-19 संक्रमितों की कुल संख्या 2 करोड़ के पार पहुंच चुकी है जबकि 50 लाख से ज्यादा मामले महज बीते 15 दिनों में दर्ज किए गए हैं। (भाषा)
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Publish Date: Tue, 04 May 2021 (22:43 IST)
Updated Date: Tue, 04 May 2021 (23:39 IST)