Publish Date: Sat, 21 Mar 2020 (12:25 IST)
Updated Date: Sat, 21 Mar 2020 (12:29 IST)
नई दिल्ली। भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) ने कोरोना वायरस को फैलने से रोकने की अपनी रणनीति में शनिवार को संशोधन करते हुए कहा कि श्वसन संबंधी गंभीर बीमारी, सांस लेने में दिक्कत और बुखार तथा खांसी की शिकायत के साथ अस्पताल में भर्ती सभी मरीजों की कोविड-19 संक्रमण के लिए जांच की जाएगी।
आईसीएमआर के नए दिशा-निर्देशों में यह भी कहा गया कि संक्रमित लोगों के संपर्क में आने वाले लोगों की संपर्क में आने के पांचवें और 14वें दिन के बीच में जांच की जानी चाहिए, चाहे उनमें बीमारी के लक्षण दिखाई दे या न दे।
बायोमेडिकल अनुसंधान की सर्वोच्च संस्था ने इस सप्ताह देश में कोरोना वायरस के मामले बढ़ने के मद्देनजर अपनी रणनीति में सुधार किया है। नयी रणनीति का उद्देश्य संक्रमण को फैलने पर और अधिक प्रभावी तरीके से लगाम लगाना तथा सभी मरीजों को बेहतर इलाज मुहैया कराना है।
अभी तक पिछले 14 दिनों में अंतरराष्ट्रीय यात्रा करने वाले बिना लक्षण वाले लोगों और बाद में लक्षण दिखने, प्रयोगशाला से संक्रमण की पुष्टि वाले मामलों के संपर्क में आने वाले और लक्षण दिखाने वाले लोगों तथा लक्षण दिखाने वाले सभी स्वास्थ्य देखभाल कार्यकर्ताओं की दिशा निर्देशों के अनुसार संक्रमण के लिए जांच की गई।
भारत में शनिवार को कोरोना वायरस के मामलों की संख्या बढ़कर 258 हो गई। जांच के लिए परामर्श की समीक्षा की जा रही है और समय-समय पर उसकी जानकारी दी जा रही है।
डीएचआर सचिव और आईसीएमआर डीजी द्वारा गठित और नीति आयोग के सदस्य वीके पॉल की अध्यक्षता वाले राष्ट्रीय कार्य बल ने जांच रणनीति की समीक्षा की है।