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चार साल पहले एक फोन कॉल ने बना दिया इंग्लैंड को 2019 का वर्ल्ड चैंपियन

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सोमवार, 15 जुलाई 2019 (12:39 IST)
2015 के विश्वकप में इंग्लैंड के बुरे हाल रहे। 6 ग्रुप मैचेस में महज दो में जीत मिली और बांग्लादेश के खिलाफ हुई हार ने इंग्लिश क्रिकेटप्रेमियों के दिल को तोड़ दिया।
 
इस हार के बाद इयॉन मोर्गन ने इंग्लैंड में इंग्लैंड टीम डायरेक्टर एंड्रयू स्ट्रॉस को फोन लगाया और लंबी बातचीत की। मोर्गन ने कहा कि इंग्लैंड परंपरावादी तरीके से वनडे क्रिकेट भी टेस्ट स्टाइल में खेल रहा है। वनडे मैचेस को अभी भी दोयम दर्जा दिया जाता है। हमसे वनडे क्रिकेट के मामले में दूसरे देश कहीं आगे हैं। ऐसे तो हम कभी भी वर्ल्ड कप नहीं जीत सकते।
 
एंड्रयू स्ट्रॉस ने मोर्गन को सपोर्ट किया और उन्हें इस दिशा में काम करने के लिए कहा। मोर्गन ने 2019 के विश्वकप को जीतने की तैयारी 2015 में ही शुरू कर दी। उन्होंने इसके लिए खास प्लान बनाया।
आक्रामक खिलाड़ियों को किया शामिल : 2015 में इंग्लैंड के खिलाड़ियों में आक्रामकता का अभाव था। वे दबाव में बिखर जाते थे। वनडे में नए ईजाद किए गए शॉट्स नहीं खेल पाते थे। ऐसे खिलाड़ियों को मोर्गन ने टीम से बाहर करना शुरू किया। वे नए आक्रामक खिलाड़ियों को टीम में शामिल करने में जुट गए जो मैदान में जाते ही पहली ही गेंद से गेंदबाज के धुर्रे बिखेर दे।
बदला खिलाड़ियों का नजरिया : मोर्गन ने टीम के साइकोलॉजिस्ट डेविड यंग की मदद से खिलाड़ियों का नजरिया बदला। वे दबंगता से मैदान में जाने लगे। हार के बारे में सोचते ही नहीं थे। विपक्षियों पर पहली गेंद से हावी होने की कोशिश करते। नर्वस होना उन्हें समझ में ही नहीं आता था। दबाव में वे टूटते नहीं थे। वे जुझारू हो गए। आखिरी गेंद तक हार नहीं मानते थे। विपक्षी टीम की नाक के नीचे से मैच छीनने लगे। 
 
दी स्पेशल ट्रेनिंग : इस तरह के खिलाड़ियों को वनडे क्रिकेट की स्पेशल ट्रेनिंग मिली। वे 50 ओवर के खेल में आने वाले उतार-चढ़ाव को बारीकी से समझने लगे। नियमों का फायदा उठाना सीख गए। बल्लेबाजी को इंग्लैंड की ताकत बनाया गया। बेरिस्टो, मोर्गन, बटलर, रॉय जैसे बल्लेबाज मैदान में जाकर मारकाट मचाने लगे। 
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इंग्लैंड में मिलने लगीं सपाट पिचें : जब इंग्लैंड की वनडे क्रिकेट में बल्लेबाजी मजबूत हो गई तो सपाट पिच इंग्लैंड में तैयार किए गए। बाउंड्रीज थोड़ी छोटी कर दी गई। इसके बाद से इंग्लैंड के बल्लेबाज वनडे क्रिकेट में धूम मचाने लगे। मेजबान होने का फायदा इस तरह से इंग्लैंड ने उठाया। 
वर्ल्ड कप था सपना : पिछले दो-तीन साल से इंग्लैंड टीम ने सर्वाधिक बार 300 रनों का आंकड़ा पार किया। 300 से 350 रन बनाना उनके लिए बेहद आसान रहा। जमकर उन्होंने विपक्षी टीमों को हराया। वर्ल्ड कप के पहले खूब प्रैक्टिस हो गई उनकी। लेकिन मोर्गन का सपना तो वर्ल्ड कप जीतना था। 
 
उम्मीदवार नहीं, दावेदार : 2019 में इंग्लैंड को विश्व कप शुरू होने के पहले सबसे मजबूत दावेदार माना गया। इसके पहले उन्हें महज उम्मीदवार माना जाता था। बीच में इंग्लैंड थोड़ा लड़खड़ाई, लेकिन आखिर में टीम विश्व चैंपियन बन गई। कहा जा रहा है कि फाइनल में इंग्लैंड का थोड़ा भाग्य ने भी साथ दिया, लेकिन भाग्य भी तो साहसियों का ही साथ देता है।
 
मोर्गन की 4 सालों की मेहनत का यह निचोड़ निकाला जा सकता है। महज प्लानिंग ही सब कुछ नहीं होता। सही नजरिया, सही प्रोसेस और योजना को सही तरीके से आगे बढ़ाया जाए तो सफलता कदम चूमती है।

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