Famous durga temples in india: चैत्र नवरात्रि के दिन चल रहे हैं और इन दिनों में माता के मंदिरों में भक्ति भारी संख्या में पहुंचकर देवी की आराधना कर रहे हैं। मान्यता है की पूरी श्रद्धा से माता की आराधना करने से वह अपने भक्तों का कल्याण करती हैं। भक्ति माता से अपनी मनोकामना के लिए प्रार्थना करते हैं। आज हम आपको देवी के एक ऐसे मंदिर के बारे में बताने जा रहे हैं जहां देवी की कृपा से बिना मुहूर्त में भी शादियां होती हैं।
मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले में स्थित जालपा देवी मंदिर एक ऐसा मंदिर है, जहां बिना मुहूर्त के विवाह संपन्न होते हैं। इस मंदिर की मान्यता है कि जिन युवक युवतियों की शादी में देर हो रही है या अड़चनें आ रही है यहां अर्जी लगाने से मां जालपा की कृपा से उनका विवाह बिना मुहूर्त के भी संपन्न हो जाते हैं। माता का ये मंदिर जयपुर-भोपाल मार्ग पर ऊंची पहाड़ी पर स्थित है।
जालपा देवी मंदिर में बनती है लग्न पत्रिका
जालपा देवी मंदिर में विवाह करने की एक अनोखी परंपरा है। यहां, जिन लोगों के विवाह के लिए शुभ मुहूर्त नहीं निकलते हैं, वे माता जालपा के दरबार में पांती लेने के लिए पहुंचते हैं। इसके बाद यहां के पंडितों के द्वारा माता के यहां से लग्न पत्रिका लिखी जाती है। उसके बाद ही दुल्हा दुल्हन का विवाह संपन्न होता है। विवाह संपन्न होने के तत्काल बाद माता के मंदिर में पहुंचकर वो पांती वापस माता को भेंट की जाती है। इस तरह माता के आशीर्वाद से मुहूर्त से बिना किसी दिक्कत के विवाह संपन्न हो जाते हैं। जालपा देवी मंदिर में विवाह करने की परंपरा सदियों से चली आ रही है। मंदिर की इसी विशेषता के चलते यहां दूर-दूर से लोग शादी की आस में पहुंचते हैं।
जालपा देवी मंदिर का इतिहास
जालपा देवी मंदिर का इतिहास लगभग 1100 साल पुराना है। यह मंदिर एक पहाड़ी पर स्थित है, जिसके चारों ओर घने जंगल हैं। मान्यता है कि यहां माता जालपा ने भक्त ज्वालानाथ की तपस्या से खुश होकर पीपल के पेड़ के नीचे दर्शन दिए थे। इसके बाद, पीपल के पेड़ के नीचे ही माता की मूर्ति मिली थी।
यह मंदिर भील राजाओं की कुलदेवी का मंदिर कहा जाता है। मान्यता है कि करीब 100 साल पहले राजा वीरेंद्र सिंह ने चबूतरे के स्थान पर लाल पत्थर से चार खंबे और मेहराब लगाकर छतरी बनाने का प्रयास किया था। लेकिन वह निर्माण एक रात में गिर गया।
राजा को सपने में आकर कही थी ये बात
मंदिर का निर्माण ढह जाने से राजा बहुत दुखी थे तब माता ने उन्हें सपने में आकर कहा था कि राजा तुम महलों में निवास करते हो तो देवी का मंदिर भी महल जैसा ही बनवाओ या फिर मुझे इस खुली पहाड़ी पर ही रहने दो। कहते हैं उसे समय संसाधनों के भाव के कारण यह मंदिर नहीं बन सका था।
कैसे हुआ मंदिर का निर्माण
करीब 35 वर्ष पूर्व तत्कालीन कलेक्टर ने मंदिर के विकास के लिए एक समिति का गठन किया और 8 अक्टूबर 1991 में मंदिर का भूमिपूजन किया गया। इसके बाद माता का भव्य मंदिर बनकर तैयार हुआ।आज यहां मंदिर में 65 फीट ऊंचा शिखर है।
दिग्गज नेता से लेकर बड़े अधिकारी तक लेते हैं माता का आशीर्वाद
जालपा देवी मंदिर में न केवल मध्य प्रदेश से, बल्कि राजस्थान, महाराष्ट्र और गुजरात जैसे राज्यों से भी भक्त आते हैं। यहां, नवरात्रि के दौरान भक्तों की भारी भीड़ होती है। माता के मंदिर में राजनेता से लेकर बड़े सरकारी अधिकारी सभी दर्शन के लिए आते हैं। जो भी अधिकारी यहां कार्यभार संभालता है वह पहले माता का आशीर्वाद लेने मंदिर जरूर पहुंचता है।