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बच्चों के सर्वांगीण विकास में माता-पिता का योगदान

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- मोनिका पाण्डेय 
 
किसी भी बच्चे का पहला विद्यालय उसका घर और पहले शिक्षक उसके माता-पिता होते हैं। कोई भी बच्चा शुरुआत में अपने माता-पिता से ही सारे काम करना सीखता हैं। माता-पिता न सिर्फ अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा देते हैं, बल्कि सही गलत का पहचान कराते हुए अपने बच्चे के फ्यूचर को बेस्ट बनाने की कोशिश करते हैं।

माता-पिता द्वारा सिखाए हुए कार्यों को जीवन में उतारकर वे सफलता भी हासिल करते हैं, दरअसल माता-पिता का व्यवहार और उनके द्वारा किए गए कार्यों का प्रभाव सीधा उनके बच्चों पर पड़ता है। यदि वे कुछ गलत करतें हैं तो उनका बच्चा भी ग़लत ही सीखता है, इसलिए किसी भी बच्चों के जीवन में माता-पिता की भूमिका बहुत ही महत्वपूर्ण होती है।

आप जैसा करते है आपके बच्चे वैसा ही देखकर सीखने की कोशिश करते हैं। यदि आप अपने बच्चे का भविष्य अच्छा बनाना चाहते हैं तो आप हमेशा उन्हें अच्छी शिक्षा दें। 
 
बच्चों के साथ समय बिताएं
आपके बच्चे छोटे हो या बड़े सभी माता-पिता से प्यार चाहते हैं। खासकर छोटे बच्चे को आप सिर्फ प्यार से ही कोई बात सीखा सकते हैं। इसलिए आप अपने कीमती समय में से कुछ पल निकाले जो सिर्फ आपके बच्चों के लिए ही हो तथा उन पलों में आप ये जानने की कोशिश करें कि आपका बच्चा आपसे क्या कहना चाहता है? उसके दिमाग में क्या चल रहा है? उसकी डेली लाइफ कैसे चल रही है उसमें कोई प्रॉब्लम तो नहीं है? उसे क्या पसंद है आप रोज थोड़ा समय निकालकर अपने बच्चों की गतिविधियों पर ध्यान दें। 
 
बच्चों के दिमाग़ को पढ़ने की कोशिश करें 
सभी बच्चे एक प्रवृत्ति के नहीं होते हैं, प्रत्येक बच्चों के सीखने के तौर तरीकों में अंतर होता है। बहुत बच्चे तो किसी बात को देखकर ही सीख जातें हैं और कुछ बच्चे बहुत देर से चीज़ों को सिख पाते हैं, इसलिए अपने बच्चों के दिमाग को पढ़ने की कोशिश करें। यदि आपका बच्चा देर से चीज़ों को सीखता है तो आपको अपने बच्चे पर अधिक ध्यान देने की ज़रूरत होगी ताकि वह चीजों को आसानी से सीख सके। 
 
स्कूल के कार्यों का घर पर रिवीजन कराएं 
कई ऐसे शिक्षक होते हैं जो बच्चों को खुले दिमाग से सीखने का अवसर देते हैं और माता-पिता को भी सलाह देते है कि वे बच्चों पर दबाव न डालें। आपका बच्चा स्कूल में क्या सीखता है? आपको इन बातों का ध्यान रखना चाहिए। बच्चों को स्कूल में जो पाठ पढ़ाया जाता है, उसका अभ्यास घर पर हो, इसकी जिम्मेदारी माता-पिता को होनी चाहिए।
 
बच्चों के पढ़ाई के समय को करें निर्धारित
बच्चों में पढ़ने की आदत डालें। यदि आपके बच्चे का मन पढ़ाई में नहीं लगता है तो उसे जोर-जोर से पाठ पढ़ने की आदत डालें। इससे यह होगा कि आपका बच्चा गलत पढ़ रहा है या सही इस बात की जानकारी आपको मिल पाएगी और जहां आपका बच्चा गलत पढ़ रहा होगा आप सही पढ़ने उसकी हेल्प कर सकेंगे। 
 
अपने बच्चों को सीखने में मदद करें 
सभी माता-पिता चाहतें है कि उनका बच्चा पढ़-लिखकर एक जिम्मेदार व्यक्ति बने। इसके लिए माता-पिता को जिम्मेदारी पूर्ण नेतृत्व प्रदान करना चाहिए। सभी माता-पिता को अपने बच्चों को सही प्रेरणा देनी चाहिए। जो बच्चों को अंदर से जागृत करें। सफलता और असफलता को एक समान समझने की कला विकसित करें। यह भविष्य में बहुत ही कारगर साबित होगा।  
 
अपने बच्चे के शेड्यूल को हमेशा व्यस्त न रखें 
यदि आप अपने बच्चे को स्कूल की शिक्षा के अलावा कोई बाहरी शिक्षा देना चाहते हैं तो आपको यह ध्यान रखना चाहिए कि यह आपके बच्चे की शेड्यूल में किसी प्रकार का बाधा न डालें। बच्चों को हमेशा व्यस्त रखने से उनकी प्रतिभा प्रभावित होती है। बच्चों को अपनी पसंद का खेल खेलना बहुत ही जरूरी होता है, बच्चे पढ़ाई संबंधी तनाव को खेल के जरिए दूर करतें हैं। 
 
नई चीज़ सीखें और बच्चों को भी सिखाएं 
बच्चों के रोल मॉडल बनने का यह बहुत ही अच्छा तरीका है। आप खुद भी नई चीज़ों को सीखने की कोशिश करें। नई चीज़ों की जानकारी आप खुद से अपने बच्चों में स्थानांतरित कर सकतें हैं। मान लीजिए की आपके सामने कोई ऐसी घटना घटी या अपने किसी ऐसी घटना के बारे में सुना या देखा है। जिससे आपके बच्चे को प्रेरणा मिल सकती है तो आप उस जानकारी को अपने बच्चों के साथ शेयर करें।  

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