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कोरोना के बाद वन नेशन-वन हेल्थ सिस्टम क्यों जरूरी, सस्ते इलाज के साथ हेल्थ सिस्टम में क्या होंगे बदलाव? पढ़ें पूरी खबर

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विकास सिंह

गुरुवार, 9 जून 2022 (15:15 IST)
भोपाल। कोरोना काल के बाद देश में वन नेशन-वन हेल्थ सिस्टम को लेकर चर्चा तेज हो गई है। कोरोना ने देश की स्वास्थ्य व्यवस्था के सामने ने जिस तरह की चुनौतियां पेश की उसके बाद में एक मजबूत स्वास्थ्य व्यवस्था की जरूरत महसूस की जाने लगी है। पिछले दिनों राजधानी भोपाल में आरोग्य भारती के कार्यक्रम में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कहा कि ‘एक देश-एक स्वास्थ्य तंत्र’ आज के समय की महती आवश्यकता है।

‘वन नेशन-वन हेल्थ सिस्टम’ को लेकर केंद्र सरकार का नीति आयोग और आरोग्य भारती लगातार काम कर रहा है। आरोग्य भारती ने वन नेशन-वन हेल्थ सिस्टम को लेकर नीति आयोग को एक ड्रॉफ्ट भी सौंपा चुका है। आखिर ‘वन नेशन-वन हेल्थ सिस्टम’ क्या है और इसके लागू होने से क्या फायदे होंगे इसको लेकर ‘वेबदुनिया’ ने आरोग्य भारती के राष्ट्रीय संगठन सचिव डॉ अशोक कुमार वार्ष्णेय से खास बातचीत की।
 
वन नेशन-वन हेल्थ सिस्टम की जरूरत क्यों?-आरोग्य भारती के राष्ट्रीय संगठन सचिव डॉक्टर अशोक कुमार वार्ष्णेय कहते हैं कि कोरोनाकाल में हम सभी ने देखा कि ग्रामीण क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध नहीं थी जोकि हमारे लिए महामारी से निपटने में एक बड़ी चुनौती के रूप में सामने आया।
 
वहीं आज देश में मेडिकल ट्रीटमेंट बहुत अधिक महंगा गया है। सामान्य तौर पर देखा जाता है कि अगर किसी परिवार का एक सदस्य अगर बीमार हो जाता तो स्वस्थ्य होने तक इतना खर्चा हो जाता है कि वह परिवार गरीबी रेखा के नीचे चला जाता है। इसके साथ कोरोना कालखंड में समाज के प्रत्येक व्यक्ति ने यह भी अनुभव किया कि प्रत्येक रोग की सटीक औषधि उपलब्ध होना आवश्यक नहीं है। 
 
ऐसे में आज देश में एक मजबूत स्वास्थ्य तंत्र की जरूरत है। जिससे देश के ग्रामीण क्षेत्रों में अच्छी स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध हो सके, मेडिकल ट्रींटमेंट (इलाज) में आने वाले खर्च को कम किया जा सके, डॉक्टर-पेंशेंट रेश्यो को ठीक करने के लिए एलोपौथी के साथ आयुर्वेद डॉक्टरों को भी शामिल कर इस तरह का सिस्टम विकसित किया जाए। 
 
वन नेशन-वन हेल्थ सिस्टम क्या है?- वन नेशन-वन हेल्थ सिस्टम को लेकर आरोग्य भारती ने नीति आयोग को एक ड्राफ्ट सौंपा है। ‘वेबदुनिया’ से बातचीत में आरोग्य भारती के संगठन संचिव डॉक्टर अशोक कुमार वार्ष्णेय कहते हैं कि वन नेशन-वन हेल्थ सिस्टम से सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों तक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा पहुंचाई जा सकेगी, इसके  साथ ही चिकित्सक जनसंख्या अनुपात को भी ठीक किया जा सकता है। इस व्यवस्था से सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाएं अच्छी होंगी स्थानीय औषधि उपयोग एवं स्वास्थ्य जागरूकता के माध्यम से खर्च भी कम होगा।
 
केंद्र सरकार के अंतर्गत आने वाला नीति आयोग लंबे समय से वन नेशन-वन हेल्थ सिस्टम को लेकर नीति तैयार करने में लगा है। इसके लिए नीति आयोग ने देश में एक नया स्वास्थ्य सिस्टम बनाने के लिए ऐसे 80 प्यूरोपैथ (एक से अधिक चिकित्सा पद्धति का अध्यन) करने वालों  को लेकर अलग-अलग टीम बनाई है। वहीं नीति आयोग की तर्ज पर आरोग्य भारती ने भी देश में ऐसे 100 लोगों की पहचान कर 4 टीम बनाई है जो वन नेशन-वन हेल्थ सिस्टम में देश में मेडिकल एजुकेशन कैसा हो,रिसर्च वर्क कैसे होगा, क्लीनिक्ल प्रैक्टिस कैसे होगी और पब्लिक हेल्थ में कैसे जाएंगे इस पर काम कर रही है। इन टीमों की अनुशंसा पर आरोग्य भारती ने वन नेशन-वन हेल्थ सिस्टम को लेकर एक ड्राफ्ट तैयार कर 24 जनवरी 2021 को नीति आय़ोग को सौंप दिया। 
 
होलिस्टिक हेल्थ एप्रोच की जरूरत-इसके साथ वन नेशन-वन हेल्थ सिस्टम में लोगों को अपने स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करना भी है जिससे वह बीमार ही नहीं पड़े। वन नेशन-वन हेल्थ सिस्टम के ड्राफ्ट की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि स्वस्थ्य व्यक्ति स्वस्थ्य बना रहे यानि वह व्यक्ति बीमारियों के चपेट में नहीं आए इसके लिए वह कौन से उपाय होंगे जिसको करना होगा। डॉ. अशोक वार्ष्णेय कहते हैं कि प्रत्येक व्यक्ति अगर स्वयं के स्वास्थ्य के लिए जागरूक हो जाए तो वह बगैर औषधि के भी स्वस्थ रह सकता है। इससे दूसरे शब्दों में कहे तो अच्छे स्वास्थ्य के लिये "होलिस्टिक हेल्थ एप्रोच" आज जरूरी है।
 
वन नेशन-वन हेल्थ सिस्टम में चुनौतियां-आरोग्य भारती के संगठन सचिव डॉ. अशोक वार्ष्णेय कहते हैं कि वन नेशन-वन हेल्थ सिस्टम में सबसे बड़ी व्यावहरिक समस्या इस बात की है जो चिकित्सक जिस पद्धति से पढ़ाई करता है वह उसी पद्धति को श्रेष्ठ मानता है। वहीं उनका मानना है कि चिकित्सकों को दूसरी पद्धति का अध्ययन भी करना चाहिए जिससे की वह उसे जान सके।

वन नेशन वन हेल्थ सिस्टम में चिकित्सकों के साथ चर्चा करने के साथ समाज का भी प्रबोधन करना होगा। आज देश में इस पर व्यापर चर्चा की जरूत है, चर्चा के बाद जो सुझाव निकल कर आए उसके अनुसार देश में वन नेशन-वन हेल्थ सिस्टम को लागू किया जाए। वह कहते हैं कि सभी चिकित्सा पद्धतियों की अपनी-अपनी विशेषता है तो अपनी-अपनी सीमाएं भी है। हर चिकित्सा पद्धति एक-दूसरे की पूरक होती हैं। आरोग्य भारती सभी को सम्मान के साथ देखती है।

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