कपिल देव की 83 वर्ल्ड कप में शानदार कप्तानी ने टीम इंडिया पर लगा 'कमजोर टीम' का धब्बा मिटाया

1983 के विश्वकप में भारत फिर एक छोटी टीम आंकी जा रही थी। इससे पहले दो विश्वकप में भारतीय टीम सिर्फ 1 मैच जीत पायी थी। इन दोनों विश्वकप में  श्रीनिवासराघवन वेंकटराघवन कप्तान थे, लेकिन 83 के विश्वकप में कमान कपिल देव के हाथों सौंपी गई। दिलचस्प बात यह है कि कपिल देव शुरुआती दिनों में वेंकटराघवन से काफी डरते थे। लेकिन अब वह उनकी जगह ले चुके थे।
कपिल ने भारतीय टीम की कमान 1982 में उस समय में संभाली थी, जब क्रिकेट खेलने वाले वेस्‍टइंडिज, इंग्‍लैड जैसे देशों के सामने भारतीय टीम की बिसात बांग्‍लादेश और केन्‍या जैसी टीमों की तरह थी। क्रिकेट प्रेमी तो दूर, कोई भारतीय खिलाड़ी भी उस समय विश्व कप जीतने के बारे में सोच नहीं रहा था। तब कौन जानता था कि कपिल के जांबाज खिलाड़ी इतिहास रचने जा रहे हैं।
 
इस टीम में श्रीकांत के अलावा मोहिंदर अमरनाथ, यशपाल शर्मा, रोजर बिन्नी, संदीप पाटिल, सुनील गावस्कर, बिशन सिंह बेदी, मदनलाल जैसे खिलाड़ी थे।लीग मैचों की शुरुआत में  वेस्टइंडीज से हुए पहले ही मैच में भारतीय टीम ने विश्वक्रिकेट को चौंका दिया जब गत विजेता को भारत ने 34 रनों से हरा दिया। दूसरे मैच में कमजोर जिमबाब्वे द्वारा सामने रखा गया 155 रनों का लक्ष्य भारत ने 5 विकेट खोकर बना लिया। हालांकि इसके बाद ऑस्ट्रेलिया से 162 रनों से करारी हार का सामना करना पड़ा। वेस्टइंडीज ने दूसरे लीग मुकाबले में गलती नहीं की और भारत को 66 रनों से हरा दिया। 
 
जिम्मबाब्वे से हुआ दूसरा लीग मैच कपिल देव के 175 रनों के लिए अभी तक जाना जाता है। 9 रनों पर 4 विकेट खो चुकी भारत की टीम को कपिल का संबल मिला। उन्होंने 175 रनों की मैराथन पारी खेली। इस पारी की बदौलत भारत 31रन से जीत गया। आत्मविश्वास से लबरेज भारतीय टीम ने फिर ऑस्ट्रेलिया को भी 116 रनों से पटखनी दे दी।  
 
सेमीफाइनल में भारत का मुकाबला मेजबान इंग्लैंड से हुआ। पहले बल्लेबाजी करते हुए इंग्लैंड ने निर्धारित 60 ओवरों में 213 रन बनाए। इसका पीछा भारत ने 4 विकेट खोकर पचपनवें ओवर में कर लिया। फाइनल में भिडंत गत विजेता वेस्टइंडीज से होनी थी। 
 
फाइनल में वेस्टइंडीज के कप्तान क्लाइव लॉयड ने टॉस जीतकर पहले भारत को बल्लेबाजी के लिए कहा। भारतीय टीम 54.4 ओवरों में केवल 183 रन जोड़कर आउट हो गई।वेस्टइंडीज की पूरी टीम 52 ओवरों में 140 रन पर आउट हो गई और भारत ने यह मैच 43 रनों के अंतर से जीत लिया। मोहिन्दर अमरनाथ को उनके हरफनमौला प्रदर्शन (26 रन और 3 विकेट) के लिए मैन ऑफ द मैच चुना गया।
 
1987 के विश्वकप में चूके कपिल
 
83 में जीत दिलाने के बाद कपिल देव से फिर आशा रखी गई कि वह देश को विश्वकप दिलवाएं, क्योंकि इस बार विश्वकप भारत में खेला जा रहा था। भारत के ग्रुप में ऑस्ट्रेलिया , न्यूजीलैंड और जिम्बाबवे टीम थी। लेकिन लीग मैच में भारत सिर्फ 1 मैच ऑस्ट्रेलिया से 1 रन से हारा और सेमीफाइनल में जगह बना ली।
 
सेमीफाइनल में उसका मुकाबला फिर इंग्लैंड से हुआ। इंग्लैंड ने भारत को 254 रनों का लक्ष्य दिया लेकिन भारत सिर्फ 219 रन बना सका और विश्वकप से बाहर हो गया। भारत भले ही यह विश्वकप नहीं जीत पाया पर कपिल ने भारतीय टीम को कमजोर श्रेणी से बाहर निकाल चुके थे।

वेबदुनिया पर पढ़ें

अगला लेख फ्रेंच ओपन में विश्व की नंबर एक नाओमी ओसाका हारते-हारते बचीं