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अधिकमास की पद्मिनी एकादशी, जानें महत्व, कथा और संक्षिप्त पूजा विधि

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Padmini Ekadashi caption with description of various incarnations of Lord Vishnu in the image
Padmini Ekadashi Importance: पद्मिनी एकादशी, हिन्दू धर्म में एक अत्यंत पवित्र और शुभ दिन माना जाता है। यह एकादशी विशेष रूप से अधिकमास (Adhika Maas) में आती है, जो कि तीन साल में एक बार आता है। अधिकमास को धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि यह समय पुण्य कमाने और भगवान की भक्ति में लीन होने का अनुकूल अवसर होता है। इस बार पद्मिनी एकादशी 27 मई 2026, दिन बुधवार को मनाई जा रही है।ALSO READ: कैच नहीं छूटता तो कुलदीप ले लेते हैट्रिक, बने मैन ऑफ द मैच (Video)

3 वर्ष बाद आने वाले इस पावन व्रत का महत्व, पौराणिक कथा और पूजन की विधि नीचे दी गई है:

 

पद्मिनी एकादशी का महत्व

पद्मिनी एकादशी का व्रत करने से मनुष्य को जीवन के सभी सुखों की प्राप्ति होती है और अंत में मोक्ष मिलता है। मान्यता है कि जो फल कठिन तपस्या, यज्ञ और दान से भी नहीं मिलता, वह मात्र अधिकमास की पद्मिनी एकादशी का व्रत रखने से प्राप्त हो जाता है। मान्यतानुसार इस दिन भगवान विष्णु की पूजा करने से जाने-अनजाने में हुए सभी पाप कट जाते हैं। साथ ही अधिकमास में किए गए धार्मिक कार्यों का फल अनंत गुना होकर मिलता है। धार्मिक ग्रंथों में संतान प्राप्ति और सुख-समृद्धि के लिए यह व्रत अचूक माना गया है।

 

पद्मिनी एकादशी की पौराणिक कथा

पद्मिनी एकादशी की कथा त्रेतायुग के प्रतापी राजा कीर्तवीर्य और उनकी पत्नी पद्मिनी से जुड़ी है।
 

संतानहीन राजा की चिंता

त्रेतायुग में हैहय वंश में कृतवीर्य नाम के राजा राज करते थे। उनकी कई रानियां थीं, लेकिन किसी से भी उन्हें संतान का सुख प्राप्त नहीं हुआ। संतान न होने के कारण राजा और उनकी रानियां सदैव चिंतित और दुखी रहते थे। सारा राजपाठ और वैभव भी उन्हें आनंद नहीं दे पा रहा था।
 

कठिन तपस्या का मार्ग

संतान की कामना के लिए राजा कृतवीर्य ने अपना राजपाट मंत्रियों को सौंप दिया और अपनी परम प्रिय रानी पद्मिनी के साथ गंधमादन पर्वत पर तपस्या करने चले गए। राजा ने हजारों वर्षों तक कठिन तप किया, उनका शरीर क्षीण हो गया, लेकिन फिर भी उन्हें संतान की प्राप्ति नहीं हुई।
 

देवी अनुसूया का मार्गदर्शन

रानी पद्मिनी ने तब सती अनुसूया जी से इसका उपाय पूछा। माता अनुसूया ने कहा, 'हे देवी! हर तीन वर्ष में एक बार आने वाला मलमास (अधिकमास) अत्यंत पवित्र है। इसमें आने वाले शुक्ल पक्ष की एकादशी का नाम पद्मिनी है। यदि तुम इस एकादशी का विधि-विधान से व्रत करोगी, तो भगवान पुरुषोत्तम तुम्हारी इच्छा अवश्य पूरी करेंगे।'
 

व्रत का प्रभाव और पराक्रमी पुत्र का जन्म

रानी पद्मिनी ने माता अनुसूया के कहे अनुसार अधिकमास की एकादशी का निराहार रहकर पूरी श्रद्धा से व्रत किया और रात्रि जागरण किया। रानी के इस कठिन व्रत से प्रसन्न होकर भगवान विष्णु प्रकट हुए और उन्होंने वरदान मांगने को कहा।
 
रानी ने कहा, 'प्रभु! मेरे पति को संतान प्राप्ति का वरदान दीजिए।' तब भगवान विष्णु ने राजा से वरदान मांगने को कहा। राजा कृतवीर्य ने वर मांगा, 'हे नाथ! मुझे एक ऐसा पुत्र प्राप्त हो जो सर्वगुण संपन्न हो, तीनों लोकों में आदरणीय हो और जिसे आपके अतिरिक्त कोई और परास्त न कर सके।'
 
कथा का सुखद अंत: भगवान विष्णु ने 'तथास्तु' कहा और अंतर्ध्यान हो गए। समय आने पर रानी पद्मिनी के गर्भ से एक अत्यंत पराक्रमी पुत्र ने जन्म लिया, जो आगे चलकर कार्तवीर्य अर्जुन (सहस्रार्जुन) के नाम से प्रसिद्ध हुआ। वह इतना शक्तिशाली था कि उसने लंकापति रावण को भी बंदी बना लिया था।ALSO READ: 3 साल बाद आई अधिकमास की पद्मिनी एकादशी, जानें व्रत का महत्व, शुभ मुहूर्त और पौराणिक कथा
 

व्रत की संक्षिप्त पूजा विधि

सुबह का संकल्प: एकादशी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण कर व्रत का संकल्प लें।
 
पूजा स्थापना: चौकी पर पीला कपड़ा बिछाकर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की मूर्ति या चित्र स्थापित करें।
 
धूप-दीप और भोग: भगवान को पीले फूल, पीले फल, तुलसी दल, अक्षत और चंदन अर्पित करें। घी का दीपक जलाएं।
 
कथा और आरती: पद्मिनी एकादशी की व्रत कथा पढ़ें या सुनें और अंत में विष्णु जी की आरती करें।
 
जागरण: इस व्रत में रात के समय जागरण करने का विशेष महत्व है।
 
पारणा: द्वादशी तिथि के दिन शुभ मुहूर्त में किसी ब्राह्मण को भोजन या दान देकर व्रत का पारणा (व्रत खोलना) करें।
 

अधिकमास 2026 और पद्मिनी एकादशी– FAQs

 

1. अधिकमास का धार्मिक महत्व क्या है?

उत्तर: यह मास व्रत, दान और पूजा का सर्वोत्तम समय है। इस मास में किए गए धार्मिक कार्यों का पुण्य कई गुना बढ़ जाता है।
 

2. अधिकमास में दान का महत्व क्या है?

उत्तर: इस मास में गरीबों और ब्राह्मणों को दान करने से पुण्य का फल बढ़ जाता है और व्यक्ति के जीवन में समृद्धि आती है।
 
 
अस्वीकरण (Disclaimer) : चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं, जो विभिन्न सोर्स से लिए जाते हैं। इनसे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। सेहत या ज्योतिष संबंधी किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। इस कंटेंट को जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है जिसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।ALSO READ: Padmini Ekadashi 2026: अधिकमास की पद्मिनी एकादशी की 5 खास बातें, जानिए व्रत रखने के 5 नियम

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