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Ganesh Chaturthi 2019 : श्री गणेश पूजन की सामग्री एवं सरल विधि खास आपके लिए

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पं. हेमन्त रिछारिया

हमारे सनातन धर्म में भगवान गणेश को प्रथम पूज्य माना गया है। वे अपने भक्तों के समस्त विघ्नों का हरण कर उन्हें सिद्धि-बुद्धि प्रदान करते हैं इसीलिए उन्हें विघ्नहर्ता भी कहा जाता है। सोमवार, 2 सितंबर 2019 को गणेश चतुर्थी है। इस दिन घर-घर में गणेशजी की स्थापना होगी।
 
गणेश चतुर्थी के दिन मिट्टी की गणेश प्रतिमा पूजाघर में स्थापित कर पूर्ण विधि-विधान से भगवान श्री गणेश की पूजा-अर्चना की जाती है। आज हम 'वेबदुनिया' के पाठकों के लिए गणेशजी की स्थापना व पूजा की अत्यंत सरल विधि बताने जा रहे हैं। जो श्रद्धालुगण मंत्रों के उच्चारण में असहज हो जाते हैं, वे इस सरल हिन्दीभाषी पद्धति से स्वयं भगवान गणेश की स्थापना कर उनकी विधिवत पूजा-अर्चना कर सकते हैं।
 
आइए जानते हैं श्री गणेश स्थापना व पूजा का क्रम-
 
आवश्यक पूजा सामग्री- गणेशजी की प्रतिमा, घी का दीपक, सिन्दूर, अक्षत (साबुत चावल), हल्दी, दूध, पंचामृत, दूर्वा, पुष्प, धूपबत्ती, वस्त्र, गुड़ व मोदक/मिठाई, गंगा जल/ नर्मदा जल, कलश, श्रीफल, फल, माला।
 
पूजा विधि-
 
1. सर्वप्रथम घी का दीपक प्रज्वलित कर अपने दाएं ओर रखें। अब थोड़ा जल लेकर स्वयं के ऊपर छिड़कते हुए मार्जन कर स्वयं को पवित्र करें। मार्जन करते समय मन में यह भाव करें कि 'जो भगवान का स्मरण करता है, वह भीतर और बाहर से सभी अवस्थाओं में शुद्ध हो जाता है।'
 
2. अब अपनी हथेली की अंजुली में थोड़ा-थोड़ा जल लेकर उसे 3 बार पिएं। जल पीते समय निम्न मंत्र बोलें-
ॐ केशवाय नम:, ॐ माधवाय नम:, ॐ नाराणाय नम:। इसके पश्चात 'ॐ गोविन्दाय नम:' बोलकर हाथ धो लें।

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3. अब हाथ में थोड़े से अक्षत लेकर उनमें हल्दी मिला लें और भगवान श्री गणेश के स्वरूप का ध्यान करते हुए उन्हें अपने घर आमंत्रित करने का भाव करते हुए उनका आवाहन करें। आवाहन के लिए मन ही मन यह उच्चारण करें- 'हे प्रभो, मैं आपको अपने घर आमंत्रित कर रहा हूं। आप सिद्धि-बुद्धि सहित मेरे घर पधारें'। उसके पश्चात 'ॐ श्री गणेशाय नम:' बोलकर गणेशजी की प्रतिमा के सम्मुख हाथ में लिए पीले चावल अर्पण कर दें।
 
4. अब भगवान श्री गणेश आपके घर पधार चुके हैं तत्पश्चात आपको भगवान गणेश के पैर पखारने हैं जिसके लिए आप मन में यह भाव करते हुए कि 'मैं भगवान श्री गणेश के श्रीचरणों को पखार (धो) रहा हूं' एक आचमनी में जल लेकर भगवान श्री गणेश की प्रतिमा के सम्मुख अर्पित कर दें।
 
5. अब आपको भगवान श्री गणेश को विराजित करने के लिए आसन देना है। इसके लिए आपने जो भी स्थान नियत किया है, मन में यह भाव करते हुए कि 'मैं भगवान गणेश को बैठने के लिए आसन प्रदान करता हूं', उस आसन पर एक दूर्वा रखकर भगवान की प्रतिमा को उस पर स्थापित कर दें।
 
6. अब हाथ में अक्षत लेकर दीपक का पूजन करते हुए दीपक के सम्मुख अक्षत व पुष्प अर्पित करें, तत्पश्चात हाथ में जल, अक्षत व पुष्प लेकर माता पृथ्वी पर अर्पित कर उन्हें प्रणाम करें।
 
7. अब कलश में जल भरकर उसमें हल्दी, चांदी का सिक्का व सर्वोषधि मिलाएं व उस पर आम के पत्तों के साथ एक श्रीफल लाल वस्त्र में लपेटकर रख दें। अब हाथ में पुष्प व अक्षत लेकर मन में वरुण देवता का ध्यान करते हुए यह भाव करें कि 'इस कलश में समस्त तीर्थों व पवित्र नदियों का जल आकर मिल रहा है', तत्पश्चात हाथ में लिए अक्षत व पुष्प कलश पर अर्पित कर दें।
 
8. अब अभिषेक पात्र में दूर्वा रखकर भगवान श्री गणेश का चलित विग्रह, जो पीतल/ चांदी/ स्फटिक/ पारद का हो, रखकर भगवान गणेश को शुद्ध जल से स्नान कराएं, तत्पश्चात पंचामृत से भगवान को स्नान कराएं। उसके बाद 'अर्थवशीर्ष' के पाठ के साथ भगवान श्री गणेश का दुग्धाभिषेक करें।
 
9. भगवान श्री गणेश के अभिषेक के उपरांत पुन: उन्हें शुद्ध जल से स्नान कराकर, इत्र लगाकर आसन पर पधराएं और सुन्दर वस्त्र व अलंकारों से सुसज्जित करें।
 
10. अब भगवान श्री गणेश को सिन्दूर लगाएं व पुष्प अर्पित कर माला पहनाएं।
 
11. अब भगवान श्री गणेश को मोदक व गुड़ के साथ दूर्वा रखकर भोग लगाएं, कुछ समय बाद भगवान को पीने हेतु जल दें। अंत में फलों का भोग लगाएं।
 
12. अब भगवान श्री गणेश की आरती उतारकर उन्हें दंडवत प्रणाम करें और हाथ में एक श्रीफल, दूर्वा व यथासामर्थ्य दक्षिणा रखकर क्षमा-प्रार्थना करते हुए यह सामग्री गणेशजी के सम्मुख अर्पित करें। अंत में थोड़ा-सा जल अपने आसन के नीचे भूमि पर छोड़कर उसे अपने दोनों नेत्रों से लगाकर पूजा संपन्न करें।
 
-ज्योतिर्विद् पं. हेमन्त रिछारिया
प्रारब्ध ज्योतिष परामर्श केंद्र
 
 

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