देवउठनी एकादशी 2019 : जानिए 5 खास बातें, जरूरी है पालन करना

अनिरुद्ध जोशी

बुधवार, 6 नवंबर 2019 (12:04 IST)
भगवान विष्णु आषाढ़ शुक्ल एकादशी को चार माह के लिए सो जाते हैं और कार्तिक शुक्ल एकादशी को जागते हैं। इस एकादशी के दिन से चतुर्मास का अंत भी हो जाता है। इसीलिए कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को देवउठनी एकादशी कहा जाता है। इसे हरि प्रबोधिनी एकादशी और देवोत्थान एकादशी भी कहा जाता है।
 
 
1.इस दिन से मांगलिक कार्य प्रारंभ होते हैं : चतुर्मास में देवशयन के कारण समस्त मांगलिक कार्य वर्जित होते हैं। जब देव जागते हैं तभी कोई मांगलिक कार्य संपन्न प्रारंभ होता है। चतुर्मास में किसी भी प्रकार के मांगलिक कार्य नहीं करना चाहिए।
 
 
2.इस दिन व्रत रखते हैं : इस दिन उपवास रखने का विशेष महत्व है। कहते हैं इससे मोक्ष की प्राप्ति होती है। इस दिन निर्जल या केवल जलीय पदार्थों पर उपवास रखना चाहिए। यदि उपवास नहीं रख रहे हैं तो इस दिन चावल, प्याज, लहसुन, मांस, मदिरा, बासी भोजन आदि बिलकुल न खाएं।

 
3.देव और तुलसी उपासना करना चाहिए : इस दिन भगवान विष्णु या अपने इष्ट-देव की उपासना करना चाहिए। इस दिन "ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः "मंत्र का जाप करने से लाभ मिलता है। शालीग्राम के साथ तुलसी का आध्यात्मिक विवाह देव उठनी एकादशी को होता है। इस दिन तुलसी की पूजा का महत्व है। तुलसी दल अकाल मृत्यु से बचाता है।
 
 
4.चंद्र होता है सही : कुंडली में चंद्रमा के कमजोर होने की स्थिति में जल और फल खाकर या निर्जल एकादशी का उपवास जरूर रखना चाहिए। व्यक्ति यदि सभी एकदशियों में उपवास रखता है तो उसका चंद्र सही होकर मानसिक स्थिति भी सुधर जाती है।
 
 
5.पौराणिक कथा का श्रवण-वाचन : इस दिन देवउठनी एकादशी की पौराणिक कथा का श्रावण या वाचन करना चाहिए। कथा सुनने या कहने से पुण्य की प्राप्ति होती है।

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